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राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम

National Viral Hepatitis Control Program
  • पृष्ठभूमि
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ‘वायरल हेपेटाइटिस’ को एक ऐसी गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में चिह्नित किया है जिस पर त्वरित कार्यवाही की आवश्यकता है। वायरल हेपेटाइटिस के कारण वर्ष 2015 में वैश्विक स्तर पर कुल 1.34 मिलियन लोगों की मृत्यु हुई थी, जो कि क्षय रोग (TB) एवं एचआईवी (HIV) के कारण होने वाली मौतों से भी अधिक है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा जारी ‘वैश्विक स्वास्थ्य रिपोर्ट, 2017’ के अनुसार लगभग 32.5 करोड़ लोग हेपेटाइटिस ‘बी’ और ‘सी’ से पीड़ित हैं। इस स्वास्थ्य समस्या से भारत भी अछूता नहीं है। भारत में 1 करोड़ से अधिक लोग हेपेटाइटिस-सी से पीड़ित हैं। डब्ल्यूएचओ के वैश्विक रोग आकलन रिपोर्ट, 2016 के अनुसार, भारत में हुई कुल मौतों में 2.85  प्रतिशत मौते ‘वायरल हेपेटाइटिस’ के कारण हुई हैं। इनको देखते हुए वर्ष 2016 में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा आयोजित विश्व स्वास्थ्य सभा में वायरल हेपेटाइटिस पर ‘वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र रणनीति (Global Health Sector Strategy), 2016-2021’ पारित किया गया था। इस रणनीति में विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्य देशों ने ‘वायरल हेपाटाइटिस’ को वर्ष 2030 तक समाप्त करने का संकल्प लिया गया था। इसी क्रम में भारत सरकार ने भी वर्ष 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस के उन्मूलन की दिशा में प्रतिबद्धता जताते हुए ‘राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम’ प्रारंभ किया।
  • वर्तमान संदर्भ
  • 28 जुलाई, 2018 को विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर भारत सरकार के केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने ‘राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम’ का नई दिल्ली में शुभारंभ किया।
  • उद्देश्य
  • इस कार्यक्रम के निम्नलिखित मुख्य उद्देश्य हैं-
  • हेपेटाइटिस का मुकाबला करते हुए वर्ष 2030 तक संपूर्ण देश से ‘हेपेटाइटिस सी’ का उन्मूलन करना।
  • हेपेटाइटिस ‘बी’ एवं ‘सी’ से होने वाले संक्रमण तथा उसके परिणामस्वरूप सिरोसिस (Cirrhosis) और लिवर कैंसर के कारण होने वाली रुग्णता एवं मृत्यु में कमी लाना।
  • हेपेटाइटिस ‘ए’ और ‘ई’ से होने वाले जोखिम, रुग्णता एवं मृत्यु में कमी लाना।
  • कार्यक्रम के अंग
  • इस कार्यक्रम के मुख्य अंग इस प्रकार हैं-
  1. निवारण अंग
  2. निदान एवं उपचार,
  3. निगरानी एवं मूल्याकंन तथा
  4. प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण।
  • दिशानिर्देश
  • राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के परिचालन के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए। साथ ही वायरल हेपेटाइटिस परीक्षण के लिए राष्ट्रीय प्रयोगशाला दिशा-निर्देश भी जारी किए गए।
  • इसके अतिरिक्त वायरल हेपेटाइटिस के नैदानिकी एवं प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय  दिशा-निर्देश जारी किए गए।
  • इस कार्यक्रम का क्रियान्वयन ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन’ के तहत किया जाएगा।
  • राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के प्रथम तीन वर्ष के निम्नलिखित मुख्य संचयी भौतिक लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं-
  1. कार्यक्रम प्रबंधन
  • प्रथम वर्ष में राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस प्रबंधन इकाई की स्थापना करना।
  • प्रथम वर्ष में ही वर्तमान राज्य स्वास्थ्य संचालन प्रणाली के अंतर्गत राज्य वायरल हेपेटाइटिस प्रबंधन इकाई की स्थापना करना।
  • गौरतलब है कि यह कार्यक्रम केंद्र और राज्य के तीन इकाइयों द्वारा संचालित होगा – राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस प्रबंधन इकाई, राज्य वायरल हेपेटाइटिस प्रबंधन इकाई और जिला वायरल हेपेटाइटिस प्रबंधन इकाई।
  1. रोकथाम
  • प्रसव पूर्व गर्भवती स्त्री की हेपेटाइटिस-बी की जांच प्रोटोकॉल को विकसित एवं लागू करना।
  • हेपेटाइटिस-बी के टीकाकरण को 90 प्रतिशत से भी अधिक बढ़ाना।
  • रक्त सुरक्षा संबंधी लक्ष्य और सुरक्षित सुइयों के प्रयोग को बढ़ावा देना।
  1. निदान एवं उपचार
  • प्रथम वर्ष के अंत तक राष्ट्रीय प्रयोगशाला, राज्य प्रयोगशाला एवं जिला निदान केंद्र स्थापित करना।
  • ‘त्वरित निदान किट’ का प्रत्येक स्तर पर प्रयोग करना।
  • प्रथम वर्ष में 1.6 लाख व्यक्तियों की, द्वितीय वर्ष में 10.1 लाख व्यक्तियों की एवं तृतीय वर्ष में 30.1 लाख व्यक्तियों की ‘हेपेटाइटिस- सी’ की जांच करना।
  • हेपेटाइटिस ‘बी’ एवं ‘सी’ वायरल की जांच के लिए लोगों को प्रोत्साहित करना।
  • प्रथम वर्ष में प्रत्येक राज्य या संघ शासित प्रदेश में एक आदर्श हेपेटाइटिस उपचार केंद्र स्थापित करना।
  1. प्रशिक्षण
  • प्रथम वर्ष के अंत तक सभी प्रशिक्षण केंद्र, उपचार केंद्र एवं प्रयोगशालाओं को परिचालित करना।
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य सहित अन्य स्वास्थ्य सुविधा केंद्रों की क्षमताओं को विकसित करना।
  1. निगरानी एवं मूल्यांकन
  • वायरल हेपेटाइटिस से पीड़ित व्यक्ति के पंजीयन सूचना के लिए ‘वेब’ (Web) आधारित वायरल हेपेटाइटिस सूचना और प्रबंधन प्रणाली विकसित करना।
  • राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस निगरानी कार्यक्रम के साथ समन्वय करना।
  • विश्व हेपेटाइटिस दिवस
  • प्रत्येक वर्ष 28 जुलाई को हेपेटाइटिस के बारे में जागरूकता प्रसारित करने और लोगों को शीघ्र निदान, रोकथाम और हेपेटाइटिस के उपचार को प्रोत्साहित करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा ‘विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाए जाने की शुरुआत की गई।
  • वैश्विक अभियान के लिए विश्व हेपेटाइटिस दिवस, 2018 का विषय (Theme) है- ‘टेस्ट, ट्रीट, हेपेटाइटिस’ (Test, Treat, Hepatitis)।
  • हेपेटाइटिस क्या है?
  • हेपेटाइटिस यकृत (liver) के सूजन की अवस्था है, जो या तो स्वतः ठीक हो जाती है या फिर यह अवस्था ‘फिबरोसिस’ (fibrosis), ‘सिरोसिस’ (cirrhosis) या यकृत कैंसर के रूप में परिवर्तित हो जाता है।
  • हेपेटाइटिस के लिए मुख्यतः हेपेटाइटिस वायरस उत्तरदायी होते हैं। इसके अतिरिक्त संक्रमण, विषाक्त पदार्थ (जेसे एल्कोहल, विशेष दवाईयां) और स्व-प्रतिरक्षित (Autoimmune) बीमारियां भी हेपेटाइटिस के कारण हो सकती हैं।
  • हेपेटाइटिस के प्रकार एवं कारण
  • हेपेटाइटिस विषाणु (Virus) मुख्यतः पांच प्रकार – ए, बी, सी, डी और  ई के होते हैं।
  • उपर्युक्त प्रकारों में ए और सी के कारण दीर्घकालिक (Chronic) बीमारियां होती हैं। निम्नलिखित तालिका में हेपेटाइटिस के प्रकार एवं कारणों का वर्णन किया गया है-
प्रकारमुख्य कारणटीके की उपलब्धता
हेपेटाइटिस-Aदूषित आहार और पानीटीका उपलब्ध है।
हेपेटाइटिस-Bसंक्रमित व्यक्ति के रक्त, वीर्य, आदि से; संक्रमित माता से उसके नवजात शिशु कोटीका उपलब्ध है।
हेपेटाइटिस-Cसंक्रमित रक्त और सुइयों सेकोई टीका नहीं है।
हेपेटाइटिस-Dहेपेटाइटिस ‘B’ से संक्रमित व्यक्ति को होता है।टीका उपलब्ध है।
हेपेटाइटिस-Eदूषित पानीकोई टीका नहीं है।

लेखक-ललिंदर कुमार