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राष्ट्रीय वन्यजीव आनुवांशिक संसाधन बैंक

National Wildlife Genetic Resources Bank
  • वर्तमान संदर्भ
  • 12 अगस्त, 2018 को केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन द्वारा कोशिकीय एवं आणविक जीव विज्ञान केंद्र (Centre for Cellular and Molecular Biology : CCMB) के लुप्तप्राय वन्य-प्राणी प्रजाति संरक्षण प्रयोगशाला (Laboratory of Conservation of Endangered Species : Lacones) में राष्ट्रीय वन्यजीव आनुवांशिक संसाधन बैंक का हैदराबाद (तेलंगाना) में उद्घाटन किया गया।
  • उद्देश्य
  • भारत के इस प्रथम आनुवांशिक संसाधन बैंक का उद्देश्य विलुप्तप्राय एवं संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण एवं पुनरुत्थान के लिए प्रयास करना है।
  • संबंधित तथ्य
  • यह आनुवांशिक बैंक क्रायो (अति निम्न ताप) तकनीक का उपयोग कर भारत के संकटग्रस्त वन्यजीव प्रजातियों के जीवित कोशिका, युग्मक एवं भ्रूण को संरक्षित करेगा।
  • अब तक भारतीय वन्यजीवों की 23 प्रजातियों के आनुवांशिक संसाधनों को संग्रहित एवं संरक्षित कर लिया गया है।
  • भारत में इस प्रकार की सुविधा को विकसित करने हेतु सीसीएमबी के शोधकर्ताओ ने संयुक्त राज्य अमेरिका के सैन डियागो चिड़ियाघर स्थित ‘फ्रोजेन’ (Frozen) चिड़ियाघर का विस्तृत अध्ययन किया।
  • फ्रोजेन चिड़ियाघर विलुप्तप्राय एवं संकटग्रस्त जीवों के संरक्षण हेतु विश्व का सबसे बड़ा आनुवांशिक बैंक है।
  • पूर्व में किए गए सफल प्रयास
  • सीसीएमबी, केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण एवं तेलंगाना राज्य वन विभाग के संयुक्त प्रयास से भारतीय मूषक हिरण (Indian Mouse Deer) को संरक्षित किया गया है।
  • लैकोंस (Lacones) के सहयोग से नेहरू प्राणी उद्यान में भारतीय मूषक हिरण के संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम को वर्ष 2010 में प्रारंभ किया गया था।
  • इसके परिणामस्वरूप तेलंगाना के ‘अमराबाद टाइगर रिजर्व’ में इस हिरण की संख्या में वृद्धि हुई।
  • कोशिकीय एवं आणविक जीव विज्ञान केंद्र (CCMB)
  • सीसीएमबी,  आधुनिक जीव विज्ञान के अग्रगामी क्षेत्रों में शोध करने वाला एक प्रमुख अनुसंधान संगठन है।
  • आरंभ में सीसीएमबी की स्थापना एक अर्ध-स्वायत केंद्र के रूप में 1 अप्रैल, 1977 को क्षेत्रीय अनुसंधान प्रयोगशाला (वर्तमान भारतीय रासायनिक प्रौद्योगिक संस्थान) के जैव रसायन प्रभाग के अंतर्गत की गई थी।
  • लैकोंस (Lacones)
  • भारत में लुप्तप्राय वन्यजीवों के संरक्षण एवं जैव प्रौद्योगिकी संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय जैव प्रौद्योगिकी विभाग, भारतीय केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद एवं तत्कालीन आंध्र प्रदेश सरकार के संयुक्त सहयोग से लैकोंस परियोजना को आरंभ किया गया था।
  • यह परियोजना वर्ष 1998 में प्रारंभ हुई थी, जबकि इसके अंतर्गत वर्ष 2007 में प्रयोगशाला स्थापित की गई थी।

लेखक-ललिंदर कुमार