Contact Us: 0532-246-5524,25, M: -9335140296 Email: [email protected]

राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति, 2018

National Digital Communications Policy, 2018
    • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
    • 26 सितंबर, 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में वंफ्रेद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा ‘राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति, 2018’ (एनडीसीपी, 2018) को मंजूरी दी गई और ‘दूरसंचार आयोग’ को ‘डिजिटल संचार आयोग’ के रूप में पुनः नामित किया गया।
    • उद्देश्य
    • राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति, 2018 का उद्देश्य डिजिटल सशक्तीकरण एवं भारत के लोगों की खुशहाली के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए डिजिटल संचार नेटवर्क की परिवर्तनकारी शक्ति को प्रस्तुत करना और इस प्रयोजनार्थ उद्देश्यों के समुच्चय (Set of target) पहलों (Initiatives), कार्यनीतियों एवं अभीष्ट नीतिगत परिणामों (Strategy and Accurate Policy Results) को दर्शाने का प्रयास करना है।




  • राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति : एक आवश्यकता
  • वर्तमान विश्व ने दूरसंचार क्षेत्र में 5जी, आईओटी (Internet of Things), एम2एम (Machine-to-machine) इत्यादि जैसे आधुनिक प्रौद्योगिकी उन्नति के युग में प्रवेश किया है, जिससे भारतीय दूरसंचार क्षेत्र के लिए ‘उपभोक्ता केंद्रित’ और ‘एप्लीकेशन द्वारा संचालित’ नीति को आरंभ करने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी, जो न केवल दूरसंचार सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के लिए अपितु दूरसंचार आधारित सेवाओं का विस्तार करने के लिए भी उभरते हुए अवसरों का पता लगाते हुए ‘डिजिटल इंडिया’ का मुख्य स्तंभ बन सके।
  • राष्ट्रीय डिजिटल नीति, 2018 के लक्ष्य
  1. सभी के लिए ब्रॉडबैंड का प्रावधान करना।
  2. डिजिटल संचार क्षेत्र में 4 मिलियन अतिरिक्त रोजगार सृजित करना।
  3. भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में डिजिटल क्षेत्र के योगदान को वर्ष 2017 में 6 प्रतिशत की तुलना में इसे बढ़ाकर 8 प्रतिशत करना।
  4. इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (ITU) के सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) विकास सूची में भारत का स्थान वर्ष  2017 में 134वां था, इसे बढ़ाकर शीर्ष 50 देशों में लाना है।
  5. वैश्विक मूल्य शृंखला में भारत के योगदान को बढ़ाना।
  6. डिजिटल संप्रभुता सुनिश्चित करना।
  • ये सभी लक्ष्य वर्ष 2022 तक हासिल किए जाएंगे।
  • विजन
  • सर्वव्यापी, लचीली, सुरक्षित, अभिगम्य एवं किफायती डिजिटलीकृत संचार अवसंरचना तथा सेवाओं की स्थापना करके नागरिकों और उद्यमों की सूचना एवं संचार संबंधी जरूरतों की पूर्ति करना एवं इस प्रक्रिया में भारत को डिजिटल रूप से सशक्त अर्थव्यवथा तथा समाज के रूप में परिवर्तित करने में सहायता करना।
  • मिशन
  • वर्ष 2022 तक इन प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति, 2018 में निम्नलिखित तीन मिशनों की परिकल्पना की गई है-
    1. भारत को जोड़ना : मजबूत डिजिटल संचार अवसंरचना का निर्माण करना।
    2. भारत को आगे बढ़ाना : अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों एवं सेवाओं को निवेशों, नवपरिवर्तनों और आईपीआर (IPR : Intellectual Property Rights) सृजन के माध्यम से सक्षम बनाना।
    3. भारत को सुरक्षित करना : डिजिटल संचार की संप्रभुता, बचाव एवं सुरक्षा को सुनिश्चित करना ।




1. भारत को जोड़ना : वर्ष 2022 के लक्ष्य

    • क. प्रत्येक नागरिक को 50 एमबीपीएस पर सार्वभौमिक ब्रॉडबैंड कवरेज उपलब्ध कराना।
    • ख. भारत की सभी ग्राम पंचायतों को वर्ष 2020 तक 1 जीबीपीएस और वर्ष 2022 तक 10 जीबीपीएस कनेक्टिविटी प्रदान करना।
    • ग. मांग पर सभी शैक्षणिक संस्थानों सहित सभी मुख्य विकास संस्थानों को 100 एमबीपीएस ब्रॉडबैंड समर्थित बनाना।
    • घ. 50 प्रतिशत घरों के लिए स्थिर लाइन ब्रॉडबैंड की पहुंच सक्षम बनाना।
    • ङ. वर्ष 2020 तक 55 और वर्ष 2022 तक 65 ‘विशिष्ट मोबाइल उपभोक्ता घनत्व का लक्ष्य प्राप्त करना।
    • च. वर्ष 2020 तक 5 मिलियन और वर्ष 2022 तक 10 मिलियन तक सार्वजनिक वाई-फाई हॉटस्पॉट का प्रविस्तारण करना।
    • छ. कवर न किए गए सभी क्षेत्रों के लिए कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना।
    • कार्यनीतियां
    • सार्वभौमिक ब्रॉडबैंड की पहुंच का लक्ष्य प्राप्त करने के राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड अभियान स्थापित करना।




  • नवीन ब्रॉडबैंड युग के तैयारी रखने के लिए पर्याप्त स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराना।
  • भारत में उपग्रह संचार प्रौद्योगिकियों को सुदृढ़ बनाना।
  • सार्वभौमिक सेवा दायित्व निधि (यूएसओएफ) के माध्यम से कवर न किए गए क्षेत्रों तथा डिजिटल दृष्टि से समाज के पिछड़े वर्ग के समावेश को सुनिश्चित करना।
  • ग्राहक संतुष्टि, सेवा की गुणवत्ता ओर प्रभावी शिकायत निवारण सुनिश्चित करना।
  • डिजिटल संचार क्षेत्र के निवेश उत्प्रेरित करना।
  • 5जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, क्लाउड कंप्यूटिंग तथा एम2एम जैसी संचार क्षेत्र की उभरती प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने के लिए व्यापक तथा सुसंगत दृष्टिकोण सुनिश्चित करना।
  • स्वदेशी आवश्यकताओं के अनुसार देश में डिजिटल उत्पादों तथा सेवाओं को चिह्नित करने विशिष्ट रूप से निर्माण और विकास के लिए ‘सी-डॉट’ को प्रमुख दूरसंचार अनुसंधान और विकास केंद्र के रूप में पुनर्गठित करना।
  • स्टार्ट-अप और एसएमई को बढ़ावा देना।
  • डिजिटल संचार क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के माध्यम से मानव संसाधन पूंजी का निर्माण करना।
  • सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को तकनीकी विशेषज्ञता और ज्ञान प्रबंधन के निर्माण पर बल देना।
  • वर्ष 2020 तक उद्योग 4.0 (चतुर्थ पीढ़ी) को गति प्रदान करना।
  • डिजिटल संचार की संप्रभुता, बचाव और सुरक्षा सुनिश्चित करना (सुरक्षित डाटा संरक्षण प्रणाली)।
  • उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व 1999, 2004 और 2012 में दूरसंचार नीति बनाई गई थी।

 लेखक-सुधांशु पाण्डेय