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राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक, 2017

May 14th, 2018
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 28 मार्च, 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा ‘राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) विधेयक, 2017’ में संशोधन को मंजूरी प्रदान की गई।
  • 29 दिसंबर, 2017 को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने लोक सभा में उक्त विधेयक पेश किया था।
  • 4 जनवरी, 2018 को यह विधेयक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण पर स्थायी समिति को सौंप दिया गया था जिसके अध्यक्ष प्रो. राम गोपाल यादव थे।
  • समिति ने अपनी रिपोर्ट 20 मार्च, 2018 को प्रस्तुत की।
  • उद्देश्य
  • राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक, 2017 का उद्देश्य एक ऐसी चिकित्सा शिक्षा प्रणाली उपलब्ध कराना है, जो-
  • पर्याप्त एवं गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा पेशेवरों की उपलब्धता सुनिश्चित करती हो,
  • चिकित्सा पेशेवरों को अपने कार्यों में नवीनतम चिकित्सा अनुसंधान को स्वीकार करने और अनुसंधान में योगदान देने के लिए प्रोत्साहन देती हो,
  • जिसका उद्देश्य चिकित्सा संस्थानों का आवधिक मूल्यांकन हो एवं भारत के लिए चिकित्सा रजिस्टर के रख-रखाव की सुविधा प्रदान करती हो और चिकित्सा सेवाओं के सभी पहलुओं में उच्च नैतिक मानकों को लागू करे।
  • बदलती आवश्यकताओं को स्वीकार करने में लोचशील हो और जिसमें एक प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र हो, आदि
  • महत्वपूर्ण तथ्य
  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक, 2017 में निम्नलिखित संशोधनों को स्वीकृति दी है।
  • अंतिम एमबीबीएस (MBBS) परीक्षा एक आम (Common) परीक्षा के रूप में पूरे देश में आयोजित की जाएगी।
  • यह परीक्षा एक ‘निर्गम परीक्षा’ (Exit Test) के रूप में आयोजित होगी और इसका नाम ‘राष्ट्रीय निर्गम परीक्षा’ (Next : National Exit Test) होगा।
  • आयुष चिकित्सकों को आधुनिक चिकित्सा व्यवसाय अपनाने के लिए आवश्यक ‘ब्रिज कोर्स’ (Bridge Course) के प्रावधान को समाप्त कर दिया गया है।
  • निजी चिकित्सा संस्थानों और मानद (Deemed) विश्वविद्यालयों की 50  प्रतिशत सीटों के लिए शुल्क नियमन किया गया है।
  • राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग में राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों की संख्या 3 से बढ़ाकर 6 कर दी गई है।
  • आयोग में 21 डॉक्टरों समेत 25 सदस्य होंगे।
  • मेडिकल कॉलेजों द्वारा नियमों का पालन नहीं करने पर आर्थिक दंड के प्रावधान के स्थान पर विभिन्न दंड विकल्पों का प्रावधान किया गया है।
  • अयोग्य चिकित्सकों या नीम-हकीमों (Quacks) के लिए कठोर दंड का प्रावधान किया गया है।
  • अनधिकृत चिकित्सा सेवा प्रदान करने पर एक वर्ष के कारावास और 5 लाख तक के अर्थदंड का प्रावधान किया गया है।

लेखक-नीरज ओझा

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