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राज्य ऊर्जा दक्षता सूचकांक, 2018

State Energy Efficiency Index, 2018
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 1 अगस्त, 2018 को ‘राज्य ऊर्जा दक्षता तैयारी सूचकांक’ (SEEPI) का पहला संस्करण संयुक्त रूप से ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) एवं ऊर्जा दक्ष अर्थव्यवस्था हेतु गठबंधन (AEEE) द्वारा जारी किया गया।
  • यह राष्ट्रव्यापी सूचकांक, ऊर्जा दक्षता ब्यूरो एवं नीति आयोग के संयुक्त प्रयास का परिणाम है।
  • उद्देश्य
  • यह सूचकांक देश के सभी राज्यों में ऊर्जा उत्सर्जन के प्रबंधन में होने वाली प्रगति को ट्रैक करने, राज्यों के बीच प्रतिस्पर्द्धा को प्रोत्साहित करने एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन में सहायता प्रदान करेगा।
  • राज्य ऊर्जा दक्षता तैयारी सूचकांक द्वारा राज्यों में राष्ट्रीय ऊर्जा दक्षता पहलों को लागू करने में मदद मिलेगी एवं राज्यों के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा, ऊर्जा पहुंच एवं जलवायु परिवर्तन जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक होगा।
  • सूचकांक का महत्व
  • यह सूचकांक भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि अमेरिका तथा चीन के बाद भारत ग्रीन हाउस गैसों का सबसे बड़ उत्सर्जक देश है तथा जलवायु परिवर्तन का सामना करने के लिए सबसे कमजोर देशों में से एक है।
  • ऊर्जा दक्षता ब्यूरो
  • भारत सरकार ने ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के उपबंधों के अंतर्गत 1 मार्च, 2002 को ऊर्जा दक्षता ब्यूरो की स्थापना की।
  • ऊर्जा दक्षता ब्यूरो का मिशन, ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के समग्र ढांचे के अंदर स्व-विनियम और बाजार सिद्धांतों पर महत्व देते हुए ऐसी नीतियों का विकास करने में सहायता प्रदान करना है, जिनका प्रमुख उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था में ऊर्जा की तीव्रता कम करना है।
  • प्रमुख बिंदु
  • सूचकांक में राज्यों को पांच क्षेत्रकों यथा- बिल्डिंग, इंडस्ट्री, नगर निगम, परिवहन, कृषि व डिस्कॉम में 63 संकेतकों पर मापा गया है।
  • सूचकांक में राज्यों को उनके प्रदर्शन के आधार पर चार श्रेणियों में बांटा गया है : अग्रगामी (फ्रंट रनर), लब्धकर्ता (एचीवर), प्रतिस्पर्धी (कंटेंडर) व आकांक्षी (ऐस्पिरैंट)।
  • 60 से अधिक स्कोर वाले राज्यों को फ्रंट रनर श्रेणी में रखा गया है। इस श्रेणी में आंध्र प्रदेश, केरल, पंजाब, राजस्थान एवं महाराष्ट्र हैं।
  • ध्यातव्य है कि उत्तर प्रदेश कंटेंडर की श्रेणी में तथा बिहार ऐस्पिरैंट की श्रेणी में है।

लेखक-राजन शुक्ला