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रहन-सहन सूचकांक कार्यक्रम

  • शुभारंभ
  • 19 जनवरी, 2018 को केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री द्वारा ‘रहन-सहन सूचकांक कार्यक्रम’ (Liveability Index Programme) के शुभारंभ की घोषणा की। यह कार्यक्रम 116 शहरों में क्रियान्वित किया जाना है, जिनमें स्मार्ट सिटी, राजधानियां तथा 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहर शामिल हैं।
  • उद्देश्य
  • इसका उद्देश्य इन शहरों की मौजूदा स्थिति का आकलन करते हुए वहां के निवासियों के जीवन स्तर को बेहतर करने हेतु मार्ग प्रशस्त करना है। इसके माध्यम से भारतीय शहरों को और अधिक रहन-सहन योग्य बनाने में मदद मिलेगी।
  • शहरों हेतु रहन-सहन मानक
  • आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने भारतीय शहरों की दृष्टि से प्रासंगिक माने जाने वाले ‘रहन-सहन मानकों’ का एक समूह विकसित किया है, जो जून, 2017 में शुरू किए गए थे, ताकि रहन-सहन सूचकांक तैयार किया जा सके और शहरों की रेटिंग की जा सके। 15 अलग-अलग श्रेणियों में विभिन्न पहलुओं को आच्छादित (Cover) करने वाले 79 संकेतक (57 कोर संकेतक और 22 सहायक संकतेक) हैं। इनमें प्रशासन, स्वास्थ्य और शिक्षा, सुरक्षा, पहचान और संस्कृति, अर्थव्यवस्था, प्रदूषण, मिश्रित भूमि उपयोग और सुसंहिति (Mixed Land use Compactness), खुला स्थान, शहरी गतिशीलता और विभिन्न मूल शहरी सेवाओं और व्यापक विकास के 4 महत्वपूर्ण स्तंभों नामतः संस्थागत, सामाजिक, आर्थिक और शारीरिक में योगदान शामिल हैं। चारों स्तंभों को आवंटित भारांक इस प्रकार हैं- संस्थागत (25% भारांक), सामाजिक (25% भारांक), आर्थिक (5% भारांक) तथा शारीरिक (45% भारांक)।
  • अन्य महत्वपूर्ण बिंदु
  • आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय विश्व बैंक द्वारा पोषित सीबीयूडी कार्यक्रम के तहत एक अंतरराष्ट्रीय बोली प्रक्रिया के माध्यम से इन 116 शहरों में इस सूचकांक के मूल्यांकन के लिए मैसर्स एथेना इन्फोनॉमिक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और इकोनॉमिस्ट ग्रुप लिमिटेड के साथ सह-व्यवस्था में मैसर्स आईपीएसओएस रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड का चयन किया है।
  • यह कार्य जून, 2018 तक पूर्ण होने की उम्मीद है।

लेखक-काली शंकर तिवारी