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मीटू आंदोलन

Me to movement
    • चर्चा में क्यों?
    • विश्व भर की महिलाओं द्वारा अपने साथ की गई यौन हिंसा (Sexual Violence) के विरुद्ध आवाज उठाने के कारण, यह आंदोलन इन दिनों बहुत चर्चा में है।
    • आंदोलन का उद्देश्य
    • इस आंदोलन का उद्देश्य यौन हिंसा का शिकार कमजोर पीड़ित वर्ग की अगुवाई में एक ऐसे समुदाय का निर्माण करना है, जो यौन हिंसा को रोकने के साथ ही उसके विरुद्ध खुलकर आवाज उठाए।
    • आंदोलन की पृष्ठभूमि
    • ‘मीटू आंदोलन’ का प्रारंभ संयुक्त राज्य अमेरिका के न्यूयॉर्क निवासी 45 वर्षीय नागरिक अधिकार कार्यकर्ता तराना बर्के (Tarana Burke) ने वर्ष 2006 में किया था।





    • प्रारंभ में इस आंदोलन का उद्देश्य यौन हिंसा का शिकार विशेषकर काले वर्ण वाली लड़कियां और महिलाओं के साथ ही गरीब समुदाय की महिलाओं को इस सदमें से उबरने में मदद करना था।
    • आंदोलन अपने प्रारंभ के 6 महीनों के भीतर ही वायरल #Metoo Hashtag के कारण यौन हिंसा के विरुद्ध बातचीत का राष्ट्रीय विषय बन गया।
    • वर्ष 2017 में इस आंदोलन को लोकप्रिय बनाने का श्रेय अमेरिकी अभिनेत्री एलिसा मिलानो को जाता है, जिन्होंने माइकल बेकर के साथ मिलकर यौन उत्पीड़न के पीड़ितों को इसके बारे में ट्वीट (Tweet) करने के लिए प्रोत्साहित किया।
    • यह आंदोलन सामान्य वर्ग के साथ ही उच्च वर्ग के सामने आने से और मजबूत हुआ। अमेरिका की विख्यात (Celebrities) फिल्म अभिनेत्रियों जैसे ग्वेनीथ पाल्ट्रो, एश्ले जूड, जेनिफर लॉरेंस और उमा थर्मन ने अपने साथ हुए यौन दुर्व्यवहार पर खुलकर बात की।
    • अमेरिका के बाद यह आंदोलन ब्रिटेन, भारत और पाकिस्तान सहित विश्व के 85 देशों तक फैल गया। यूरोपीय संसद ने तो ‘मीटू अभियान’ के समर्थन में एक विशेष सत्र का आयोजन भी किया।
    • भारत मेंमीटू आंदोलनका प्रभाव




    • 27 सितंबर, 2018 को पूर्व अभिनेत्री तनुश्री दत्ता ने दिग्गज फिल्म अभिनेता नाना पाटेकर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया, जो भारत में ‘मीटू आंदोलन’ का उत्प्रेरक बना।
    • दत्ता के आरोपों से प्रेरित होकर फिल्म, मीडिया और राजनीति जगत की कई महिलाओं ने अपने साथ हुई यौन हिंसा पर सार्वजनिक रूप से बयान दिए।
    • 21 अक्टूबर, 2018 को संगीतकार अनु मलिक को यौन उत्पीड़न के कई आरोपों के कारण ‘इंडियन आइडल, 2018’ के ज्यूरी पैनल से हटा दिया गया।
    • अक्टूबर, 2018 में भारतीय विदेश राज्य मंत्री एम.जे. अकबर को यौन उत्पीड़न को आरोपों के चलते अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा।
    • एक सर्वेक्षण के अनुसार, कम-से-कम 50 प्रतिशत महिलाएं कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न का सामना करती हैं।
    • गौरतलब है कि भारत में यह आंदोलन ‘हैशटैग मी टू इंडिया’ (# MeToo India) नाम से चर्चित है।
    • भारत सरकार की प्रतिक्रिया
    • कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न के मामलों को देखने के लिए भारत सरकार द्वारा 25 अक्टूबर, 2018 को एक समिति का गठन किया गया है।
    • इस समिति की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह कर रहे हैं। समिति के अन्य सदस्य केंद्रीय सड़क यातायात मंत्री नितिन गडकरी, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और वंफ्रेद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी हैं।
    • समिति को यौन उत्पीड़न के मुद्दों और आरोपों की समीक्षा करने के लिए तीन महीने की समय-सीमा दी गई है। कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु व्यापक उपायों की कार्ययोजना को भी इस समिति द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा।
    • गौरतलब है कि केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के विरुद्ध अपनी आवाज उठाने के लिए एक इलेक्ट्रॉनिक शिकायत बॉक्स – शी बॉक्स (She-Box) का शुभारंभ किया है।




  • उल्लेखनीय है महिलाओं के खिलाफ होने वाले घरेलू या अन्य किसी भी प्रकार की हिंसा के विरुद्ध घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 का निर्माण किया गया है। यह अधिनियम 26 अक्टूबर, 2006 को लागू हुआ।
  • इसके अतिरिक्त बच्चों के विरुद्ध यौन अपराधों को रोकने के लिए पॉक्सो एक्ट, 2012 अधिनियमित किया गया है।
  • उल्लेखनीय है कि कार्यस्थल पर महिलाओं के विरुद्ध यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए कार्यस्थल पर महिलाओं की यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 का निर्माण किया गया है।

लेखक-धीरेन्द्र त्रिपाठी