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मासिक पत्रिका जून,2018 पी.डी.एफ. डाउनलोड

राष्ट्रमंडल जैसे संगठन अपनी जनसांख्यिक शक्ति के बावजूद गत दशक में उपेक्षित ही रहे हैं। इस संगठन के सम्मेलन में 55 प्रतिशत जनसंख्या की भागीदारी रखने वाले भारत के किसी प्रधानमंत्री ने वर्ष 2010 के बाद पहली बार वर्ष 2018 में प्रतिभाग किया है। भारतीय प्रधानमंत्री ने इस सम्मेलन में न केवल सहभागिता की बल्कि संगठन के कोष में भारत के तकनीकी सहयोग को दोगुना करने की घोषणा करते हुए इसे 20 लाख पौंड कर दिया है। ब्रिटेन भी अब इस संगठन को अपने ऐतिहासिक गौरव से अधिक अन्य देशों के साथ समन्वय के मंच के रूप में देखता है। भारत के लिए भी यह ठीक है कि, ब्रिटेन से गुलामी के दौरान की कटुता को भुलाकर न केवल ब्रिटेन बल्कि संगठन के सभी 53 देशों के साथ सहयोग के मार्ग पर अग्रसर हो। इस विचार के मद्देनजर सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री की सहभागिता एक दूरदर्शी कदम है। निश्चित रूप से भविष्य में इसके अनेक सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे, इस अंक का आवरण आलेख ‘‘चोगम 2018 : भारत के लिए नए अवसर’’ को बनाया गया है।
12 मार्च, 2018 को राष्ट्रमंडल दिवस मनाया गया था। 4-15 अप्रैल के मध्य ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड-कोस्ट में वर्ष 2018 के 21वें राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन हुआ। इस प्रतियोगिता में भारत पदक तालिका में स्वर्ण पदकों की दृष्टि से तृतीय स्थान पर तथा कुल पदकों की दृष्टि से चौथे स्थान पर रहा। इस अंक में ‘राष्ट्रमंडल खेल, 2018’ पर सामयिक आलेख प्रस्तुत किया गया है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने ध्रुवीय उपग्रह प्रमोचन यान पीएसएलवी-सी41 के माध्यम से 12 अप्रैल, 2018 को नौवहन उपग्रह आईआरएनएसएस-1आई का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। नौवहन उपग्रह आईआरएनएसएस-1आई भारत की स्वदेशी नौवहन प्रणाली ‘नाविक’ (NAVIC : Navigation with Indian Constellation) में शामिल होने वाला 8वां उपग्रह है। इस विषय पर केंद्रित सामयिक आलेख इस अंक में प्रस्तुत है।




राष्ट्रमंडल जैसे संगठन अपनी जनसांख्यिक शक्ति के बावजूद गत दशक में उपेक्षित ही रहे हैं। इस संगठन के सम्मेलन में 55 प्रतिशत जनसंख्या की भागीदारी रखने वाले भारत के किसी प्रधानमंत्री ने वर्ष 2010 के बाद पहली बार वर्ष 2018 में प्रतिभाग किया है। भारतीय प्रधानमंत्री ने इस सम्मेलन में न केवल सहभागिता की बल्कि संगठन के कोष में भारत के तकनीकी सहयोग को दोगुना करने की घोषणा करते हुए इसे 20 लाख पौंड कर दिया है। ब्रिटेन भी अब इस संगठन को अपने ऐतिहासिक गौरव से अधिक अन्य देशों के साथ समन्वय के मंच के रूप में देखता है। भारत के लिए भी यह ठीक है कि, ब्रिटेन से गुलामी के दौरान की कटुता को भुलाकर न केवल ब्रिटेन बल्कि संगठन के सभी 53 देशों के साथ सहयोग के मार्ग पर अग्रसर हो। इस विचार के मद्देनजर सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री की सहभागिता एक दूरदर्शी कदम है। निश्चित रूप से भविष्य में इसके अनेक सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे, इस अंक का आवरण आलेख ‘‘चोगम 2018 : भारत के लिए नए अवसर’’ को बनाया गया है।
12 मार्च, 2018 को राष्ट्रमंडल दिवस मनाया गया था। 4-15 अप्रैल के मध्य ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड-कोस्ट में वर्ष 2018 के 21वें राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन हुआ। इस प्रतियोगिता में भारत पदक तालिका में स्वर्ण पदकों की दृष्टि से तृतीय स्थान पर तथा कुल पदकों की दृष्टि से चौथे स्थान पर रहा। इस अंक में ‘राष्ट्रमंडल खेल, 2018’ पर सामयिक आलेख प्रस्तुत किया गया है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने ध्रुवीय उपग्रह प्रमोचन यान पीएसएलवी-सी41 के माध्यम से 12 अप्रैल, 2018 को नौवहन उपग्रह आईआरएनएसएस-1आई का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। नौवहन उपग्रह आईआरएनएसएस-1आई भारत की स्वदेशी नौवहन प्रणाली ‘नाविक’ (NAVIC : Navigation with Indian Constellation) में शामिल होने वाला 8वां उपग्रह है। इस विषय पर केंद्रित सामयिक आलेख इस अंक में प्रस्तुत है।

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मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने कॉमन कॉज की याचिका पर विचार करने के उपरांत दयामृत्यु जैसे गंभीर मुद्दे पर 9 मार्च, 2018 को अपना ऐतिहासिक निर्णय सुनाया। न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय के अनुसार, भारत में निष्क्रिय यूथेनेसिया न्यायोचित तथा कानूनी रूप से मान्य है, जबकि सक्रिय यूथेनेसिया की अनुमति नहीं है। इसी के साथ यूथेनेसिया यानी दयामृत्यु पर बहस एक बार फिर शुरू हुई है। इस अंक में विश्लेषणात्मक सामयिक आलेख इस विषय पर भी दिया गया है।
हालिया वैश्विक तनावों को देखते हुए एक बार फिर शीत युद्ध की आशंका व्यक्त की जा रही है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति के विश्लेषकों के अनुसार, यह शीत युद्ध द्विध्रुवीय के बजाय बहुध्रुवीय हो सकता है, जो अधिक चिंतनीय है। इस अंक में इसी आशंका पर विमर्श सामयिक आलेख के अंतर्गत प्रस्तुत किया गया है।




न्यायपालिका की साख पर उपजे नवीन संकट पर भी आलेख इस अंक में प्रस्तुत है। इस अंक के साथ अतिरिक्तांक के रूप में सामान्य विज्ञान (भाग-2) विषय पर सामग्री निःशुल्क प्रदान की गई है। उम्मीद है, यह अंक पाठकों को पसंद आएगा। पाठकों से अनुरोध है कि इस अंक पर अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दें।

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