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मासिक पत्रिका जुलाई-अगस्त,2018 पी.डी.एफ. डाउनलोड

विश्व कप फुटबॉल में केवल फुटबॉल हो प्रायः ऐसा नहीं होता है। इस बार की स्पर्धा में भी बहुत-सी फुटबॉल इतर बातें हुईं। फाइनल स्पर्धा में फ्रांस के जीतने के बाद अफ्रीकी हास्य अभिनेता ‘ट्रेवर नोह’ (Trevor Noah) ने फ्रांस को जीत की बधाई देते हुए कहा कि ‘‘अफ्रीका ने विश्व कप जीत लिया’’ फ्रांस की टीम में अधिकांश खिलाड़ियों के अफ्रीकी मूल का होने के कारण की गई इस टिप्पणी की खासी आलोचना हुई। अमेरिका में फ्रांस के राजदूत ने श्री नोह को पत्र लिखा कि उनके कमेंट ने फ्रांस की एकता को संकट में डाला है। जवाब में ‘नोह’ ने कहा कि फ्रांस को अपनी बहु-पहचान को समाविष्ट करना सीखना चाहिए और अपनी औपनिवेशिक विरासत को मान्यता प्रदान करना चाहिए। बहरहाल, विश्व कप में फ्रांस की जीत के बाद शरणार्थियों और अन्य विदेशी मूल के लोगों का देश के प्रति लगाव, निष्ठा और उनके हकों का मुद्दा विमर्श के केंद्र में आया। जहां तक फ्रांस का सवाल है, वह अपने देश में ‘रंग-अंध गणराज्य दर्शन’ (Colour-blind republic philosophy) को मान्यता प्रदान करता है। रंग एवं जाति के आधार पर पहचान फ्रांस में केवल निजी दायरे तक सीमित है। इसी दर्शन के आधार पर फ्रांस ने वर्ष 2003 में स्कूलों में बुर्का एवं अन्य धार्मिक प्रतीकों को धारण करने पर प्रतिबंध लगा दिया था। रंग-जाति के आधार पर जनगणना फ्रांस में अवैध है। इन सब बातों से इतर फ्रांस फुटबॉल टीम के स्टार खिलाड़ी पॉल पोग्बा, एनगोलो कांटे, किलियन म्बापे एवं अन्य शुद्ध रूप से समकालीन फ्रांस के उत्पाद हैं, जिनका एक मात्र सपना वर्ष 1998 की महान फ्रांस टीम का अनुकरण कर जीत हासिल करना था, जिसे उन्होंने कर दिखाया। फ्रांस की जीत ने दिखाया कि ‘देश’ सभी रंग-जाति के लोगों का गुलदस्ता है और सभी के समावेशी योगदान से ही राष्ट्र उन्नति के शिखर पर पहुंचता है। इस अंक के आवरण आलेख में ‘फीफा विश्व कप, 2018’ का संपूर्ण कवरेज उपलब्ध कराया गया है, जो परीक्षार्थियों के लिए अनेक वर्षों तक प्रासंगिक रहने वाला है।

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मानव स्वास्थ्य विज्ञान कितना भी समुन्नत क्यों न हो गया हो, नित नई उदजनित व्याधियां उसे चुनौतियां देती रहती हैं। एड्स, इबोला, बर्ड फ्लू आदि के बाद इसमें एक नया नाम ‘निपाह’ का भी जुड़ गया है। प्रायः व्याधियां पशुओं से मनुष्यों में संक्रमित हुई हैं। अतः पशु चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में भी अधिक अनुसंधान की जरूरत है, जिससे बीमारियों के मनुष्यों तक पहुंचने से पूर्व ही उनसे निपटने या रोकथाम के उपाय शुरू किए जा सकें। इस अंक में निपाह वायरस के कौन, क्या, कहां से पाठकों को अवगत कराया गया है।




विश्व मानचित्र पर उत्तर कोरिया भले ही एक छोटा-सा देश हो, किंतु वह कई मायनों में अपनी हैसियत से बहुत अधिक बड़ा दिखाई पड़ता है। वह परमाणु संपन्न राष्ट्र है, चीन, अमेरिका एवं रूस जैसी महाशक्तियां उसमें रुचि रखती हैं। दक्षिण कोरिया के साथ उसके संबंध भू-स्त्रातजिक दशाओं में तूफान ला देने की क्षमता रखते हैं। ऐसे उत्तर कोरिया के साथ जब अमेरिका की वार्ता प्रस्तावित हुई, तो दुनिया ने राहत की सांस ली। सिंगापुर में प्रस्तावित यह वार्ता दो ध्रुवों का अप्रत्याशित मिलन था, जिसके नतीजे ठीक-ठाक ही रहे। इस घटनाक्रम पर आलेख इस अंक में प्रस्तुत किया गया है।




15 जून को अमेरिका द्वारा लगाए गए एवं 6 जुलाई, 2018 से प्रभावी आयात शुल्क पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा था, ‘‘यह पश्चिमी धारणा है कि यदि एक गाल पर कोई तमाचा मारे तो दूसरा गाल उसके आगे कर दो, हमारी संस्कृति में हम वापस प्रहार करते हैं।’’ अपनी संस्कृति के अनुरूप ही चीन ने भी स्पोर्ट्स प्रयोग के वाहन, पोर्क एवं सोयाबीन सहित अनेक अमेरिका से आयातित वस्तुओं पर आयात शुल्क लगा दिया। यह व्यापार युद्ध बढ़ता ही जा रहा है। देखना यह है कि यह किस अंजाम पर पहुंचता है। इस अंक में चीन-अमेरिका व्यापार-युद्ध पर आलेख ‘‘वैश्वीकरण की धुन पर संरक्षणवादी तराना’’ प्रस्तुत किया गया है।

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5 thoughts on “मासिक पत्रिका जुलाई-अगस्त,2018 पी.डी.एफ. डाउनलोड”

  1. शुभ संध्या सर
    मैं घटना चक्र मासिक पत्रिका का एक नियमित पाठक हूं और आपसे आग्रह करना चाहता हूं कि अगर संभव हो तो झारखण्ड मुख्य परीक्षा हेतु समसामयिक और अन्य किताबों को प्रकाशित करें ।
    धन्यवाद ।

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