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मानवाधिकार संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2018

May 15th, 2018
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 4 अप्रैल, 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में वंफ्रेद्रीय मंत्रिमंडल ने मानवाधिकारों के बेहतर संरक्षण और संवर्धन के लिए ‘मानवाधिकार संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2018’ को स्वीकृति प्रदान की।
  • महत्वपूर्ण तथ्य
  • विधेयक में मानवाधिकार आयोग के मानित सदस्य (Deemed Member) के रूप में ‘राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग’ (NCPCR) को शामिल करने का प्रस्ताव है।
  • मानवाधिकार आयोग के गठन में एक महिला सदस्य को शामिल करने का प्रस्ताव किया गया है।
  • विधेयक में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद के लिए पात्रता एवं चयन के दायरे को बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है।
  • केंद्रशासित प्रदेशों में मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामलों को देखने के लिए एक व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव है।
  • विधेयक में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों के कार्यकाल में संशोधन का प्रस्ताव है ताकि इन्हें अन्य आयोगों के अध्यक्ष तथा सदस्यों के कार्यकाल के अनुरूप बनाया जा सके।
  • लाभ
  • उपर्युक्त संशोधन से भारत में मानवाधिकार संस्थानों का सशक्तीकरण होगा जिससे ये संस्थान अपने आदेश, भूमिकाओं और उत्तरदायित्यों का प्रभावी निर्वहन कर सकेंगे।
  • इसके अतिरिक्त, संशोधित अधिनियम देश में व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता, समानता और गरिमा से संबंधित अधिकार सुनिश्चित करने के लिए सम्मत (Agreed) वैश्विक मानकों एवं बेंचमार्क के साथ पूर्णतया समन्वित होगा।
  • मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 में संशोधन से राष्ट्रीय मानवाधिकार संरक्षण आयोग और राज्य मानवाधिकार संरक्षण आयोग प्रभावी तरीके से मानवाधिकारों का संरक्षण एवं संवर्धन करने के लिए अपनी स्वायत्तता, स्वतंत्रता, बहुलवाद तथा व्यापक कार्यों के संबंध में पेरिस सिद्धांत (Peris Principale) का कारगर परिपालन कर सकेंगे।

लेखक-नीरज ओझा

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