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भारत स्मार्ट शहर अध्येतावृत्ति और प्रशिक्षुता कार्यक्रम

August 7th, 2018
AMRUT : Atal Mission for Rejuvenation and Urban Transformation
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 9 जुलाई, 2018 को आवास एवं शहरी मामलों के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हरदीप सिंह पुरी ने ‘अम्रुत’ (AMRUT : Atal Mission for Rejuvenation and Urban Transformation) और स्मार्ट सिटीज मिशन (Smart Cities Mission) के तहत कुछ नई पहलों का शुभारंभ किया।
  • युवाओं को शहरी नियोजन एवं शासन के क्षेत्र में कार्य करने का अवसर प्रदान करने हेतु ‘भारत स्मार्ट शहर अध्येतावृत्ति कार्यक्रम’ (ISCF : India Smart Cities Fellowship) और ‘भारत स्मार्ट शहर प्रशिक्षुता (ISCI : India Smart Cities Internship) कार्यक्रम, डिजिटल भुगतान में अग्रणी शहरों को पुरस्कृत करने के लिए ‘स्मार्ट शहर डिजिटल भुगतान पुरस्कार, 2018’ (Smart Cities Digital Payments Awards, 2018),
  • वित्तीय समर्थन और विदेशी तकनीकी सहायता हेतु अभिनव स्मार्ट शहर परियोजनाओं के लिए ‘नवप्रवर्तन, एकीकृत और स्थिर करने हेतु शहरों में निवेश (CITIIS : Cities Investment to Innovate, Integrate and Sustain) चैलेंज और
  • क्षेत्र आधारित अवसंरचना मामलों के शीघ्र समाधान हेतु प्रायोगिक आधार पर 25 शहरों में स्थानीय क्षेत्र योजना (LAP) शहरी नियोजन योजना (TPS)।
  • भारत स्मार्ट शहर अध्येतावृत्ति (ISCF) कार्यक्रम
  • भारत स्मार्ट शहर अध्येतावृत्ति कार्यक्रम का निर्माण विशेष रूप से स्मार्ट शहर और सामान्य रूप से शहरी नवीकरण क्षेत्र में इच्छुक युवाओं को मूल्यवान अनुभव प्रदान करने के लिए किया गया है।
  • इस कार्यक्रम से महत्वपूर्ण शहरी समस्याओं के आधुनिक एवं व्यापक प्रभाव वाले समाधानों को कार्यान्वित करने के चुनौतीपूर्ण किंतु रोमांचक कार्य में नए विचार, जुनून एवं ऊर्जा का उपयोग सुनिश्चित होगा।
  • कार्यक्रम के माध्यम से युवा मार्गदर्शकों को तैयार किया जाएगा, भारतीय शहरी क्षेत्र के विषय में उनकी समझ को मजबूत किया जाएगा और भविष्य में उन्हें ज्यादा बड़ी भूमिका के लिए तैयार किया जाएगा।
  • आवास एवं शहरी मामले मंत्रालय द्वारा शहरी नियोजन, शहरी डिजाइन, इंजीनियरिंग, सूचना तथा प्रौद्योगिकी, शहरी गतिशीलता, वित्त, सामाजिक क्षेत्र और पर्यावरणीय मुद्दों के क्षेत्र में ‘स्मार्ट शहर अध्येता’ के रूप में 30 युवा स्नातकों/अधिस्नातकों (Post Graduates) तथा पीएचडी उपाधिधारकों (PhDs) को नियुक्त किया जाएगा।
  • नियुक्ति की अवधि एक वर्ष होगी जिसे बढ़ाकर तीन वर्ष किया जा सकेगा।
  • चयनित स्मार्ट शहर अध्येताओं को 60000 रुपये की समेकित राशि प्रतिमाह प्रति अध्येता प्रदान की जाएगी।
  • ये अध्येता आवास एवं शहरी मामले मंत्रालय में स्मार्ट शहर, मिशन निदेशक कार्यालय और/अथवा चयनित स्मार्ट शहरों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEOs) को विश्लेषण, अनुसंधान, प्रलेखन, स्वतंत्र आकलन आदि के क्षेत्र में आवश्यक समर्थन प्रदान करेंगे।
  • इच्छुक आवेदक स्मार्ट नेट (https://smartnet.niua.org) के माध्यम से 31 अगस्त, 2018 तक आवेदन कर सकते हैं।
  • भारत स्मार्ट शहर प्रशिक्षुता (ISCI) कार्यक्रम
  • आवास एवं शहरी मामले मंत्रालय द्वारा विभिन्न राज्यों/शहरों में स्मार्ट शहर परियोजनाओं के कार्यान्वयन में सहायता के लिए पूर्व स्नातक/स्नातक/स्नातकोत्तर उपाधि की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों की सेवाएं ‘प्रशिक्षु’ (Intern) के रूप में ली जाएगी।
  • प्रशिक्षुता 6 से 12 सप्ताह की अवधि के लिए अवैतनिक आधार पर होगी।
  • कार्यक्रम के सफल समापन पर प्रशिक्षुओं को अनुभव प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा।
  • प्रशिक्षुओं को स्मार्ट सिटी मिशन के तहत विकास के अनेक क्षेत्रों में आवश्यक जानकारियां प्रदान की जाएंगी जिनमें शहरी नियोजन; शहरी डिजाइन, इंजीनियरिंग, सूचना एवं प्रौद्योगिकी, शहरी गतिशीलता, वित्त, सामाजिक क्षेत्र और पर्यावरणीय मुद्दे शामिल हैं।
  • ये प्रशिक्षु स्मार्ट सिटी मिशन के भाग होंगे और उनकी मुख्य भूमिका कार्यान्वयन/रिपोर्टिंग/आकलन एवं निगरानी/ज्ञान प्रबंधन/हितधारक सहभागिता/मीडिया तक पहुंच आदि में होगी।
  • इच्छुक आवेदक स्मार्ट नेट के माध्यम से वर्ष में कभी भी ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
  • प्रशिक्षुओं का चयन मिशन निदेशक (स्मार्ट सिटी मिशन) द्वारा गठित समिति द्वारा किया जाएगा।
  • स्मार्ट शहर डिजिटल भुगतान पुरस्कार (SCDPA), 2018
  • स्मार्ट शहर डिजिटल भुगतान पुरस्कार, 2018 ‘100 स्मार्ट शहरों में 100 दिनों की चुनौती’ (100 Days Challenge in 100 Smart Cities) आवास एवं शहरी मामले मंत्रालय की भारत के शहरी निवासियों के जीवन को आसान बनाने की पहलों का भाग है।
  •  इन पुरस्कारों का उद्देश्य डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और अपने-अपने शहरों में अभिनव डिजिटल भुगतान सुनिश्चित करने के लिए स्मार्ट शहरों को प्रेरित और पुरस्कृत करना है।
  • यह कार्यक्रम न केवल डिजिटल भुगतान में अग्रणी शहरों को पुरस्कृत करेगा, बल्कि अन्य शहरों को भी अपने यहां डिजिटल भुगतान ढांचे को अपनाने, डिजिटल भुगतान प्रोत्साहन के माध्यम से जागरूकता बढ़ाने और डिजिटल लेन-देन के लिए नागरिकों को अनेक विकल्प देने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
  • चैलेंज की अवधि पुरस्कारों के शुभारंभ से लेकर अगले 100 दिनों तक होगी।
  • आकलन के उद्देश्य से स्मार्ट शहरों को उनकी जनसंख्या के आधार पर चार विभिन्न श्रेणियों में विभाजित किया जाएगा।
  • ये श्रेणियां है- प्रथम श्रेणी- 5 लाख से कम जनसंख्या, द्वितीय श्रेणी 5-10 लाख जनसंख्या, तृतीय श्रेणी-1-4 मिलियन जनसंख्या और चतुर्थ श्रेणी-4 मिलियन से अधिक जनसंख्या।
  • प्रत्येक श्रेणी में तीन पुरस्कार दिए जाएंगे। इस प्रकार इस कार्यक्रम के तहत कुल 12 पुरस्कार दिए जाएंगे।
  • ये पुरस्कार हैं- सर्वोत्तम डिजिटल भुगतान अनुकूलक, सर्वोत्तम डिजिटल भुगतान अन्वेषक और डिजिटल भुगतान पर केंद्रित सर्वाधिक प्रगतिशील स्मार्ट शहर।
  • नवप्रवर्तन, एकीकृत और स्थिर करने हेतु शहरों में निवेश (CITIIS) चैलेंज
  • 25 जून, 2015 को जब स्मार्ट सिटी मिशन का शुभारंभ हुआ था, तब 100 स्मार्ट शहरों के चयन के लिए एक प्रतिस्पर्धी चैलेंज प्रक्रिया का उपयोग किया गया था।
  • अब चैलेंज प्रक्रिया को नीति आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप परियोजना के कार्यान्वयन के लिए प्रयुक्त किया जा रहा है।
  • भारत-फ्रांस भागीदारी कार्यक्रम के तहत न्यूनतम 15 परियोजनाओं का अखिल भारतीय चैलेंज के माध्यम से चयन किया जाएगा।
  • ये परियोजनाएं चार क्षेत्रों यथा- टिकाऊ गतिशीलता, सार्वजनिक खुला स्थान, शहरी शासन एवं सूचना एवं संचार तकनीक और निम्न-आय बसावटों में सामाजिक तथा संगठनात्मक नवाचार में होंगी।
  • इस कार्यक्रम की अवधि तीन वर्ष (वित्तीय वर्ष 2018-19 से वित्तीय वर्ष 2020-21 तक) होगी।
  • सिटीज (CITIIS) परियोजनाओं के लिए ‘एएफडी (AFD) -फ्रांस की अंतरराष्ट्रीय विकास एजेंसी द्वारा अनुदान के रूप में 100 मिलियन यूरो का ऋण दिया जाएगा।
  • मूलधन एवं ब्याज का पुनर्भुगतान केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा 50:50 के आधार पर वहन किया जाएगा।
  • प्रत्येक निर्णीत सिटीज परियोजना को 20 करोड़ रुपये से 80 करोड़ रुपये तक (अधिकतम परियोजना परिव्यय 160 करोड़ रुपये) के अनुदान का लाभ होगा।
  • सिटीज अनुदान से परियोजना लागत का न्यूनतम 50 प्रतिशत से 80 प्रतिशत की पूर्ति का अनुमान है।
  • भारत-फ्रांस भागीदारी के तहत परियोजनाओं के चयन के लिए चैलेंज प्रक्रिया का आयोजन ‘राष्ट्रीय शहरी मामले संस्थान’ द्वारा किया जाएगा।
  • स्थानीय क्षेत्र योजना (LAP) और शहरी नियोजन योजना (TPS)
  • स्थानीय क्षेत्र योजना और शहरी नियोजन योजना को ‘अम्रुत’ (AMRUT) के तहत तैयार किया गया है, जिससे क्रमशः ब्राउनफील्ड क्षेत्रों (Brownfiel Areas) और ग्रीनफील्ड क्षेत्रों (Greenfield Areas) में अवसंरचना सुविधाओं को विकसित करने के लिए समुचित नियोजन सुनिश्चित किया जा सके।
  • उल्लेखनीय है कि ब्राउनफील्ड क्षेत्र शहर के वे हिस्से हैं, जो पहले ही विकसित हो चुके हैं किंतु मौजूदा अवसंरचना सुविधाओं पर पड़ रहे दबाव को सहन करने में सक्षम नहीं हैं और ग्रीनफील्ड क्षेत्र शहर की परिधि वाले ऐसे क्षेत्र हैं जहां बेतरतीब वृद्धि और विकास की आशंका रहती है।
  • इन योजनाओं का कार्यान्वयन प्रायोगिक आधार पर 25 चयनित शहरों में किया जाएगा।
  • मौजूदा क्षेत्रों अथवा ब्राउनफील्ड क्षेत्रों को स्थानीय क्षेत्र आधारित योजनाएं (LAP) तैयार कर पुनर्विकसित किया जा सकता है और परिधीय ग्रीनफील्ड क्षेत्रों में योजनाबद्ध शहरी विस्तार के लिए ‘शहरी नियोजन योजना’ को लागू किया जा सकता है।
  • यह योजना चयनित शहरों को स्थानीय क्षेत्र आधारित योजनाएं और शहर नियोजन योजनाएं बनाने के लिए सक्षम करेगी जिसके लिए 100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता उपलब्ध होगी।
  • योजनांतर्गत चयनित 25 शहरों को प्रति शहर 2 करोड़ रुपये की दर से 50 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता प्रदान की जाएगी।
  • निष्कर्ष
  • भारत सरकार द्वारा प्रारंभ स्मार्ट सिटी मिशन का उद्देश्य नागरिकों को मूलभूत अवसंरचना एवं गुणवत्तापूर्ण जीवन उपलब्ध कराने हेतु शहरों को प्रोत्साहित करना है। अम्रुत मिशन के तहत सरकार द्वारा शहरों में मूलभूत सेवाओं (जैसे-जलापूर्ति, सीवेज, शहरी यातायात) उपलब्ध कराया जा रहा है। स्मार्ट सिटी मिशन और अम्रुत मिशन के तहत सद्यः प्रारंभ चारों कार्यक्रमों से शहरों में अवसंरचना सुविधाओं एवं सेवाओं को उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

लेखक-नीरज ओझा

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