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भारतीय राज्यों में रोग भार प्रवृत्तियां, 1990-2016

disease burden trends in the States of india,1990-2016

भारत में विश्व की जनसंख्या का लगभग पांचवां हिस्सा निवास करता है। भारत के विभिन्न भागों एवं राज्यों में स्वास्थ्य स्थिति तथा स्वास्थ्य हानि के कारकों में भिन्नता है। प्रत्येक राज्य में जनसंख्या के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के प्रभावी प्रयासों के लिए स्थानीय स्वास्थ्य स्थिति एवं प्रवृत्तियों की व्यवस्थित जानकारी की आवश्यकता होती है। यद्यपि भारत में कुछ महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संबंधी संकेतकों की कुछ राज्य स्तरीय प्रवृत्तियां उपलब्ध हैं किंतु प्रत्येक राज्य में असामयिक मृत्यु एवं विकलांगता के कारक रोगों का व्यापक आकलन उपलब्ध नहीं है। इसी आवश्यकता के मद्देनजर भारत के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के समर्थन से अक्टूबर, 2015 में ‘भारत राज्य-स्तरीय रोग पहल’ (India State Level Disease Burden Initiaive) का शुभारंभ किया गया। यह पहल भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद, भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिष्ठान, इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन और भारत के लगभग 100 संस्थानों के विशेषज्ञों एवं हितधारकों का सहयोगपूर्ण प्रयास है। हाल ही में ‘भारतीय राज्यों में रोग भार प्रवृत्तियां, 1990-2016’ (Disease Burden Trends in the States of India, 1990-2016) जारी की गई।

  • 14 नवंबर, 2017 को उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू द्वारा ‘भारतीय राज्यों में रोग भार प्रवृत्तियां, 1990-2016’ वर्ष जारी की गई।
  • भारत में महिलाओं की जीवन प्रत्याशा वर्ष 1990 में 59.7 वर्ष से बढ़कर वर्ष 2016 में 70.3 वर्ष हो गई और पुरुषों में 58.3 वर्ष से बढ़कर 66.9 वर्ष हो गई।
  • वर्ष 2016 में महिलाओं की जीवन प्रत्याशा उत्तर प्रदेश में 66.8 वर्ष थी, जबकि केरल में 78.7 वर्ष थी और पुरुषों की जीवन प्रत्याशा असम में 63.6 वर्ष थी, जबकि केरल में 73.8 वर्ष थी।
  • भारत में प्रति व्यक्ति रोग भार के रूप में मापित अक्षमता समायोजित जीवन वर्ष (DALYs) में वर्ष 1990-2016 तक 36 प्रतिशत की कमी हुई।
  • वर्ष 2016 में राज्यों के मध्य रोग भार दर में लगभग दोगुने का अंतर था जिसमें असम, उत्तर प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ में रोग भार दर उच्चतम थी और केरल तथा गोवा में रोग भार दर निम्नतम थी।
  • वर्ष 1990 से सभी राज्यों में 5 वर्ष से कम मृत्यु दर में पर्याप्त कमी हुई है।
  • वर्ष 2016 में राज्यों में 5 वर्ष से कम मृत्यु दर में चार गुने का अंतर है जिसमें असम एवं उत्तर प्रदेश में 5 वर्ष से कम मृत्यु दर उच्चतम थी, जबकि केरल में न्यूनतम थी।
  • भारत में संचारी, मातृ, नवजात एवं पोषण संबंधी बीमारियों के कारण अक्षमता समायोजित जीवन वर्ष के रूप में मापित सकल रोग भार वर्ष 1990 में 61 प्रतिशत था, जो वर्ष 2016 में घटकर 33 प्रतिशत हो गया।
  • सकल रोग भार में गैर-संचारी रोग का योगदान वर्ष 1990 के 30 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2016 में 55 प्रतिशत हो गया।
  • भारत में सर्वाधिक संक्रामक एवं संबद्ध रोगों का भार वर्ष 1990 से 2016 तक कम हुआ है।
  • संपूर्ण भारत में वर्ष 1990 के बाद से सकल रोग भार में प्रमुख गैर-संचारी रोगों में से अधिकांश के योगदान में वृद्धि हुई है जिसमें रक्तवाहिकाओं संबंधी रोग, क्रोनिक श्वसन रोग, मधुमेह, मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका संबंधी विकार, कैंसर, मस्तिष्क कोशिका संबंधी विकार एवं क्रोनिक किडनी रोग शामिल हैं।
  • अधिकांश राज्यों में वर्ष 1990 के बाद से सकल रोग भार में चोटों (Injuries) के योगदान में वृद्धि हुई है।
  • भारत में बाल एवं मातृ कुपोषण के कारण रोग भार में वर्ष 1990 के बाद से काफी गिरावट आई है, जबकि वर्ष 2016 में भारत में सकल रोग भार में बाल एवं मातृ कुपोषण का योगदान सर्वाधिक 15 प्रतिशत है।
  • वर्ष 2016 में सकल रोग भार में असुरक्षित जल एवं स्वच्छता का योगदान 5 प्रतिशत था।
  • वर्ष 1990 से 2016 के मध्य भारत में रोग भार में वायु प्रदूषण का योगदान अधिक था।
  • वर्ष 2016 में भारत में सकल रोग भार में घरेलू वायु प्रदूषण का योगदान 5 प्रतिशत था, जबकि बाह्य वायु प्रदूषण का योगदान 6 प्रतिशत था।
  • भारत में वर्ष 1990 में सकल रोग भार में अस्वस्थ आहार, उच्च रक्तचाप, उच्च रक्त शर्करा, उच्च कोलेस्ट्रॉल का 10वां हिस्सा था, जबकि वर्ष 2016 में सकल रोग भार में इस रोग समूह का योगदान एक-चौथाई था।
  • उपर्युक्त रोग समूह का योगदान पंजाब, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश एवं महाराष्ट्र में सर्वाधिक था।
  • मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों का विकास संकेतक अपेक्षाकृत निम्न स्तर का है।
  • दो उत्तर भारतीय राज्यों हिमाचल प्रदेश एवं पंजाब का विकास संकेतक अपेक्षाकृत उच्च स्तर का है।

लेखक-नीरज ओझा