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भारतीय डाक भुगतान बैंक

Indian post payment bank
  • पिछले 150 वर्षों से भी अधिक समय से भारतीय डाक विभाग देश की संचार व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह देशवासियों के जीवन को विभिन्न रूपों में जैसे- संदेश पहुंचाने, लघु बचत योजनाओं के तहत धन जमा करने, डाक जीवन बीमा और ग्रामीण जीवन बीमा के तहत जीवन बीमा उपलब्ध कराने तथा बिल संग्रह करने जैसे रिटेल सेवा उपलब्ध कराने आदि को प्रभावित करते हुए देश के सामाजिक आर्थिक विकास में संलग्न है। डाक विभाग सरकार के कार्यकर्ता के रूप में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत मजदूरी संवितरण और वृद्धा पेंशन भुगतान जैसे कार्य भी कर रहा है। लगभग 1,55,015 डाक घरों के साथ भारतीय डाक विभाग विश्व का सबसे अधिक विस्तृत डाक नेटवर्क है। इस कारण डाक विभाग को एक महत्वपूर्ण एवं विश्वसनीय संसाधन के रूप में प्रयोग करने हेतु एवं वित्तीय समावेशन का भारत के सुदूरवर्ती क्षेत्रों तक प्रसार करने हेतु भारतीय डाक भुगतान बैंक का शुभारंभ किया गया।
  • वर्तमान संदर्भ
  • 1 सितंबर, 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली स्थित तालकटोरा स्टेडियम में भारतीय डाक भुगतान बैंक (इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक – आईपीपीबी) का शुभारंभ किया।
  • क्या है आईपीपीबी?
  • यह केंद्रीय संचार मंत्रालय के डाक विभाग के अंतर्गत स्थापित एक बैंक है, जिसमें भारत सरकार की शत-प्रतिशत हिस्सेदारी है।




  • इस बैंक को स्थापित करने के लिए वर्ष 2015 में मंजूरी मिली थी, जिसके आधार पर वर्ष 2016 में भारतीय डाक भुगतान बैंक को सार्वजनिक कंपनी के तौर पर निगमित किया गया।
  • 30 जनवरी, 2017 को इसे पायलट परियोजना के रूप में रांची (झारखंड) एवं रायपुर (छत्तीसगढ़) में प्रारंभ किया गया था।
  • आईपीपीबी, अन्य भुगतान बैंकों के समान है पर इसका संचालन लघु स्तर पर बिना किसी ऋण जोखिम में शामिल हुए किया जाएगा।
  • यह बैंक बचत एवं चालू खाता, पैसों का हस्तांतरण, बिल और यूटिलिटी भुगतान आदि सेवाएं ग्राहकों को उपलब्ध कराएगा।




  • ये सुविधाएं शाखा में काउंटर पर, माइक्रो एटीएम, मोबाइल ऐप, इंटरनेट बैंकिंग आदि के जरिए ग्राहकों को उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा यह प्रत्यक्ष लाभ हस्तांरण, पेंशन आदि की सुविधाएं भी उपलब्ध कराएगा।
  • आईपीपीबी से लाभ
  • आईपीपीबी सेवा 1 सितंबर, 2018 से 650 शाखाओं और 3250 अधिगम बिंदु (Access Point) पर उपलब्ध है एवं दिसंबर, 2018 तक यह देश के सभी डाकघरों (1.55 लाख) तक उपलब्ध होगी। इनमें से 1.30 लाख ‘एक्सेस प्वाइंट’ ग्रामीण क्षेत्रों में होगी, जिससे एक वृहद् क्षेत्र में इसे बाजार की प्राप्ति होगी।
  • आईपीपीबी खाता खोलते समय ग्राहकों को एक ‘क्यूआर कोड’ (QR Code) दिया जाएगा, जिससे ग्राहकों को खाता संख्या याद रखने की आवश्यकता नहीं होगी। क्यूआरआर कोड की सहायता से ग्राहक कई अन्य प्रकार के वित्तीय लेन-देन भी कर सकेंगे। इन सुविधाओं को ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए डाकियों को जरूरी उपकरण और स्मार्टफोन दिए जाएंगे। इस तरह आईपीपीबी अपने घोष वाक्य ‘आपका बैंक आपके द्वार’ को चरितार्थ करेगी।




  • आईपीपीबी  बचत खातों पर 4 प्रतिशत की ब्याज दर भी प्रदान करेगा। साथ ही ‘थर्ड पार्टी’ सेवाओं जैसे बीमा एवं ऋण उपलब्ध कराने के लिए ‘पीएनबी’ और ‘बजाज एलियांज जीवन बीमा’ जैसे वित्तीय सेवा प्रदाताओं से गठजोड़ किया है।
  • सरकारी सहायता
  • आईपीपीबी को यह अनुमति प्राप्त हुई है कि वह अपने लगभग 17 करोड़ डाक बचत बैंक खातों को लिंक कर सकता है।
  • गौरतलब है कि सरकार ने आईपीपीबी के खर्च में 80 प्रतिशत राशि की वृद्धि को मंजूरी देते हुए 1435 करोड़ रुपये निर्धारित कर दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य आईपीपीबी को वर्तमान के भुगतान बैंकों जैसे ‘एयरटेल पेमेंट बैंक’ और ‘पेटीएम बैंक’ से प्रतिस्पर्धा करते हुए मजबूती प्रदान करना है।

लेखक-ललिन्द्र कुमार