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बांध पुनःस्थापन और सुधार परियोजना के संशोधित लागत अनुमान को मंजूरी

Dam Reinstatement and Correction Project Approves Revised Cost Estimates

बांध और जलाशय मानव की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करने जैसे- सिंचाई, जलविद्युत उत्पादन, बाढ़ नियंत्रण, पेयजल और औद्योगिक उपयोग हेतु जल, अंतर्देशीय नौपरिवहन एवं पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देते हैं। इस कारण स्वतंत्रता पश्चात भारत में भी बांधों एवं जलाशयों के निर्माण को बढ़ावा दिया गया। परंतु वर्तमान समय में बांधों का उचित प्रबंधन अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है, जिसकी अनदेखी करना बाढ़ रूपी प्राकृतिक विपदा को आमंत्रित करने जैसा है। चाहे बिहार राज्य में प्रायः आने वाली बाढ़ हो या हाल ही में केरल राज्य में आई विनाशकारी बाढ़। इनके पीछे बांधों एवं जलाशयों की भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता है। बांध एवं जलाशयों के ऐसे अनापेक्षित नकारात्मक प्रभावों को देखते हुए भारत सरकार द्वारा 18 अप्रैल, 2012 को बांध पुनःस्थापन और सुधार परियोजना को प्रारंभ किया गया था। इस परियोजना के तहत भारत में वर्तमान बांधों की सुरक्षा एवं संचालन प्रदर्शन में सुधार लाते हुए बांधों के निचले क्षेत्र में बसे लोगों एवं संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। प्रारंभ में यह परियोजना 6 वर्ष की अवधि की थी, जिसकी समाप्ति अवधि 30 जून, 2018 थी। परंतु वर्ष 2017 में केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय तथा विश्व बैंक द्वारा परियोजना क्रियान्वयन की अवधि में दो वर्षों का विस्तार किया गया।

    • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
    • 19 सितंबर, 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) में बांध पुनःस्थापन और सुधार परियोजना (डीआरआईपी) के 3466 करोड़ रुपये की संशोधित लागत अनुमान को मंजूरी प्रदान कर दी है।
    • परियोजना में संशोधन
    • मूल रूप से डीआरआईपी की कुल लागत 2100 करोड़ रुपये की थी, जिसमें केंद्रीय हिस्सा 132 करोड़ रुपये एवं राज्यों का हिस्सा 1968 करोड़ रुपये था।




  • इस परियोजना में संशोधन के पश्चात 3466 करोड़ रुपये में से 2628 करोड़ रुपये विश्व बैंक द्वारा, 747 करोड़ रुपये डीआरआईपी राज्य/क्रियान्यवन एजेंसियों द्वारा और शेष 91 करोड़ रुपये केंद्रीय जल आयोग द्वारा दिया जाएगा।
  • सीसीईए ने इस परियोजना के लिए पूर्व प्रभाव से 1 जुलाई, 2018 से 30 जून, 2020 तक दो वर्ष के समय विस्तार की स्वीकृति भी दी है।
  • इस योजना में 198 बांध परियोजनाओं के पुनःस्थापन का प्रावधान है। यह परियोजनाएं भारत के 7 राज्यों-केरल, मध्य प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, कर्नाटक, झारखंड (दामोदर घाटी निगम) तथा उत्तराखंड (उत्तराखंड जलविद्युत निगम लिमिटेड) में हैं।
  • प्रभाव
  • इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बांध तथा इसके निकटवर्ती क्षेत्रों के ढांचों का पुनःस्थापन करना, बांधों को संस्थागत मजबूती प्रदान करना एवं बांध परियोजना का प्रबंधन करना है।
  • अतः यह परियोजना चयनित वर्तमान बांधों की सुरक्षा और संचालन प्रदर्शन में सुधार लाएगी तथा परियोजना से संबंधित जोखिम समाप्त कर बांधों के निचले इलाकों की आबादी और संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।
  • इस परियोजना से प्राथमिक रूप में जलाशय पर निर्भर शहरी एवं ग्रामीण समुदाय तथा निचले इलाके के समुदाय लाभान्वित होंगे।
  • चूंकि निचले इलाकों में रहने वाले लोग बांध के विफल होने या संचालन विफलता के कारण जोखिम में रहते हैं। अतः संस्थागत व्यवस्था को मजबूत बनाकर बांध सुरक्षा संगठनों को और अधिक उपयुक्त बनाया जाएगा।
  • इसके परिणामस्वरूप बांध ढांचागत दृष्टि से मजबूत होंगे तथा कर्मचारियों एवं अधिकारियों के क्षमता सृजन के साथ बांध संचालन की दृष्टि से भी मजबूत होंगे।

लेखक-ललिन्द्र कुमार