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नाबार्ड अखिल भारतीय ग्रामीण वित्तीय समावेशन सर्वेक्षण, 2016-17

NABARD All India Rural Financial Inclusion Survey, 2016-17
  • विगत कुछ वर्षों में बैंकों, ग्रामीण स्व-रोजगार प्रशिक्षण संस्थानों और गैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक और नाबार्ड द्वारा वित्तीय समावेशन के लिए किए जा रहे प्रयासों में तेजी आई है। इस बात की आवश्यकता महसूस की गई कि ग्रामीण आबादी की संस्थागत ऋण या बीमा सुविधाओं तक पहुंच और उनकी आजीविका पर इन प्रयासों के प्रभाव का आकलन किया जाए। इसी पृष्ठभूमि में वर्ष 2016-17 में ‘नाबार्ड अखिल भारतीय ग्रामीण वित्तीय समावेशन’ सर्वेक्षण शुरू किया गया।
  • वर्तमान संदर्भ
  • 16 अगस्त,  2018 को नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार द्वारा नई दिल्ली में नाबार्ड द्वारा संचालित प्रथम अखिल भारतीय वित्तीय समावेशन रिपोर्ट, 2016-17 जारी किया गया।
  • उद्देश्य
  • इस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य विभिन्न संकेतकों के आधार पर भारत के ग्रामीण वित्तीय परिदृश्य की समग्र जानकारी प्राप्त करना।
  • इसके जरिए नाबार्ड ग्रामीण परिवारों की स्थिति के संबंध में निम्नलिखित विषयों पर अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहता था-
  • वित्तीय समावेशन जैसे- उधार, बचत, निवेश, पेंशन, बीमा आदि।
  • विभिन्न वित्तीय उत्पादों एवं सेवाओं के बारे में ग्रामीण लोगों के ज्ञान, व्यवहार एवं प्रवृत्ति जैसे पहलुओं को जानना।
  • आजीविका की स्थिति, आय के साधन, उपभोग व्यय, संपत्ति का स्वामित्व आदि।
  • नमूना/ प्रतिदर्श
  • यह सर्वेक्षण 1 जुलाई, 2015 से 30 जून, 2016 तक की अवधि के लिए जनवरी, 2017 से जून, 2017 के मध्य किया गया।
  • इसमें बहुचरणीय स्तरीकृत यादृच्छिक प्रतिदर्शन (Multi-Stage Stratified Random Sampling) के द्वारा 29 राज्यों के 245 जिलों में 2016 गांवों से नमूने एकत्रित किए गए।
  • इस प्रक्रिया में 40,327 ग्रामीण परिवारों के कुल 1,87,518 लोगों को शामिल किया गया।
  • नाबार्ड ने यह सर्वेक्षण ‘एकेडमी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज’ के जरिए करवाया था। इस कार्य में नाबार्ड को दिशा-निर्देश देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक, राष्ट्रीय सैम्पल सर्वेक्षण संगठन, भारतीय सांख्यिकी संस्थान सहित नाबार्ड के वरिष्ठ अधिकारियों की अगुवाई में एक सलाहकार समिति गठित की गई थी।
  • भूस्वामित्व
  • इस रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में भू-स्वामित्व की दृष्टि से सर्वाधिक भूमि प्रति परिवार राजस्थान (1.32 हेक्टेयर) में है। उसके बाद मिजोरम (1.18 हेक्टेयर) दूसरे एवं नगालैंड (1.16 हेक्टेयर) तीसरे स्थान पर है।
  • इस सूची में गोवा (0.13 हेक्टेयर) अंतिम स्थान पर है। उससे ऊपर केरल (0.15 हेक्टेयर) एवं पश्चिम बंगाल (0.17 हेक्टेयर) राज्यों का स्थान है।
  • इस सूची के अनुसार, उत्तर प्रदेश में प्रति परिवार 0.47 हेक्टेयर भू-स्वामित्व है, जबकि संपूर्ण भारत में 0.54 हेक्टेयर भू-स्वामित्व है।
  • औसत आय
  • इस रिपोर्ट से यह पता चला है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि पर निर्भर परिवारों की वार्षिक आय गैर-कृषि जीविका गतिविधियों में संलग्न परिवारों से अधिक रही थी।
  • कृषि संबंधी परिवारों की औसत वार्षिक आय (वर्ष 2015-16 के संदर्भ में) 1,07,172 रुपये थी, जबकि गैर- कृषि गतिविधियों में संलग्न परिवारों की औसत वार्षिक आय 87,288 रुपये थी।
  • सभी ग्रामीण परिवारों की औसत वार्षिक आय 96,708 रुपये थी एवं कृषि कार्य में संलग्न परिवारों की आय गैर-कृषि कार्य में संलग्न परिवारों की तुलना में 23 प्रतिशत अधिक थी।
  • ग्रामीण परिवारों के औसत आय के मामले में पंजाब (16,020 रु.) प्रथम, केरल (15,130 रु.) दूसरे एवं हरियाणा (12,072 रु.) तीसरे स्थान पर है।
  • वहीं इस सूची में आंध्र प्रदेश (5842 रु.) सबसे अंतिम स्थान पर, झारखंड (5854 रु.) 28वें एवं उत्तर प्रदेश (6.257 रु.) 27वें  स्थान पर है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, 88.1 प्रतिशत परिवारों के पास बैंक खाता है, जिसमें से 33 प्रतिशत परिवारों के पास 1 से अधिक बैंक खाता है।
  • ग्रामीण क्षेत्र में 26 प्रतिशत परिवारों में महिलाओं के पास संस्थागत बचत खाता है।
  • कर्ज
  • सर्वेक्षण के दौरान अखिल भारतीय स्तर पर 47.4 प्रतिशत ग्रामीण परिवार कर्ज में डूबे थे, जिसमें से कृषि संबंधी परिवारों में 52.5 प्रतिशत परिवार एवं गैर-कृषि कार्य संबंधी परिवारों में 42.8 प्रतिशत परिवार कर्ज में थे।
  • इस सूची में तेलंगाना (79%) प्रथम स्थान पर है, जबकि जम्मू और कश्मीर एवं गुजरात (27%) दोनों संयुक्त रूप से अंतिम स्थान पर हैं।
  • उत्तर प्रदेश में कुल 38 प्रतिशत ग्रामीण परिवार कर्ज में डूबे हैं।
  • अखिल भारतीय स्तर पर 58.7 प्रतिशत ग्रामीण परिवार संस्थागत स्रोत से ऋण लेते हैं, जबकि 31.8 प्रतिशत ग्रामीण परिवार गैर-संस्थागत स्रोत से।
  • संस्थागत स्रोत में सर्वाधिक ऋण वाणिज्यिक बैंक या क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (36.6%) से लिया जाता है।
  • गैर-संस्थागत स्रोत में सर्वाधिक ऋण रिश्तेदारों या मित्रों (24.7%) से लिया जाता है।

लेखक-ललिन्दर कुमार