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दो विदेशी उपग्रहों का प्रक्षेपण

Launch of two foreign satellites
    • भूमिका
    • ‘भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन’ (ISRO) अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों को प्रक्षेपण सेवाएं ‘पीएसएलवी’ (PSLV) के माध्यम से उपलब्ध कराता है।
    • व्यावसायिक प्रक्षेपण सेवा बाजार में इसरो का प्रवेश 26 मई, 1999 को हुआ, जब इसरो ने पीएसएलवी-सी 2 के माध्यम से भारतीय सुदूर संवेदन उपग्रह ओशनसैट के साथ दक्षिण कोरियाई उपग्रह किटसैट-3 तथा जर्मनी के उपग्रह डीएलआर-टबसैट को उनकी निर्धारित कक्षा में स्थापित किया।
    • अब तक इसरो द्वारा 28 देशों के 239 उपग्रहों का प्रक्षेपण किया जा चुका है।
    • सद्यः मिशन
    • 16 सितंबर, 2018 को ‘भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन’  के ‘ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान’ (PSLV) की 44वीं उड़ान (मिशन पीएसएलवी-सी42) सफलतापूर्वक संपन्न हुई।




    • इस मिशन के तहत पीएसएलवी-सी42 ने श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र शार के प्रथम लांच पैड से भारतीय समयानुसार रात्रि 10 बजकर 8 मिनट पर उड़ान भरी।
    • लिफ्ट-ऑफ के लगभग 17 मिनट पश्चात पीएसएलवी-सी42 ने दो विदेशी उपग्रहों को 583 किमी. की ऊंचाई पर ‘सूर्य समकालिक कक्षा’ (Sun Synchronous Orbit) में स्थापित कर दिया।
    • दो विदेशी उपग्रह
    • सद्यः मिशन के तहत जिन दो विदेशी उपग्रहों का प्रक्षेपण किया गया, वे हैं- (i) नोवासार (NovaSAR) एवं (ii) S1-4
    • इन दोनों उपग्रहों का स्वामित्व यूनाइटेड किंगडम स्थित ‘सरे सैटेलाइट टेक्नोलॉजी लिमिटेड’ (SSTL : Surrey Satellite Technology Limited) के पास है।




    • नोवासार
    • नोवासार एक S- बैंड ‘सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) सैटेलाइट’ है।
    • यह पहला ऐसा SAR उपग्रह है, जिसका निर्माण पूर्ण रूप से यूनाइटेड किंगडम में हुआ है।
    • उल्लेखनीय है कि सिंथेटिक अपर्चर रडार उपग्रह अंतरिक्ष से पृथ्वी की निगरानी के लिए एक शक्तिशाली युक्ति है क्योंकि इसमें बादलों के आर-पार देखने की क्षमता होती है, साथ ही यह दिन एवं रात किसी भी समय पृथ्वी की तस्वीरें खींचने में सक्षम है।
    • इस उपग्रह का उपयोग वनों के मानचित्रण, बर्फ की चादरों, बाढ़ एवं आपदा निगरानी इत्यादि में किया जाएगा।
    • इस उपग्रह का संचालन SSTL के गिल्डफोर्ड (यूके) स्थित ‘अंतरिक्षयान संचालन केंद्र’ (Spacecraft Operations Centre) से किया जाएगा।
    • ज्ञातव्य है कि नोवासार उपग्रह का उत्थापन भार (Lift-off Weight) 445 किग्रा. है।
    • S1-4 उपग्रह
    • S1-4 एक उच्च विभेदन-क्षमता (High Resolution) युक्त भू-अवलोकन उपग्रह (Earth Observation Satellite) है।
    • इस उपग्रह का उत्थापन भार 444 किग्रा. है।
    • इस उपग्रह का उपयोग संसाधनों के सर्वेक्षण, पर्यावरण की निगरानी, शहरी प्रबंधन तथा आपदा निगरानी में किया जाएगा।
    • मिशन पीएसएलवी-सी42 : अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
    • सद्यः मिशन पीएसएलवी की 44वीं उड़ान थी।
    • साथ ही यह पीएसएलवी के कोर एलोन (Core Alone) संस्करण की 12वीं उड़ान भी थी।
    • ज्ञातव्य है कि कोर एलोन पीएसएलवी का सबसे हल्का संस्करण है।
    • छोटे पेलोड के प्रक्षेपण के लिए इसका प्रयोग किया जाता है।




  • इस मिशन के तहत प्रक्षेपित दोनों उपग्रहों का कुल वजन लगभग 889 किग्रा. था।
  • इसरो का यह मिशन पूर्णतः व्यावसायिक उद्देश्यों को समर्पित था।
  • इस मिशन के तहत किसी भारतीय उपग्रह का प्रक्षेपण नहीं किया गया।

लेखक-सौरभ मेहरोत्रा