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दिल्ली : वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली

Air Quality Early Warning System
    • वर्तमान परिदृश्य
    • 15 अक्टूबर, 2018 को केंद्र सरकार द्वारा दिल्ली के लिए वायु प्रदूषण भविष्यवाणी प्रणाली शुरू की गई। इस प्रणाली को ‘वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली’ (Air Quality Early Warning System) कहा जाता है। पूर्व सूचना के आधार पर अब वायु प्रदूषण का मुकाबला करने में मदद मिलेगी।
    • चेतावनी प्रणाली का विकास
    • ‘वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली’ का विकास, भारतीय उष्ण देशीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM : Indian Institute of Tropical Meteorology) पूना, राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र (NCMRWF : National Centre for Medium Range Weather Forecasting) नोएडा और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD : India Meteorological Department) के वैज्ञानिकों के संयुक्त प्रयास से विकसित किया गया।





  • लाभ
  • इस चेतावनी प्रणाली से सरकार के प्रदूषण निगरानी तंत्र और सामान्य जनता को तीन दिन (72 घंटा) पहले वायु की गुणवत्ता के विषय में सतर्क रहना आसान हो जाएगा।
  • इस प्रणाली में पहले से ही उच्च प्रदूषण के बारे में सार्वजनिक और प्रवर्तन एजेंसियों को सूचित करने के लिए एक अंतर्निर्मित वेब आधारित प्रसार उपकरण होगा।
  • वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI)
  • वर्तमान में दिल्ली में वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी (Poor Category) में है।
  • वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI)       श्रेणी
(0 – 50)अच्छी (Good)
(51 – 100)संतोषजनक (Satisfactory)
(101 – 200)मध्यम (Moderate)
(201 – 300)खराब (Poor)
(301 – 400)बहुत खराब (Very poor)
(401 – 500)गंभीर (Severe)vvvvv
    • भारत सरकार की वायु गुणवत्ता और मौसम पूर्वानुमान तथा अनुसंधान प्रणाली : सफर (System of Air Quality & Weather Forecasting & Research – SAFAR) पर दिल्ली का वायु गुणवत्ता स्तर मापा जाता है, जिस पर 1 से लेकर 500 अंकों तक वायु की गुणवत्ता का आकलन किया जाता है।
    • केंद्र सरकार ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अंतर्गत सार्वजनिक सूचना के लिए राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) जारी किया।
    • AQI को आठ प्रदूषकों – PM 2.5, PM 10, अमोनिया, लेड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, ओजोन और कार्बन मोनोऑक्साइड के लिए विकसित किया गया है।
    • दिल्ली में वायु गुणवत्ता की स्थिति
    • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली विश्व के सबसे प्रदूषित शहरों में से एक है।




    • WHO के अनुसार, क्रोनिक श्वसन रोग और अस्थमा के कारण मरने वाले लोगों का अनुपात भारत में सर्वाधिक है।
    • WHO के वायु गुणवत्ता डेटाबेस, 2018 ने शीर्ष 15 प्रदूषित शहरों में भारत के 14 शहरों को सूचीबद्ध किया था। सूची में दिल्ली छठें स्थान पर था, इससे पहले क्रमशः कानपुर, फरीदाबाद, वाराणसी, गया और पटना का स्थान था।
    • खराब वायु गुणवत्ता का कारण
    • दिल्ली में PM 2.5 की समस्या पड़ोसी राज्यों के कारण है। पड़ोसी राज्य हरियाणा और पंजाब में गेहूं और धान के फसल की कटाई के बाद खेतों की सफाई के लिए आग लगा दी जाती है। जिससे उत्पन्न होने वाला धुआं दिल्ली की वायु को प्रदूषित कर देता है।
    • इसके अलावा निर्माण कार्यों के चलते उड़ने वाले धूल-कण, डीजल चालित वाहन, कारखानों से निकलने वाला धुआं, फ्रिज और एसी में इस्तेमाल होने वाली गैस वायु की गुणवत्ता को निम्न स्तर तक लाने के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी है।
    • अन्य उपाय (वायु प्रदूषण दूर करने के)
    • CPCB ने राजधानी में वायु प्रदूषण का मुकाबला करने के लिए ‘ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान’ (GRP) नामक आपातकालीन योजना लागू की है। इसके तहत शहर की वायु गुणवत्ता के आधार पर कड़े कदम उठाए जाते हैं।




  • पराली जलाने पर नियंत्रण हेतु सरकार ‘टर्बो हैप्पी सेंडर’ खरीदने के लिए किसानों को सब्सिडी दे रही है।
  • भारत में BS-VI मानक को लागू करने के लिए अप्रैल, 2020 की जहां समय-सीमा तय की गई है, वहीं राजधानी दिल्ली में 1 अप्रैल, 2018 से इसे लागू कर दिया गया है।

लेखकअमर सिंह