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तुर्की का आर्थिक संकट

Turkey's economic crisis
  • क्या है तुर्की आर्थिक संकट :
  • कभी आर्थिक विकास के मामले में भारत और चीन की कतार में खड़ा रहने वाला तुर्की, वर्तमान में बड़े आर्थिक संकट से गुजर रहा है। पिछले चार वर्षों में यहां की अर्थव्यवस्था में लगातार गिरावट आ रही है। इसका बढ़ता विदेशी कर्ज और व्यापार घाटा इस देश के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। यहां महंगाई काफी तेजी से बढ़ रही है।
  • डॉलर के मुकाबले लीरा की कमजोर स्थिति
  • पिछले एक वर्ष के दौरान तुर्की मुद्रा लीरा, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 45 प्रतिशत तक गिर गई है।




  • गौरतलब है कि वर्ष 2005 में 1 डॉलर की कीमत 1 लीरा थी, जो वर्तमान 1 डॉलर के मुकाबले गिरकर 7 लीरा हो गई है।
  • तुर्की द्वारा लिए गए कर्ज में लगभग 70 प्रतिशत विदेशी स्रोतों से है, जिसका वापसी और ब्याज भुगतान डॉलर में करना होता है। लीरा की कमजोर विनिमय दर के कारण तुर्की के लिए उपर्युक्त मदों के लिए डॉलर जुटाना टेढ़ी खीर हो रहा है।

लीरा के कमजोर होने के कारण

  1.    डॉलर में बड़ा कर्ज (7% तक)
  2.    बढ़ती महंगाई (15.9 % in July वार्षिक)
  3.    कम ब्याज दर
  4.    विदेशी मुद्रा भंडार की कमी
  5.   अमेरिका के साथ बढ़ता तनाव

Ref : Money control

  • तुर्की के आर्थिक संकट का एक बड़ा कारण उस पर अमेरिका द्वारा लगाया गया आर्थिक प्रतिबंध है।
  • तुर्की के आर्थिक संकट का एक बड़ा कारण इसके कुल ऋण में 70 प्रतिशत अमेरिकी डॉलर में है। अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना तुर्की का विदेशी कर्ज (अमेरिकी डॉलर) कहीं ज्यादा है।
  • इसके अतिरिक्त तुर्की आर्थिक संकट का एक बड़ा कारण तेजी से बढ़ती महंगाई दर (15% वार्षिक) है,जो कि विकसित देशों की औसत महंगाई पांच गुना ज्यादा है।
  •  निम्न ब्याज दर का होना भी तुर्की के आर्थिक संकट का एक बड़ा कारण है। तुर्की का वंफ्रेद्रीय बैंक ब्याज दरों को बढ़ाना चाहता है, जबकि राष्ट्रपति एर्दोगन ब्याज दरों को कम रखने के पक्ष में हैं। राष्ट्रपति के इस निर्णय की आर्थिक विशेषज्ञ आलोचना कर रहे हैं।




  • आर्थिक संकट का कारण
  • तुर्की के आर्थिक संकट का एक बड़ा कारण उस पर अमेरिका द्वारा लगाया गया आर्थिक प्रतिबंध है।
  • गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 10 अगस्त, 2018 को तुर्की के स्टील एवं एल्युमीनियम पर आयात शुल्क बढ़ाकर दोगुना कर दिया है।
  • वर्ष 2016 में तुर्की की ओर से राष्ट्रपति एर्दोगन के तख्तापलट की नाकाम कोशिश की गई थी। इस मामले में तुर्की में लंबे समय से काम कर रहे अमेरिकी पादरी एंड्रयू ब्रनसन को गिरफ्तार किया गया था।
  • अमेरिका ने पादरी एंड्रयू ब्रनसन को रिहा करने की मांग की थी और तुर्की ने यह मांग नहीं मानी, तो उस पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिया गया।
  • तुर्की संकट का भारत पर असर
  • तुर्की आर्थिक संकट का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ रहा है। कमजोर वैश्विक संकेतों की वजह से घरेलू शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
  • शेयर बाजार के साथ ही भारतीय मुद्रा बाजार में भी तुर्की आर्थिक संकट के कारण प्रभावित हुआ है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर (70 रु. के पार) पर पहुंच गया है।
  • आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस संकट की वजह से सोने के दाम में तेजी आना तय है।
  • हालांकि भारत का तुर्की की अर्थव्यवस्था बहुत कम एक्सपोजर है, जिसकी वजह से इस संकट का बहुत ज्यादा असर भारत पर पड़ने की संभावना नहीं है।
  • इस संकट की एक बड़ी वजह तुर्की के पास विदेशी मुद्रा भंडार की कमी है। ध्यातव्य है कि तुर्की के पास 130 बिलियन अमेरिकी डॉलर का फॉरेक्स रिजर्व है, जबकि उसका अल्पावधिक विदेशी ऋण 180 बिलियन डॉलर का है। इसका कुल 70 प्रतिशत विदेशी ऋण 460 बिलियन डॉलर है।
  • अमेरिका के साथ बढ़ता तनाव तुर्की संकट की एक बड़ी वजह है। गौरतलब है कि 10 अगस्त, 2018 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने तुर्की के स्टील एल्युमीनियम उत्पादों पर आयात शुल्क को दोगुना कर देने से तुर्की का आर्थिक संकट और गहरा गया है।
  • भारतीय शेयर बाजार उन निवेशकों को अपनी तरफ खींच सकता है, जो ऐसे देश की तलाश में है, जिन्हें ग्लोबल ट्रेड वॉर और अमेरिका में बढ़ती दर से ज्यादा नुकसान नहीं होगा।




  • तनाव का कारण
  • (1) एंड्रयू ब्रनसन (2) तख्तापलट (3) सीरिया युद्ध में कुर्द लड़ाकों को अमेरिकी सहायता (4) तुर्की की रूस के साथ मित्रता (S-400 खरीद रहा, अमेरिका के F-35 के लड़ाकू विमान की जगह) (5) तुर्की द्वारा इस्लामी कट्टरता को बढ़ावा देने का आरोप (6) वर्ष 2003 में ईराक युद्ध के दौरान अमेरिका सैनिक अपनी जमीन न इस्तेमाल करने देने के कारण दोनों देशों के रिश्ते खराब हुए हैं।
  • तुर्की संकट का वैश्विक असर
  • तुर्की मुद्रा ‘लीरा’ की कमजोर स्थिति के कारण यूरोप और एशियाई देशों की मुद्राएं भी दबाव में हैं।
  • बैंक ऑफ इंटरनेशनल सेटलमेंट (बीआईएस) के आंकड़ों के अनुसार ‘लीरा’ की कमजोर स्थिति के कारण यूरोपीय बैंक कमजोर स्थिति में हैं।
  • गौरतलब है कि स्पेन के बैंकों ने तुर्की को 83 अरब, फ्रांस ने 38 अरब, इटली के बैंकों ने 17 अरब डॉलर और जापान के बैंकों ने 14 अरब डॉलर का कर्ज दे रखा है।
  • विश्वभर की अर्थव्यवस्थाओं में डॉलर की मांग बढ़ने के कारण अमेरिकी डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है, परिणामस्वरूप अन्य मुद्राओं की विनिमय दर (Exchange power) कमजोर हो रही है।
  • आर्थिक संकट पर तुर्की की प्रतिक्रिया
  • अमेरिकी प्रतिबंधों की प्रतिक्रिया में तुर्की ने भी अमेरिकी आयातों यथा- इलेक्ट्रॉनिक सामान, अमेरिकी कारों, तम्बाकू और शराब पर आयात शुल्क बढ़ा दिया है।
  • तुर्की के केंद्रीय बैंक ने सहायक बैंकों को आवश्यक तरलता प्रदान करने हेतु सहमति दी है।
  • खाड़ी देश कतर ने तुर्की को 15 अरब डॉलर की सहायता का आश्वासन दिया है।
  • इसके अतिरिक्त राष्ट्रपति एर्दोगन ने देश के नागरिकों से अपने पास जमा डॉलर और सोने को देश की मुद्रा ‘लीरा’ से बदलने की अपील की है।