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तीसरा हिंद महासागर सम्मेलन

Third Indian Ocean Conference
  • पृष्ठभूमि
  • हिंद महासागर सम्मेलन, भारतीय विदेश नीति की थिंक टैंक संस्था ‘इंडिया फाउंडेशन’ की पहल है। इस कार्य में भारतीय विदेश मंत्रालय भी ‘इंडिया फाउंडेशन’ का सहयोग करता है।
  • वार्षिक आधार पर होने वाले इस सम्मेलन में भारत के सहयोगी साझीदार- सिंगापुर, श्रीलंका और बांग्लादेश हैं।
  • हिंद महासागर सम्मेलन के पहले दो संस्करणों का सफल आयोजन वर्ष 2016 और वर्ष 2017 में क्रमशः सिंगापुर और श्रीलंका में हुआ।
  • उद्देश्य
  • इस सम्मेलन के आयोजन का उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में स्थित राज्यों एवं सरकारों के प्रमुखों, मंत्रियों, विचारकों, विद्वानों, राजनयिकों, नौकरशाहों और चिकित्सकों को एक मंच पर लाकर आपसी निकटता, सहयोग और समझ में वृद्धि करना है।
  • वर्तमान परिदृश्य
  • 27-28 अगस्त, 2018 को वियतनाम की राजधानी हनोई में तीसरा हिंद महासागर सम्मेलन आयोजित हुआ।
  • 27 अगस्त, 2018 को भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और वियतनाम के विदेश मंत्री और उपप्रधानमंत्री फाम बिन्ह मिन ने इस सम्मेलन का उद्घाटन किया।
  • इस संस्करण का विषय ‘बिल्डिंग रीजनल आर्किटेक्चर’ था।
  • सम्मेलन के आयोजनकर्ता
  • तीसरे हिंद महासागर सम्मेलन का आयोजन भारत के इंडिया फाउंडेशन द्वारा डिप्लोमेटिक एकेडमी ऑफ वियतनाम, एस. राजारत्नम स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज, श्रीलंका और बांग्लादेश इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल एंड स्ट्रेटजिक स्टडीज के सहयोग से किया गया।
  • अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
  • तीसरे हिंद महासागर सम्मेलन में 40 देशों के लगभग 300 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
  • सम्मेलन के मुख्य वक्ता भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, श्रीलंका के प्रधानमंत्री रॉनिल विक्रमसिंघे, वियतनाम के उपप्रधानमंत्री फाम बिन्ह मिन, नेपाल के उपप्रधानमंत्री उपेन्द्र यादव और सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन आदि रहे।
  • इस वर्ष के हिंद महासागर सम्मेलन का जोर क्षेत्रीय देशों के मध्य बेहतर सहयोग, रणनीतिक सहायता और शासन में ढांचागत सुधार पर रहा।
  • गौरतलब है कि हिंद महासागर सम्मेलन के माध्यम से इस क्षेत्र के देश एक-दूसरे के नजदीक आएंगे और आर्थिक एवं रणनीतिक महत्व पर बेहतर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।

लेखक-धीरेन्द्र त्रिपाठी