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डीएनए प्रौद्योगिकी (उपयोग एवं अनुप्रयोग) विनियमन विधेयक, 2018

DNA Technology (Use and Application) Regulation Bill, 2018
  • पृष्ठभूमि
  • मानव शरीर को प्रभावित करने वाले (जैसे-हत्या, दुष्कर्म, मानव तस्करी या गंभीर चोट) और संपत्ति की हानि (जैसे-चोरी, सेंधमारी एवं डकैती) से संबंधित अपराधों के समाधान में फोरेंसिक डीएनए (DNA :Deoxyribose Nucleic Acid) प्रोफाइलिंग का विशेष महत्व है।
  •  वर्ष 2016 के राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, देश में ऐसे अपराधों की कुल संख्या प्रतिवर्ष 3 लाख से अधिक है।
  • उक्त मामलों में से केवल बहुत छोटे हिस्से का ही वर्तमान में डीएनए परीक्षण किया जाता है।
  • इसी तथ्य के दृष्टिगत 4 जुलाई, 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘डीएनए प्रौद्योगिकी (उपयोग एवं अनुप्रयोग) विनियमन विधेयक, 2018’ [DNA Technology (Use and Application) Regulation Bill, 2018 ]को स्वीकृति प्रदान की।
  • उद्देश्य
  • उक्त विधेयक का प्राथमिक उद्देश्य देश की न्यायिक प्रणाली को समर्थन देने एवं सुदृढ़ बनाने के लिए डीएनए आधारित फोरेंसिक प्रौद्योगिकियों के अनुप्रयोग को विस्तारित करना है।
  • प्रमुख प्रावधान
  • विधेयक में पीड़ितों, अपराधियों, संदिग्धों, विचाराधीन कैदियों, गुमशुदा व्यक्तियों और अज्ञात मृत व्यक्तियों सहित कुछ निश्चित श्रेणी के व्यक्तियों की पहचान स्थापित करने के लिए डीएनए प्रौद्योगिकी के उपयोग एवं अनुप्रयोग के विनियमन का प्रावधान किया गया है।
  • विधेयक में ‘डीएनए प्रोफाइलिंग बोर्ड’ की स्थापना का प्रावधान है जिसमें आणविक जीव विज्ञान, मानव आनुवांशिकी, जनसंख्या जीव विज्ञान, जैवनैतिकता (Bioethics), सामाजिक विज्ञान, विधि और आपराधिक न्याय के विशेषज्ञ शामिल होंगे।
  • बोर्ड द्वारा डीएनए प्रयोगशालाओं का प्रमाणन एवं प्रत्यायन, डीएनए डाटा बैंकों की स्थापना तथा उनकी निगरानी और डीएनए सूचनाओं के संग्रहण, भंडारण, आदान-प्रदान एवं निरसन से संबंधित प्रक्रियाओं तथा दिशा-निदेर्शों का निर्माण किया जाएगा।
  • राज्य स्तर पर भी ‘डीएनए प्रोफाइलिंग बोर्ड’ की स्थापना का प्रावधान किया गया है।
  • विधेयक में ‘राष्ट्रीय डीएनए डाटा बैंक’ की स्थापना का प्रावधान है जो अपराधियों, संदिग्धों, गुमशुदा व्यक्तियों, अज्ञात मृत व्यक्तियों से डीएनए डाटा संग्रहीत करेगा।
  • साथ ही यह हत्या, यौन हमला, व्यभिचार जैसे आपराधिक मामलों में डीएनए डाटा को संग्रहीत एवं प्रोफाइल करेगा।
  • विधेयक के अनुसार, किसी भी डीएनए प्रयोगशाला एवं डाटा बैंक में निहित डीएनए प्रोफाइल, नमूना और अभिलेख सहित डीएनए डाटा का उपयोग केवल व्यक्ति की पहचान को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से किया जाएगा।
  • डीएनए डाटा को अभियोजन या बचाव और नागरिक मामलों से संबंधित जांच में सुविधा के लिए साक्ष्य की स्वीकार्यता के नियमों के अनुसार, आपराधिक मामलों में व्यक्तियों की पहचान की सुविधा के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
  • विधेयक के अनुसार, संदिग्धों और अपराधियों की सूची के अतिरिक्त किसी व्यक्ति की डीएनए सूचना अन्य सूची में संग्रहीत नहीं की जा सकती।
  • ऐसे मामलों में केवल केस संदर्भ संख्या संग्रहीत की जाएगी।
  • यदि कोई व्यक्ति अपराधी, संदिग्ध या विचाराधीन कैदी नहीं है, तो उसकी डीएनए सूचना का मिलान अपराधियों या संदिग्धों की सूची से नहीं किया जा सकता है।
  • न्यायालय के आदेश पर संदिग्धों या विचाराधीन कैदियों की डीएनए प्रोफाइल सूची से हटाई जा सकती है।
  • विधेयक के अनुसार, बिना सहमति के गिरफ्तार व्यक्ति से डीएनए नमूनों (Samples) का संग्रहण नहीं किया जा सकता है।
  • डीएनए नमूने उन लोगों से भी प्राप्त किए जा सकते हैं, जो किसी अपराध के गवाह हैं या अपने लापता संबंधियों को ढूंढ़ना चाहते हैं या स्वेच्छा से लिखित रूप में किसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए अपना डीएनए नमूना देना चाहते हैं, किंतु स्वेच्छा से प्राप्त नमूनों को किसी सूची में शामिल नहीं किया जाएगा।
  • यदि कोई संदिग्ध या अपराधी डीएनए नमूना संग्रहण के लिए सहमति नहीं देता और अपराध की जांच के लिए उसकी डीएनए सूचना महत्वपूर्ण मानी जाती है, तो मजिस्ट्रेट की स्वीकृति पर उसका डीएनए नमूना संग्रहीत किया जा सकता है।
  • विधेयक में अनधिकृत व्यक्तियों या अनधिकृत उद्देश्यों के लिए डीएनए सूचना का खुलासा करने हेतु तीन वर्ष तक का कारावास और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना का प्रावधान किया गया है।
  • विगत प्रयास
  • सरकार द्वारा सर्वप्रथम वर्ष 2007 में ‘डीएनए प्रोफाइलिंग विधेयक’ का मसौदा’ तैयार किया गया था।
  • वर्ष 2012, 2015 और 2016 में भी ‘मानव डीएनए प्रोफाइलिंग विधेयक का मसौदा तैयार किया गया था।
  • जुलाई, 2017 में विधि आयोग ने ‘डीएनए आधारित प्रौद्योगिकी (उपयोग एवं विनियमन) विधेयक, 2017’ का मसौदा सरकार को सौंपा था।
  • ‘डीएनए प्रौद्योगिकी (उपयोग एवं अनुप्रयोग) विनियमन विधेयक,  2018’ कुछ मामूली परिवर्तनों को छोड़कर काफी हद तक विधि आयोग के प्रस्ताव पर आधारित है।
  • निष्कर्ष
  •    अपराधों के समाधान एवं गुमशुदा व्यक्तियों की पहचान के लिए डीएनए आधारित प्रौद्योगिकी की उपयोगिता विश्व भर में स्वीकृत है। इस दृष्टिा से ‘डीएनए प्रौद्योगिकी (उपयोग एवं अनुप्रयोग) विनियमन विधेयक, 2018 एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल न्याय प्रणाली में शीघ्रता तथा अपराध सिद्धि दर में बढ़ोत्तरी होगी, बल्कि गुमशुदा व्यक्तियों अज्ञात शवों और आपदा के शिकार व्यक्तियों के पहचान में मदद मिलेगी।

लेखक-नीरज ओझा