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जीसैट-29 का सफल प्रक्षेपण

Successful launch of GSAT-29
  • जीएसएलवी मार्क-III
  • जीएसएलवी मार्क-III इसरो द्वारा विकसित तीन चरणों (Three-stage) वाला एक रॉकेट है।
  • इसके प्रथम चरण में दो ठोस रॉकेट बूस्टर (S200) संलग्न हैं, जो लिफ्ट-ऑफ के लिए आवश्यक ठेल (Thrust) प्रदान करते हैं।
  • प्रथम चरण में ठोस प्रणोदक एचटीबीपी (HTBP : Hydroxyl-Terminated Polybutadiene) भरा जाता है।
  • दो विकास इंजनों द्वारा संचालित दूसरे चरण (L110) में द्रव प्रणोदक [(UDMH : Unsymmetrical Di-Methyl Hydrazine एवं N2O4 (Nitrogen Tetra Oxide) ]इस्तेमाल किया जाता है।
  • तीसरा चरण क्रायोजेनिक चरण है।
  • इस चरण में स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन CE-20 संलग्न है।
  • 43.43 मीटर लंबा एवं 640 टन वजनी जीएसएलवी मार्क-III 4 टन एवं उससे अधिक वजनी उपग्रहों को ‘भू-तुल्यकालिक अंतरण कक्षा’ (GTO) में स्थापित करने के लिए डिजाइन किया गया है।
  • पहली विकासात्मक उड़ान
  • देश के सबसे भारी और शक्तिशाली रॉकेट जीएसएलवी मार्क-III की पहली विकासात्मक उड़ान (GSLV-MK III-D1) 5जून, 2017 को सफलतापूर्वक संपन्न हुई थी।
  • इस उड़ान के द्वारा जीएसएलवी मार्क-III ने संचार उपग्रह जीसैट-19 को भू-तुल्यकालिक अंतरण कक्षा (GTO) में स्थापित किया था।
  • दूसरी विकासात्मक उड़ान
  • 14 नवंबर, 2018 को जीएसएलवी मार्क-III की दूसरी विकासात्मक उड़ान (GSLV-MKIII-D2) सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
  • सद्यः मिशन के तहत जीएसएलवी मार्क-III डी2 ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र शार के द्वितीय लांच पैड से उड़ान भरी।
  • लिफ्ट-ऑफ के लगभग 17 मिनट पश्चात इस रॉकेट ने जीसैट-29 उपग्रह को भू-तुल्यकालिक अंतरण कक्षा (GTO) में स्थापित कर दिया।
  • कक्षा में स्थापना के पश्चात कर्नाटक के हासन स्थित इसरो की ‘मुख्य नियंत्रण सुविधा’ (MCF : Master Control Facility) ने इस उपग्रह का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया।
  • तत्पश्चात तीन चरणों में कक्षोनन्यन की प्रक्रियाओं द्वारा यह उपग्रह भू-तुल्यकालिक अंतरण कक्षा से अंतिम वृत्ताकार भूस्थिर कक्षा में स्थानांतरित कर दिया गया।
  • जीसैट-29
  • जीसैट-29 एक बहुबीम (Multibeam), बहुबैंड (Multiband) संचार उपग्रह है।
  • यह इसरो द्वारा निर्मित 33वां संचार उपग्रह है।
  • इस उपग्रह का वजन 3423 किग्रा. है।
  • इस प्रकार यह भारतीय धरती से प्रक्षेपित किया गया अब तक का सबसे वजनी उपग्रह है।
  • यह उपग्रह अपने साथ Ka/Ku बैंड के संचार ट्रांसपोंडरों को लेकर गया है, जो भारत के सुदूरवर्ती क्षेत्रों, विशेष रूप से जम्मू एवं कश्मीर तथा उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों के प्रयोक्ताओं (Users) की संचार आवश्यकताओं को पूरा करने के उद्देश्य से निर्मित किए गए हैं।
  • इसके अतिरिक्त यह उपग्रह उच्च आवृत्ति बैंडों पर प्रौद्योगिकी प्रदर्शन के लिए क्यू/वी-बैंड पेलोड, उच्च विभेदन क्षमता का कैमरा तथा एक ऑप्टिकल संचार पेलोड लेकर गया है।
  • जीसैट-29 उपग्रह की मिशन अवधि 10 वर्ष है।
  • निष्कर्ष

सद्यः मिशन जीएसएलवी मार्क-III कार्यक्रम की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण था। इस प्रक्षेपण के सफलतापूर्वक संपन्न होने के साथ ही जीएसएलवी मार्क-III प्रक्षेपण यान का विकासात्मक चरण (Developmental Phase) पूरा हो गया है। दो सफल विकासात्मक उड़ानों के पश्चात अब जीएसएलवी मार्क-III रॉकेट क्रियाशील (Operational) घोषित कर दिया गया है और यह PSLV तथा GSLV मार्क-II जैसे वर्तमान में परिचालित रॉकेटों की श्रेणी में सम्मिलित हो गया है। जीएसएलवी मार्क-III का पहला परिचालन मिशन (Operational Mission) वर्ष 2019 के पूर्वार्द्ध में प्रस्तावित है, जब इस रॉकेट द्वारा चंद्रयान-II मिशन का प्रक्षेपण किया जाएगा।

लेखक-सौरभ मेहरोत्रा