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जीईएम : राष्ट्रीय मिशन का शुभारंभ

GEM: Launch of National Mission
  • जीईएम क्या है?
  • जीईएम, गवर्नमेंट ई मार्केट (Government e Market) का संक्षिप्त रूप है।
  • सरकारी ई बाजार (जीईएम), सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और एजेंसियों द्वारा माल एवं सेवाओं की खरीद को सुविधाजनक बनाने के लिए एक ऑनलाइन बाजार है।
  • जीईएम के माध्यम से सभी केंद्रीय सरकारी विभागों, राज्य सरकारों, सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों और संबद्ध निकायों के लिए वस्तु एवं सेवाओं की खरीद की जाती है।
  • 26 अगस्त, 2018 को जीईएम ने अपने गठन के दो वर्ष पूरे किए। गौरतलब है कि जीईएम का शुभारंभ 20 अगस्त, 2016 में किया गया था।
  • वर्तमान परिदृश्य
  • 5 सितंबर, 2018 को सरकारी ई-बाजार (जीईएम) पर राष्ट्रीय मिशन को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा लांच किया गया।




6 सितंबर से 15 अक्टूबर, 2018 के मध्य आयोजित होने वाले छः सप्ताह के विशेष अभियान के दौरान विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा संबंधित राज्य मुख्यालयों पर इस मिशन का शुभारंभ किया जाएगा।

  • छः सप्ताह के इस विशेष अभियान के दौरान महत्वपूर्ण क्षेत्रों और फ्लैगशिप कार्यक्रमों यथा- क्रेताओं और विक्रेताओं हेतु जीईएम के प्रयोग के प्रशिक्षण के साथ ही ‘‘आईसी कैम्पेन’’ का शुभारंभ, सरकारी एजेंसियों के बोर्ड पर क्रेता पंजीकरण कार्यक्रम और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग का विशेष ध्यान रखते हुए विक्रेता पंजीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।
  • उद्देश्य
  • सरकारी ई-बाजार (जीईएम) पर राष्ट्रीय मिशन आरंभ करने का उद्देश्य सार्वजनिक खरीद में समावेश, पारदर्शिता और दक्षता के साथ नकद रहित, संपर्क रहित और पेपरलेस लेन-देन को बढ़ावा देना है।
  • पृष्ठभूमि
  • सरकारी ई-बाजार (जीईएम) ने अपने गठन के दो वर्षों में मूल्य के संदर्भ में 10,800 करोड़ और संख्या के आधार पर 6.96 लाख कारोबारी लेन-देन संपन्न किए।




  • विगत दो वर्षों के दौरान, जीईएम प्लेटफॉर्म पर 1.35 लाख विक्रेता अपने 4.43 लाख उत्पादों के साथ उपस्थित रहे, जबकि 26,500 संगठन खरीददारों के रूप में रहे।
  • यद्यपि सभी राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेश जीईएम के माध्यम से खरीददारी करते हैं, परंतु 25 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों ने अपने सरकारी विभागों के लिए इस खरीददारी को अनिवार्य बनाने वाले समझौते पर हस्ताक्षर किया है।
  • गौरतलब है कि जीईएम प्लेटफॉर्म के प्रयोग के कारण सरकारी खरीद लागत में 25 प्रतिशत तक की कमी आई है।

लेखक-धीरेन्द्र त्रिपाठी