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चिल्का झील इरावदी डॉल्फिन का आवास

  • वर्तमान परिदृश्य
  • 27 फरवरी, 2018 को विश्व स्तर पर इरावदी डॉल्फिन का सबसे बड़ा आवास स्थल चिल्का झील को घोषित किया गया।
  • महत्वपूर्ण तथ्य
  • इसकी घोषणा चिल्का विकास प्राधिकरण (सीडीए) द्वारा की गई।
  • यह घोषणा चिल्का विकास प्राधिकरण द्वारा शुरू की गई पहली बार झील की ‘वार्षिक निगरानी’ (Annual Monitoring) रिपोर्ट पर आधारित है।
  • इस ‘वार्षिक निगरानी’ का आयोजन समुद्री स्तनधारियों की संख्या की गणना तथा ‘कलम संस्कृति’ (Pen Culture) को हटाने से उसके जलीय प्रभावों (Hydrological-Impacts) को कम करने के अध्ययन करने के लिए किया गया।
  • यहां पर 155 इरावदी डॉल्फिन पाए गए हैं।
  • इनकी संख्या पिछले वर्ष की इरावदी डॉल्फिन की तुलना में यह संख्या अधिक है।
  • चिल्का झील के रंभा क्षेत्र में तीन दशकों के बाद इरावदी डॉल्फिन को देखा गया।
  • चिल्का विकास प्राधिकरण (सीडीए) प्रमुख सुसांता नंदा है।
  • इरावदी डॉल्फिन के मुख्य तथ्य
  • इरावदी डॉल्फिन एक स्तनपायी जलीय जीव है।
  • यह दृष्टिहीन होती है।
  • इसका नामकरण म्यांमार की इरावदी नदी के नाम पर किया गया है।
  • इसकी संख्या सबसे अधिक बांग्लादेश में है।
  • यह भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव है।
  • यह स्तनधारी पवित्र गंगा की शुद्धता के लिए जाना जाता है।
  • डॉल्फिन को 5 अक्टूबर, 2009 को भारत का ‘राष्ट्रीय जलीय जीव’ घोषित किया गया।
  • यह भारत का अति संकटापन्न जीव है और इसे वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम में शामिल किया गया है।
  • डॉल्फिन को स्थानीय भाषा में सूंस कहा जाता है।

लेखक-रमेश चंद्र