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चाबहार बंदरगाह के प्रथम चरण का उद्घाटन

January 11th, 2018
Inauguration of the first phase of Chabahar port

स्वतंत्र भारत एवं ईरान के मध्य राजनयिक संबंधों की स्थापना 15 मार्च, 1950 को हुई थी। भारत एवं ईरान के मध्य अप्रैल, 2001 में तेहरान घोषणा-पत्र और जनवरी, 2003 में नई दिल्ली घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए गए थे। मई, 2016 में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईरान यात्रा के दौरान 12 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए थे। इन समझौतों में चाबहार बंदरगाह के विकास एवं संचालन का समझौता भी शामिल था। हाल ही में चाबहार बंदरगाह के प्रथम चरण का उद्घाटन किया गया।

  • 3 दिसंबर, 2017 को ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहानी ने ‘शाहिद बेहेश्ती (Shahid Beheshti) बंदरगाह’ (चाबहार बंदरगाह) के प्रथम चरण का उद्घाटन किया।
  • यह बंदरगाह फारस की खाड़ी में ईरान के दक्षिण-पूर्वी सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित है।
  • 340 मिलियन डॉलर की परियोजना का निर्माण सरकारी निर्माण परियोजनाओं के ईरान के सबसे बड़े कॉन्ट्रैक्टर ‘खतम -अल-अनबिया’ (Khatam-al-Anbia) द्वारा किया गया है।
  • इससे बंदरगाह की क्षमता 2.5 मिलियन टन कार्गो से बढ़कर 8.5 मिलियन कार्गो की हो गई।
  • भारत द्वारा 500 मिलियन डॉलर के निवेश से चाबहार बंदरगाह का विकास किया जा रहा है।
  • साथ ही 1.6 बिलियन डॉलर की लागत से चाबहार से जाहेदान तक एवं अफगानिस्तान तक 650 किमी. रेल लिंक का निर्माण किया जा रहा है।
  • 23 मई, 2016 को भारतीय संयुक्त उद्यम इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड और ईरान के आर्य बनादर के मध्य चाबहार बंदरगाह के विकास एवं संचालन के लिए एक वाणिज्यिक समझौते पर भारत के प्रधानमंत्री की तेहरान यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए गए थे।
  • इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट और कांडला पोर्ट ट्रस्ट का एक संयुक्त उद्यम है।
  • यह समझौता 10 वर्षों की अवधि के लिए है।
  • समझौते के अनुसार, भारत द्वारा 5 मई, 2015 को भारत एवं ईरान के मध्य हस्ताक्षरित अंतर्सरकारी समझौता-ज्ञापन के तहत सहमत विनिर्देशों के अनुसार, चाबहार बंदरगाह पर दो टर्मिनल (पांच बर्थ) का निर्माण किया जाएगा।
  • समझौता-ज्ञापन में एक बहुउद्देश्यीय कार्गो टर्मिनल (लंबाई 600 मीटर) और एक कंटेनर टर्मिनल (लंबाई 640 मीटर) के निर्माण की परिकल्पना की गई है।
  • चाबहार बंदरगाह विकास में भागीदारी से भारत को अफगानिस्तान में एक वैकल्पिक एवं विश्वसनीय पहुंच मार्ग मिलेगा।
  • अफगानिस्तान में भारत द्वारा ‘जेरंग-देलाराम सड़क’ का निर्माण किया गया है।
  • साथ ही मध्य एशियाई क्षेत्र में एक विश्वसनीय एवं अधिक सीधा समुद्र-सड़क पहुंच मार्ग प्राप्त होगा।
  • चाबहार बंदरगाह को पाकिस्तान में चीन द्वारा निर्मित ग्वादर बंदरगाह के प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखा जा रहा है।
  • साथ ही चाबहार बंदरगाह को ‘अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा’ (INSTC) के लिए फीडर (Feeder) बंदरगाह के रूप में भी देखा जा रहा है।
  • अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा में भारत, रूस, ईरान, यूरोप और मध्य एशिया के मध्य समुद्र, रेल एवं सड़क मार्ग शामिल हैं।
  • चाबहार बंदरगाह के विकास समेत अवसंरचना एवं क्षेत्रीय संपर्क के विकास के क्षेत्र में भारत-ईरान सहयोग, तेहरान घोषणा-पत्र (2001) और नई दिल्ली घोषणा-पत्र (2003) के अनुरूप है।

लेखक-नीरज ओझा

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