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ग्रीन पीस रिपोर्ट

  • वर्तमान परिदृश्य
  • 29 जनवरी, 2018 को ग्रीन पीस इंडिया द्वारा ‘एयरपोकैलिप्स द्वितीय : भारतीय शहरों में वायु प्रदूषण का आकलन’ (AIRPOCALYPSE II : Assessment of air pollution in indian cities) नामक रिपोर्ट जारी की गई।
  • महत्वपूर्ण तथ्य
  • ग्रीन पीस की उक्त रिपोर्ट में 280 भारतीय शहरों में वायु प्रदूषण का आकलन किया गया है।
  • रिपोर्ट में वर्ष 2016 एवं वर्ष 2015 के आंकड़ों को शामिल किया गया है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, 228 भारतीय शहर राष्ट्रीय परिवेशीय वायु गुणवत्ता मानक (Naaqs) के तहत केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Cpcb) द्वारा निर्धारित 60 g/m3 के वार्षिक अनुमन्य संकेंद्रण का पालन नहीं करते हैं।
  • कोई भारतीय शहर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित 20 g/m3 के मानक का पालन नहीं करता।
  • रिपोर्ट में शामिल 630 मिलियन भारतीयों में से 550 मिलियन भारतीय ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं जहां Pm 10 (Particulate Matter) की मात्रा राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित मात्रा में अधिक है।
  • 180 मिलियन भारतीय ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं जहां वायु प्रदूषण का स्तर निर्धारित मानक का दोगुना है।
  • 5 वर्ष से कम आयु के 47 मिलियन बच्चे ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं जहां प्रदूषण की मात्रा मानक से अधिक है जबकि 17 मिलियन बच्चे ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं जहां प्रदूषण का स्तर निर्धारित मानक का दोगुना है।
  • इसके अतिरिक्त 5 वर्ष से कम आयु के 59 मिलियन बच्चों समेत 580 मिलियन भारतीय ऐसे जिलों में रहते हैं जहां वायु गुणवत्ता आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली भारत का सर्वाधिक प्रदूषित शहर है जिसके बाद फरीदाबाद, भिवाड़ी, देहरादून, वाराणसी और पटना का स्थान है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद एवं वाराणसी में वार्षिक Pm10 स्तर उच्चतम था।

लेखक-नीरज ओझा