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गेहूं : जीनोम डिकोड

  • वर्तमान संदर्भ
  • 16 अगस्त, 2018 को अंतरराष्ट्रीय गेहूं जीनोम अनुक्रमण कन्सोर्टियम (IWGSC) द्वारा अंतरराष्ट्रीय पत्रिका ‘साइंस’ में एक लेख द्वारा गेहूं के जीनोम के विषय में विस्तृत विवरण प्रदान किया।
  • पृष्ठभूमि
  • गेहूं (ट्रिटिकम एस्टिवम), धरती पर उगायी जाने वाली प्रमुख फसलों में से एक है, जो मनुष्य द्वारा खपत की जाने वाली कुल कैलोरी के 20 प्रतिशत का योगदान करती है।
  • वर्ष 2050 तक 9.6 बिलियन की अनुमानित विश्व जनसंख्या की भविष्य की मांगों को पूरा करने के लिए गेहूं उत्पादकता में 1.6 प्रतिशत की वृद्धि की आवश्यकता है।
  • जैव विविधता, जल एवं पोषक संसाधनों को संरक्षित करने के लिए, इस वृद्धि का अधिकांश भाग खेती के लिए नई जमीन ढूंढने के बजाए वर्तमान में खेती की जाने वाली भूमि पर फसल किस्म एवं विशिष्टता सुधार के माध्यम से हासिल किया जाना है।




  • जीनोम अनुक्रमण
  • गेहूं जीनोम को अनुक्रमित करने का कार्य इसके विशाल आकार के कारण कृषि-वैज्ञानिकों द्वारा एक जटिल कार्य माना जाता रहा है। यह मानव जीनोम से पांच गुना बड़ा तथा चावल के जीनोम से 40 गुना बड़ा तथा जटिल है।
  • गेहूं जीनोम का विशाल आकार इसकी संरचना को जटिल बना देता है। इसमें 21 गुणसूत्र (अनुवांशिक सूचनाएं ले जाने वाली थ्रेड जैसी संरचनाएं) शामिल हैं, जो तीन अत्यधिक समान उप-जीनोम से उत्पन्न होती हैं।
  • 17,000 मिलियन आधार जोड़े वाले बड़े आकार के जीनोम तथा एक जैसे तीन जोड़े क्रोमोसोम होने के कारण गेहूं के जीनोम को डिकोड करना अत्यंत जटिल कार्य था।
  • हाल की प्रौद्योगिकीय उन्नति तथा गेहूं की किस्म ‘चाइनीज स्प्रिंग’ में विशिष्ट आनुवांशिक स्टॉक की उपलब्धता से अनुक्रमण के लिए गेहूं क्रोमोसोम को अलग करना संभव हो पाया।




  • गेहूं जीनोम अनुक्रमण में अंतरराष्ट्रीय कन्सोर्टियम द्वारा भौतिक मैपिंग विधियों तथा डी.एन.ए. अनुक्रमण तकनीकों का उपयोग किया गया।
  • विशाल जटिल षटगुणित (Hexaploid) गेहूं जीनोम के क्रोमोसोम आधारित ड्राफ्ट अनुक्रमण से इसकी संरचना, संगठन एवं विकास के बारे में एक नई अंतर्दृष्टि प्राप्त हुई है।
  • डिकोडिंग का महत्व
  • क्रोमोसोम आधारित संपूर्ण अनुक्रमण के पश्चात गेहूं प्रजनक अपने प्रजनक कार्यक्रमों में तीव्रता ला सकेंगे।
  • इससे यह जानने में सुविधा होगी कि उत्पादन, खाद्यान्न-गुणवत्ता, रोग एवं कीट प्रतिरोधकता, सूखा, ताप एवं लवण तनाव सहिष्णुता आदि जटिल गुणों को जीन कैसे नियंत्रित करते हैं।
  • बदलते पर्यावरण में बढ़ती वैश्विक जनसंख्या की मांग को पूरा करने के लिए तीव्रता से श्रेष्ठ गेहूं किस्मों का उत्पादन किया जा सकेगा।
  • इस ड्राफ्ट अनुक्रमण की सहायता से गेहूं जीनोम के इतिहास, उद्भव एवं दाने के विकास एवं रोग प्रतिरोधकता के लिए उत्तरदायी जीन के विषय में नई जानकारियां उपलब्ध हो सकेंगी।
  • जीनोम डिकोडिंग में भारत का योगदान




  • इस शोध कार्य में 20 देशों के 73 शोध संस्थानों से 200 से अधिक वैज्ञानिकों ने अपनी भागीदारी सुनिश्चित की।
  • डॉ. कुलदीप सिंह (पंजाब कृषि वि.वि. लुधियाना) के नेतृत्व में 18 भारतीय वैज्ञानिकों के दल ने इस शोध कार्य में हिस्सा लिया तथा गेहूं जीनोम के क्रोमोसोम 2A के डिकोडिंग में योगदान दिया। यह परियोजना आर्थिक रूप से जैव-प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार द्वारा समर्थित है।
  • आई.डब्ल्यू.जी.एस.सी.
  • अंतरराष्ट्रीय गेहूं जीनोम अनुक्रमण कन्सोर्टियम (IWGSC), अमेरिका का एक गैर-लाभकारी संगठन है, जो 68 देशों में 2400 सदस्यों के साथ गेहूं उत्पादकों, कृषि-वैज्ञानिकों तथा सार्वजनिक एवं निजी प्रजनकों के एक समूह द्वारा स्थापित अंतरराष्ट्रीय सहयोगी संघ है।
  • इसका लक्ष्य गेहूं के उच्च गुणवत्ता वाले जीनोम अनुक्रम को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराने के लिए एक बुनियादी शोध की नींव रखना है, जिससे प्रजनकों को बेहतर किस्में विकसित करने में सक्षम बनाया जा सके।
  • प्रमुख तथ्य
  • विश्व के सर्वाधिक क्षेत्रफल (215 मि. हे.) पर गेहूं का उत्पादन होता है।
  • वर्तमान में विश्व का वार्षिक गेहूं उत्पादन लगभग 700 मिलियन टन है।
  • उत्पादन की दृष्टि से मक्का एवं धान के पश्चात विश्व में गेहूं का तीसरा स्थान है।
  • मानव आहार में यह शाकीय प्रोटीन का अग्रणी स्रोत है।
  • ध्यातव्य है कि इसमें मक्का एवं धान से ज्यादा प्रोटीन पाया जाता है।

लेखक-राजन शुक्ला