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खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य; वर्ष 2018-19

Minimum Support Price of Kharif crops; Year 2018-19
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • सरकार द्वारा किसानों की आय को जबरदस्त प्रोत्साहन देते हुए वर्ष 2018-19 के लिए सभी खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में भारी वृद्धि को मंजूरी प्रदान की गई है। सरकार द्वारा यह भारी वृद्धि ऐतिहासिक है क्योंकि यह केंद्रीय बजट 2018-19 में घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य को उत्पादन लागत के मुकाबले कम-से-कम 150 प्रतिशत रखने के पूर्व निर्धारित सिद्धांत के वादे को पूरा करता है।
  • कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) द्वारा खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की सिफारिश भी काफी हद तक घोषित सिद्धांत के अनुरूप है, जिसकी घोषणा सरकार द्वारा 4 जुलाई, 2018 को की गई।
  • घोषित खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य निम्न हैं-
फसलेंवर्ष 2017-18 के लिए एमएसपीवर्ष 2018-19  के लिए एमएसपीवृद्धिलागत के मुकाबले प्रतिफल (Return) प्रतिशत में
शुद्धप्रतिशतताएं
धान (सामान्य)1550175020012.950.09
धान (ग्रेड ए)1590177018011.3251.8
ज्वार (हाईब्रिड)1700243073042.9450.09
ज्वार (मालदांडी)1725245072542.0351.33
बाजरा1425195052536.8496.97
रागी1900289799752.4750.01
मक्का1425170027519.350.31
अरहर (तूअर)545056752254.1365.36
मूंग55756975140025.1150
उड़द540056002003.762.89
मूंगफली445048904409.8950
सूरजमुखी41005388128831.4250.01
सोयाबीन3050339934911.4450.01
तिल5300624994917.9150.01
नाइजर सीड (काला तिल)40505877182745.1150.01
कपास (मध्यम रेशा)40205150113028.1150.01
कपास (लंबा रेशा)43205450113026.1658.75
  • लागत के मुकाबले प्रतिफल, सभी लागत सहित जैसे मजदूरी, पशुश्रम/मशीनश्रम, भूमि का पट्टा/किराया, बीज, उर्वरक, खाद, सिंचाई लागत, अवमूल्यन एवं विविध कृषि खर्च और परिवार के सदस्यों के श्रम की लागत है।
  • पृष्ठभूमि
  • बजट 2018-19 में वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य को हासिल करने हेतु जरूरी कृषि नीति में बदलाव करने तथा बेहतर आय सृजन के जरिए किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया गया था।
  • अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
  • विगत वर्ष के मुकाबले ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’ में सर्वाधिक प्रतिशत वृद्धि (52.47%) रागी में की गई है। इसके पश्चात ज्वार हाईब्रिड में वृद्धि (42.94%) की गई है।
  • दलहन में मूंग के अलावा अरहर (तूअर) के एमएसपी (MSP) 225 रुपये की वृद्धि की गई है, जिससे लागत के मुकाबले प्रतिफल (Return) में 65.36 प्रतिशत की वृद्धि होगी।
  • इसी प्रकार उड़द के एमएसपी (MSP) में लागत के मुकाबले रिटर्न में 62.89 प्रतिशत की वृद्धि के लिए 220 रुपये/कुंतल की वृद्धि की गई है ताकि फसलों के मूल्य में अंतर को कम किया जा सके।
  • बजारे के एमएसपी (MSP) में 525 रुपये की वृद्धि किए जाने से लागत के मुकाबले रिटर्न में 96.97 प्रतिशत (सर्वाधिक) की वृद्धि हो सकेगी।
  • दलहन की खेती को बढ़ावा दिए जाने से भारत को पोषण असुरक्षा से निपटने, मृदा में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ने से उर्वरता बढ़ाने और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
  • इस प्रकार दलहन के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि करने से किसानों की प्रति एकड़ आय में वृद्धि सुनिश्चित होगी।
  • तिलहन के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि से तिलहन उत्पादन को बढ़ावा तथा निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा।
  • साथ ही तिलहन उत्पादन में वृद्धि होने से भारत सरकार को अपना आयात बिल घटाने में भी मदद मिलेगी।
  • पोषक अनाजों के न्यूनतम मूल्य वृद्धि से पोषण सुरक्षा और किसानों की आय में सुधार होगा।
  • किसानों के लिए सरकार की अन्य पहलें
  • किसानों द्वारा भुगतान की जाने वाली प्रीमियम की दरें सभी खरीफ-फसलों के लिए यह कुल बीमित राशि का 2 प्रतिशत, रबी फसलों के लिए 1.5 प्रतिशत तथा नकदी फसलों हेतु 5 प्रतिशत है।
  • मोबाइल फोन एवं रिमोट सेंसिंग जैसी स्मार्ट प्रौद्योगिकी के जरिए तत्काल आकलन एवं दावों का जल्द निपटारा कराना।
  • सरकार द्वारा संचालित मोबाइल ऐप के माध्यम से किसानों को उनके क्षेत्र में उपलब्ध बीमा कवर के बारे में पूरी जानकारी उपलब्ध कराना तथा इसके माध्यम से अधिसूचित फसलों के लिए बीमा प्रीमियम की गणना कर लेना।
  • किसानों को बेहतर मूल्य सुनिश्चित करने हेतु एक साझा ई-मार्केट प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है।
  • इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य ‘नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट’ (NAM) के तहत देश भर में इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म विकसित करना है।
  • प्रत्येक राज्य को तीन प्रमुख सुधारों यथा-इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग की अनुमति, एकल लाइसेंस की वैधता तथा बाजार में प्रवेश के लिए एकल शुल्क शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
  • मार्च, 2018 तक 16 राज्यों एवं 2 केंद्रशासित प्रदेशों में 585 बाजारों को ई-एनएएम (e-NAM) प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा चुका है।
  • किसानों को बाजार का विकल्प मुहैया कराने के लिए सरकार एक नया कानून ‘एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस एंड लाइवस्टॉक मार्केटिंग (प्रमोशन एंड फैसिलिटेशन) एक्ट, 2017’ तैयार किया गया है।
  • ‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ को ‘हर खेत को पानी’ के लिए सिंचाई कवरेज में विस्तार के उद्देश्य के साथ लागू किया गया है।
  • समर्पित ऑनलाइन इंटरफेस ई-कृषि संवाद किसानों की समस्या के लिए प्रत्यक्ष एवं प्रभावी समाधान उपलब्ध करा रहा है।
  • सरकार किसान उत्पादक संगठन भी तैयार करने के लिए भी प्रोत्साहित कर रही है।
  • बजट 2018-19 के तहत किसान उत्पादक संगठनों को अनुकूल कराधान उपलब्ध कराया गया है ताकि किसानों को इनपुट जरूरतों, कृषि सेवाओं, प्रसंस्करण एवं बिक्री परिचालन में मदद मिल सके।
  • सरकार ने दालों का एक बफर स्टॉक भी तैयार किया है और ‘मूल्य स्थिरीकरण फंड’ (PSF) के तहत दालों की घरेलू खरीददारी भी कर रही है, खासकर उपभोक्ता सुरक्षा की दृष्टि से।
  • बजट 2018-19 में संकेत दिया गया था कि केवल एमएसपी (MSP) में वृद्धि पर्याप्त नहीं है बल्कि किसानों को घोषित एमएसपी (MSP) का पूरा फायदा मिलना चाहिए।
  • महिला किसानों के लिए पुस्तिका-‘फार्म वुमेनफ्रेंडली हैंड बुक’ में विशेष प्रावधानों एवं पैकेज सहायता की जानकारी दी गई है।
  • महिला किसान कृषि विभाग की विभिन्न किसान कल्याण योजनाअों का फायदा उठा सकती हैं।
  • इन उपरोक्त उपायों के साथ सरकार ने वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है।
  • लेखक-शिवशंकर कुमार तिवारी