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कड़कनाथ मुर्गे को जी.आई. टैग

: Geographical Indication Registry
  • वर्तमान परिदृश्य
  • 30 जुलाई, 2018 को चेन्नई स्थित ‘भौगोलिक उपदर्शन रजिस्ट्री कार्यालय’ (GIR : Geographical Indication Registry), भारत सरकार द्वारा मध्य प्रदेश राज्य के कड़कनाथ मुर्गे को भौगोलिक संकेतक (G.I. Tag) प्रदान किया गया।
  • 8 फरवरी, 2012 को सहकारी सोसायटी कृषक भारती कोऑपरेटिव लिमिटेड (कृभको) के ग्रामीण विकास केंद्र, झाबुआ द्वारा मध्य प्रदेश के कड़कनाथ मुर्गे हेतु भौगोलिक संकेतक प्राप्त कराने के लिए आवेदन किया गया था।
  • कड़कनाथ मुर्गे के लिए भौगोलिक संकेतक प्राप्त करने के लिए मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के मध्य विवाद था। अंततः मध्य प्रदेश को कड़कनाथ मुर्गे के संबंध में भौगोलिक संकेतक प्राप्त हुआ।
  • कड़कनाथ मुर्गा
  • यह मुर्गा मध्य प्रदेश के झाबुआ तथा धार जिले में मुख्यतः पाया जाता है।
  • इस मुर्गे का रंग काला होता है तथा इसे स्थानीय स्तर पर कालीमासी के नाम से जाना जाता है।
  • इस मुर्गे के मांस में अन्य प्रजाति के मुर्गों की अपेक्षा कोलेस्ट्रॉल कम तथा प्रोटीन अधिक पाया जाता है। इसके अतिरिक्त यह अन्य औषधीय गुणों से भी युक्त होता है।
  • कड़कनाथ मुर्गे को भौगोलिक संकेतक खाद्य उत्पादों (Food stuffs) की श्रेणी के अंतर्गत दिया गया है।
  • अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
  • मध्य प्रदेश के अन्य उत्पादों में जिनको जी.आई. टैग प्राप्त है, उनमें प्रमुख हैं- चमड़े के खिलौने (इंदौर), घंटी, धातु के बर्तन (दंतिया व टीकमगढ़), माहेश्वर साड़ी व कपड़े।
  • ज्ञातव्य है कि पश्चिम बंगाल की दार्जिलिंग चाय ऐसा पहला उत्पाद था, जिसे जी.आई. टैग वर्ष 2004 में प्राप्त हुआ था।
  • क्या है भौगोलिक संकेतक
  • किसी विशेष वस्तु की गुणवत्ता उस वस्तु के उत्पादन के स्थान पर निर्भर करती है तथा उत्पादन स्थान के बदलने पर उसकी गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।
  • अतः किसी खास उत्पाद की गुणवत्ता को व्यक्त करने के लिए यह आवश्यक है कि ग्राहकों को उक्त वस्तु के उत्पादन की मूल जगह के बारे में बताया जाए। इसी कारण से भौगोलिक संकेतक कुछ खास किस्म के उत्पादों को प्रदान किए जाते हैं।

लेखक-अभय प्रताप सिंह