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केरल में बाढ़ : एक प्राकृतिक आपदा

September 7th, 2018
Flood in Kerala: A Natural Disaster
  • भारत में प्रत्येक वर्ष मानसून के आगमन के साथ किसी न किसी राज्य में बाढ़ का आना लगभग तय होता है। सामान्यतः बाढ़ से उत्तरी भारत के मैदानी क्षेत्र के राज्य अधिक प्रभावित होते रहे हैं। परंतु इस बार भारत के दक्षिण-पश्चिम भाग में अवस्थित तटीय राज्य केरल बाढ़ग्रस्त रहा।
  • वर्तमान संदर्भ
  • ‘ईश्वर के अपने देश’ (God’s Own Country) कहा जाने वाला केरल 8 अगस्त, 2018 से ही बाढ़ से प्रभावित है। यद्यपि अब बाढ़ का प्रकोप कम हो गया लेकिन इसने अपने चरम अवस्था में संपूर्ण केरल (कासरगोड़ को छोड़कर सभी 13 जिले) को प्रभावित किया।
  • बाढ़ से केरल में लगभग 326 लोगों की मृत्यु हुई, हजारों बेघर हुए एवं करोड़ों की संपत्ति नष्ट हुई।
  • बाढ़ की विभीषिका का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि केरल में वर्ष 1924 में आई ‘99 की महान बाढ़’ (मलयालम कैलेंडर के अनुसार 1099 ई.) के समान इसकी तुलना की गई।
  • केरल में बाढ़ के कारण
  • सामान्यतः बाढ़ तब आती है जब नदी, झील, तालाब या किसी जलाशय का जल तट से ऊपर होकर अस्थायी रूप से बहने लगता है। यह अधिक वर्षा अथवा उपयुक्त जल निकास की व्यवस्था के अभाव के कारण होता है। यद्यपि केरल के बाढ़ के पीछे भी मुख्य रूप से यही कारण उत्तरदायी है तथापि इसके मानव जनित अन्य कारण भी उत्तरदायी हैं।
  • मानसूनी वर्षा की अधिकता
  • केरल का मौसम देश के अन्य राज्यों की तुलना में अलग है। मौसम विज्ञान केंद्र के आंकड़ों के अनुसार केरल में लगभग 286 दिन वर्षा होती है एवं वार्षिक औसतन 300 सेंटीमीटर वर्षा दर्ज की जाती है।
  • परंतु इस वर्ष 1 जून से 21 अगस्त तक सामान्य से 41 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई। इससे केरल में प्रवाहित होने वाली कुल 44 नदियों में अतिशय वर्षा जल की उपलब्धता ने बाढ़ की स्थिति उत्पन्न कर दी।
  • पश्चिमी घाट का अंधाधुंध दोहन
  • केरल की वर्तमान बाढ़ के पीछे पश्चिमी घाट में संसाधनों का अविवेकपूर्ण, अवैध एवं अनियंत्रित दोहन करना भी एक महत्वपूर्ण कारण है।
  • पश्चिमी घाट एक ‘पारिस्थितिकी संवेदनशील क्षेत्र’ है। इस क्षेत्र में हुए अवैध खनन एवं निर्माण कार्य तथा वन विनाश के कारण भूस्खलन की स्थिति उत्पन्न हुई।
  • भूस्खलन के कारण वर्षा जल का मार्ग अवरुद्ध हो गया एवं बाढ़ की स्थिति बनी। ऐसी स्थिति केरल के पलक्कड़, कन्नूर, इडुक्की, कोझिकोड, वायनाड और मालापुरम जिले में अधिक थी, जो पश्चिम घाट में अवस्थित हैं।
  • गौरतलब है कि वर्ष 2010 में माधव गाडगिल की अध्यक्षता में गठित ‘पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ पैनल’ (Western Ghat Ecology Expert Panel) की रिपोर्ट में पश्चिमी घाट को संवेदनशील बताते हुए सभी अवैध खनन, निर्माण कार्य एवं वनों के विनाश को रोकने हेतु अनेक सुझाव दिया था।
  • परंतु केरल सहित अन्य राज्य सरकारों ने इन सुझावों को नजरअंदाज कर दिया, जिसका परिणाम वर्तमान बाढ़ रूपी विपदा के रूप में हमारे सामने है।
  • बाढ़ में बांधों की भूमिका
  • केरल सरकार के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में कुल 53 बांध एवं बड़े जलाशय हैं जिनका कुल क्षेत्रफल 44,289 वर्ग किमी. है। अत्यधिक वर्षा के कारण इडुक्की एवं अन्य बांधों और जलाशयों में संचित जल को बिना किसी पूर्व सूचना के छोड़ना पड़ा जिससे बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो गई।
  • साथ ही केरल बाढ़ को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान केरल सरकार ने बाढ़ के लिए तमिलनाडु सरकार द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के ‘मुल्लापेरियार बांध’ से पानी छोड़े जाने को उत्तरदायी ठहराया है। इस प्रकार बांध संचालन में समन्वय की कमी ने भी बाढ़ की स्थिति को भयावह बनाया।
  • प्राकृतिक आपदा
  • केंद्र सरकार ने केरल के बाढ़ को गंभीर प्राकृतिक आपदा घोषित किया है। वस्तुतः जब किसी आपदा को दुर्लभ या गंभीर प्रकृति का घोषित किया जाता है, तो राज्य सरकार को राष्ट्रीय स्तर पर मदद दी जाती है।
  • किसी भी अधिसूचित आपदा के दौरान बचाव और राहत खर्च को पूरा करने के लिए वित्तीय तंत्र, ‘राज्य आपदा राहत कोष’ और ‘राष्ट्रीय आपदा राहत कोष’ द्वारा संचालित होता है।
  • केरल में भी एक आपदा राहत कोष बनाया गया है। इस राशि में 75 प्रतिशत हिस्सा केंद्र का 25 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार का होगा।
  • आपदा राहत कोष में संसाधन कम होने के कारण केंद्र सरकार राष्ट्रीय आपदा आकस्मिक फंड बनाने पर विचार कर रहा है। उसमें 100 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार देगी।
  • ऑपरेशन मदद एवं अन्य बचाव कार्य
  • 9-24 अगस्त, 2018 के मध्य कोच्चि स्थित नौसेना के दक्षिणी कमांड द्वारा केरल में बाढ़ पीड़ितों की सहायता, बचाव एवं राहत कार्य के लिए ऑपरेशन मदद प्रारंभ किया गया था।
  • केंद्र सरकार द्वारा केरल की सहायता के लिए चलाए गए बचाव कार्य में 40 हेलीकॉप्टर, 31 विमान, 182 बचाव दल, रक्षा बलों के 18 चिकित्सा दल, एनडीआरएफ (NDRF) की 58 टीमों, सीएपीएफ (CAPF) की 7 कंपनियों के साथ 500 से अधिक नौकाओं और आवश्यक बचाव उपकरणों की मदद ली गई।
  • इन सभी के द्वारा बाढ़ से घिरे इलाकों से सफलतापूर्वक 60,000 लोगों को निकालकर उन्हें राहत शिविरों तक पहुंचाया गया।
  • निष्कर्ष
  • केरल के वर्तमान बाढ़ त्रासदी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर क्या कारण है कि हम बाढ़ से निपटने में सक्षम नहीं हो पा रहे हैं? यह सही है कि बाढ़ को रोक पाना संभव नहीं है, लेकिन बाढ़ से पूर्व बाढ़ का उचित प्रबंधन की तैयारी कर, जनसमुदाय को जागरूक कर, सतत् विकास की संकल्पना पर आधारित विकास कार्यों को बढ़ावा देकर एवं वैज्ञानिक प्रौद्योगिकी जैसे बाढ़ चेतावनी प्रणाली को विकसित कर इसके प्रभाव को सीमित किया जा सकता है।

लेखक-ललिंदर कुमार

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