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कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण

June 30th, 2018
Kaveri Water Management Authority
  • चर्चा में क्यों?
  • तमिलनाडु की लंबे समय से मांग व उच्चतम न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद गठित होने के कारण।
  • प्राधिकरण के गठन का उद्देश्य
  • उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार, कावेरी नदी के जल का समतामूलक वितरण सुनिश्चित करना, प्राधिकरण का उद्देश्य है।
  • संबंधित तथ्य
  • केंद्र सरकार द्वारा 1 जून, 2018 को इस प्राधिकरण का गठन किया गया।
  • इस प्राधिकरण में एक अध्यक्ष, एक सचिव व आठ सदस्य होंगे। इन आठ सदस्यों में से दो स्थायी और दो अस्थायी सदस्य केंद्र सरकार की ओर से नामित होंगे।
  • अन्य सदस्य तटीय राज्यों (कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल एवं पुडुचेरी) व भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा नामित होंगे।
  • प्राधिकरण को तकनीकी सहायता देने हेतु, कावेरी जल विनियामक समिति होगी, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय जल आयोग के मुख्य अभियंता नवीन कुमार करेंगे।
  • प्राधिकरण के अध्यक्ष एम. मसूद हुसैन होंगे।
  • उच्चतम न्यायालय ने कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण (CWDT) के फैसले के विपरीत तमिलनाडु को मिलने वाले जल में कटौती की है। बंगलुरू की जल की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, कर्नाटक को मिलने वाली जल की मात्रा में बढ़ोत्तरी की गई है।
  • उच्चतम न्यायालय के नए निर्णय के अनुसार, कावेरी नदी के जल में तमिलनाडु व कर्नाटक का हिस्सा क्रमशः 404.25 व 284.75 बिलियन क्यूबिक फीट होगा।
  • इसके अतिरिक्त केरल व पुडुचेरी को क्रमशः 30 व 7 बिलियन क्यूबिक फीट जल की प्राप्ति होगी।
  • प्रत्येक वर्ष 1 जून को कावेरी नदी के जल-स्तर का अवलोकन करने हेतु कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण व कावेरी जल विनियामक समिति की संयुक्त बैठक होगी।
  • प्राधिकरण जून से अक्टूबर महीने के बीच, प्रत्येक 10 दिन में बैठक करेगा। इन्हीं महीनों के बीच में दक्षिण भारत में क्रमशः दक्षिणी-पश्चिमी व उत्तर-पूर्वी मानसून का आगमन होता है।
  • कावेरी एक अंतर्राज्यीय नदी है। इसके तटीय राज्य कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल व पुडुचेरी हैं। इस नदी के जल के बंटवारे हेतु इन राज्यों में विवाद चल रहा है।
  • संविधान का अनुच्छेद 262 अंतर्राज्यीय नदी जल बंटवारे से संबंधित है।
  • गौरतलब है कि फरवरी, 2018 में उच्चतम न्यायालय ने अपने निर्णय में केंद्र सरकार को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के गठन हेतु दिशा-निर्देश दिया था। उच्चतम न्यायालय का यह निर्णय तमिलनाडु व कर्नाटक जल बंटवारे के विवाद की पृष्ठभूमि में आया था।

लेखक-धीरेन्द्र त्रिपाठी

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