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कपड़ा क्षेत्र में क्षमता निर्माण योजना

January 10th, 2018
Capacity building plans in the textile sector

कपड़ा मंत्रालय ने 11वीं पंचवर्षीय योजना के अंतिम दो वर्षों के दौरान पायलट प्रोजेक्ट के रूप में ‘एकीकृत कौशल विकास’ योजना को शुरू किया था। इस योजना को आगे बढ़ाते हुए 15 लाख लोगों को प्रशिक्षण देने हेतु 1900 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ 12वीं पंचवर्षीय योजना में भी जारी रखा गया। उल्लेखनीय है कि एकीकृत कौशल विकास योजना, उद्योग संबंधी प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से कप़डा उद्योग में कुशल श्रम शक्ति की बड़ी कमी को पूरा करता है। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए हाल ही में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने संगठित क्षेत्र में कताई और बुनाई को छोड़कर कपड़ा क्षेत्र की समूची मूल्य शृंखला को शामिल करते हुए एक नई कौशल विकास योजना की मंजूरी प्रदान की।

  • आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा 20 दिसंबर, 2017 को ‘कपड़ा क्षेत्र में क्षमता निर्माण योजना’ (SCBTS) को मंजूरी प्रदान की गई।
  • इस योजना को 1300 करोड़ रुपये की लागत खर्च के साथ वर्ष 2017-18 से लेकर वर्ष 2019-20 तक की अवधि के लिए स्वीकार किया गया है।
  • इस योजना में कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के सामान्य मानकों के आधार पर राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क के अनुरूप प्रशिक्षण पाठयक्रम होंगे।
  • योजना का उद्देश्य संगठित कपड़ा क्षेत्र और उससे जुड़े क्षेत्रों में रोजगार पैदा करने के संबंध में उद्योग के प्रयासों को प्रोत्साहित करने के लिए मांग आधारित, प्लेसमेंट संबंधी कौशल कार्यक्रम, कपड़ा मंत्रालय के संबंधित संगठनों के माध्यम से कौशल विकास और कौशल उन्नयन को प्रोत्साहन देना तथा देश में प्रत्येक वर्ग को आजीविका प्रदान करना है।
  • कौशल कार्यक्रम का क्रियान्वयन निम्नलिखित तरीके से किया जाएगा-
  • श्रम शक्ति की घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए कपड़ा उद्योग/इकाई द्वारा
  • कपड़ा उद्योग/इकाइयों के साथ रोजगार समझौते के तहत प्रतिष्ठित प्रशिक्षण संस्थान द्वारा और
  • कपड़ा उद्योग/इकाइयों के साथ रोजगार समझौते के संबंध में कपड़ा मंत्रालय/राज्य सरकारों के संस्थानों द्वारा क्रियान्वित किया जाएगा।
  • ‘कपड़ा क्षेत्र में क्षमता निर्माण योजना’ के तहत निम्नलिखित रणनीति अपनाई जाएगी-
  • कौशल लक्ष्य के विभिन्न स्तरों अर्थात प्रवेश स्तर के पाठ्यक्रम, कौशल उन्नयन, निरीक्षण, प्रबंधन प्रशिक्षण और प्रौद्योगिकी को अपनाने के लिए उन्नत पाठ्यक्रम सहित कौशल विकास, प्रशिक्षण, उद्यमशीलता विकास के आधार पर रणनीति अपनाई जाएगी।
  • उद्योग के साथ सलाह करके समय-समय पर कौशल की आवश्यकताओं का मूल्यांकन किया जाएगा।
  • कार्यक्रम के क्रियान्वयन के प्रत्येक पक्ष के संचालन के लिए वेब आधारित निगरानी की जाएगी।
  • हस्तकरघा, हस्तशिल्प, पटसन, रेशम इत्यादि जैसे परंपरागत क्षेत्रों की कौशल संबंधी जरूरतों पर संबंधित क्षेत्रीय उपखंडों/संगठनों के जरिए विशेष परियोजनाओं के स्वरूप पर विचार किया जाएगा।
  • इसके अतिरिक्त ‘मुद्रा’ ऋणों के प्रावधानों के जरिए उद्यमशीलता के विकास के संबंध में कौशल उन्नयन को समर्थन दिया जाएगा।
  • परिणामों की पड़ताल के लिए सफल प्रशिक्षुओं का मूल्यांकन किया जाएगा।
  • मान्यता प्राप्त मूल्यांकन एजेंसी द्वारा प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे।
  • प्रमाणित प्रशिक्षुओं में से कम-से-कम 70 प्रतिशत प्रशिक्षुओं को दिहाड़ी रोजगार वर्ग में रखा जाएगा।
  • योजना के तहत रोजगार मिलने के पश्चात उन पर अनिवार्य रूप से नजर रखी जाएगी।
  • संस्थानों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध एवं निवारण) अधिनियम, 2013 के तहत आंतरिक शिकायत समिति गठित करने संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करेंगे तभी वे इस योजना के वित्त पोषण के पात्र होंगे।
  • यह योजना देश में समाज के सभी वर्गों के लाभ के लिए लागू की जाएगी, जिसमें ग्रामीण, दूर-दराज के इलाके, वामपंथ उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र, पूर्वोत्तर तथा जम्मू-कश्मीर शामिल हैं।
  • योजना के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांगों, अल्पसंख्यकों एवं अन्य कमजोर वर्गों को वरीयता दी जाएगी।
  • उल्लेखनीय है कि 12वीं योजना के दौरान कपड़ा मंत्रालय के द्वारा क्रियान्वित कौशल विकास की तत्कालीन योजना के तहत 10 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया गया है, जिसमें 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं थीं।
  • ऐसी संभावना है कि इस योजना के तहत कपड़ा क्षेत्र से संबंधित विभिन्न वर्गों में 10 लाख लोगों का कौशल विकास होगा जिन्हें प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे।

लेखक-शिव शंकर तिवारी

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