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कंट्री रिपोर्ट ऑन टेररिज्म

Country Report on Terrorism, 2017
    • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
    • 19 सितंबर, 2018 को संयुक्त राज्य अमेरिका के विदेश विभाग द्वारा ‘कंट्री रिपोर्ट ऑन टेररिज्म, 2017’ (Country Report on Terrorism, 2017) को जारी किया गया। यह रिपोर्ट वर्ष 2017 में घटित आतंकवादी घटनाओं पर आधारित है।
    • पृष्ठभूमि
    • ‘कंट्री रिपोर्ट ऑन टेररिज्म’ एक वार्षिक रिपोर्ट है, जिसका प्रकाशन अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा किया जाता है। वर्ष 2005 में इसने पैटर्न्स ऑफ ग्लोबल टेररिज्म रिपोर्ट को प्रतिस्थापित किया, जो वर्ष 1985 से जारी हो रही थी।
    • रिपोर्ट
    • इस रिपोर्ट में भारत द्वारा जारी आतंकवाद रोधी कार्रवाई की प्रशंसा की गई है, जबकि पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूह भारत में आतंकी हमलों को जारी रखे हुए हैं।




    • वर्ष 2017 में भारतीय भू-भाग बुरी तरह से आतंकवाद से प्रभावित रहा। यह प्रभाव जम्मू एवं कश्मीर, पूर्वोत्तर के भारतीय राज्यों तथा माओवादियों के प्रभाव वाले मध्य भारत के क्षेत्र के साथ अन्य क्षेत्रों में दिखाई पड़ता है।
    • भारत द्वारा अपनी सीमाओं के भीतर आतंकवादी संगठनों के संचालन को पहचानने, बाधित करने तथा समाप्त करने के लिए निरंतर दबाव जारी रखा गया है।
    • भारतीय नेतृत्व ने घरेलू रूप से आतंकवादी हमलों को रोकने और आतंकवाद के अपराधियों को न्याय दिलाने के लिए सं. रा. अमेरिका और अन्य समान विचारधारा वाले देशों के सहयोग से संकल्प व्यक्त किया है।
    • वर्ष 2017 में भारत और अमेरिका के मध्य आतंकवाद रोधी सहयोग में वृद्धि हुई है।
    • भारत और अमेरिका ने अल-कायदा, इस्लामिक स्टेट, जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और डी. कंपनी जैसे समूहों के आतंकी धमकियों के खिलाफ सहयोग को मजबूती प्रदान की है।
    • जून, 2017 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अधिकारियों को आतंकियों के खिलाफ नए तंत्र (Mechanism) की स्थापना हेतु निर्देश दिया था।




    • दोनों देशों के मध्य पहली द्विपक्षीय प्रयोजन वार्ता बैठक दिसंबर, 2017 में आयोजित की गई थी।
    • अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा जून, 2017 में हिज्बुल मुजाहिद्दीन के नेता मोहम्मद यूसुफ शाह अथवा सलाहुद्दीन और अगस्त में हिज्बुल मुजाहिद्दीन को विदेशी आतंकी संगठन के रूप में चिह्नित किए जाने के निर्णय का भारत ने स्वागत किया।
    • वर्ष 2017 की आतंकवादी घटनाएं
    • 7 मार्च, 2017 को मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले में जाबरी रेलवे स्टेशन पर भोपाल-उज्जैन पैसेंजर में आई.एस.आई.एस. (ISIS) प्रेरित आतंकवादियों द्वारा हमला, जिसमें 10 यात्री घायल हुए थे।
    • 17 मार्च, 2017 को छत्तीसगढ़ के सुकमा में माओवादियों द्वारा 25 सुरक्षा बल के जवानों की हत्या।
    • 10 जुलाई, 2017 को जम्मू एवं कश्मीर के अनंतनाग के निकट लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों द्वारा 7 हिंदू तीर्थयात्रियों की हत्या।
    • 27 अगस्त, 2017 को जम्मू एवं कश्मीर राज्य में सुरक्षा बल के जवानों की हत्या।
    • विधान कानून प्रवर्तन और सीमा सुरक्षा
    • आतंकवाद रोधी कानूनों में भारत ने कोई विशेष बदलाव नहीं किया है।
    • भारत सरकार ने आतंकवाद से संबंधित विद्यमान विधानों जैसे गैर-कानूनी क्रिया-कलाप रोकथाम अधिनियम (UAPA), आतंकवाद के शमन पर क्षेत्रीय सहयोग सम्मेलन के लिए दक्षिण एशियाई संघ अधिनियम (1993) और विभिन्न राज्य-स्तरीय कानूनों का उपयोग किया।
    • वर्ष 2008 में मुंबई में आतंकी हमले के बाद ए.टी.एस. (ATS : Anti-Terrorism Squads) एन.आई.ए. (NIA : National Investigation Agency) तथा एन.एस.जी. (NSG : National Security Guard) जैसी संस्थाएं आतंकवाद के खिलाफ महती भूमिका निभा रही हैं।
    • आतंकवाद के वित्तपोषण का विरोध
    • भारत वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (FATF) का सदस्य है। इसके साथ ही इसी तरह के दो क्षेत्रीय निकायों यथा- यूरेशियन ग्रुप ऑन कम्बैटिंग मनी लॉन्डरिंग और एशिया/पैसिफिक ग्रुप ऑन मनी लॉन्डरिंग का भी सदस्य है।
    • भारत की वित्तीय खुफिया इकाई एग्मोंट समूह का सदस्य है।




  • अगस्त, 2016 से मई, 2017 के मध्य भारत ने 117 आतंकवाद के वित्तपोषण रोधी मामले की शुरुआत की, 83 अभियोजन पक्ष की शिकायतें दर्ज की गईं तथा 19 व्यक्तियों की गिरफ्तारी की गई।
  • अंतरराष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय सहयोग
  • भारत वैश्विक आतंकवाद रोधी मंच (GCTF) का संस्थापक सदस्य है।
  • वर्ष 2017 में भारत ने आतंकवाद के मुद्दे को प्रकाश में लाने के लिए संयुक्त राष्ट्र के साथ-साथ विभिन्न मंचों का प्रयोग किया।
  • ब्रिक्स सम्मेलन, 2017; शंघाई सहयोग संगठन; शिखर सम्मेलन, 2017; 15वां आसियान-भारत सम्मेलन आदि मंचों का उपयोग भारत ने आतंकवाद के खिलाफ माहौल बनाने के लिए किया।
  • भारत ने 5 लाख डॉलर की सहायता फिलीपींस को प्रदान की जिससे कि आई.एस.आई.एस. और फिलीपींस सेना के मध्य हुए संघर्ष से प्रभावित मरावी के लोगों को पुनः स्थापित किया जा सके।

लेखक-कालीशंकर