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एक्सपीरिएंसिंग नार्थ-ईस्ट

Experience North-East
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 27-31 अक्टूबर, 2018 के मध्य इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (आईआईसी), नई दिल्ली में ‘पूर्वोत्तर का अनुभव’ (एक्सपीरिएंसिंग नार्थ-ईस्ट) पर्व का आयोजन किया गया।
  • इसके माध्यम से पूर्वोत्तर भारत की क्षमताओं और उसकी कला, हस्तशिल्प, हथकरघा, पर्यटन, खान-पान, संस्कृति आदि का प्रदर्शन किया गया।
  • गंतव्य पूर्वोत्तर शृंखला के तहत हो रहे इस उत्सव का आयोजन पूर्वोत्तर परिषद (एनईसी), पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (डीओएनईआर) द्वारा इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के साथ मिलकर किया गया
  • गंतव्य पूर्वोत्तर
  • ध्यातव्य है कि गंतव्य पूर्वोत्तर शृंखला की शुरुआत वर्ष 2016 में नई-दिल्ली से हुई थी।
  • इसका उद्देश्य एक ही जगह पर पूर्वोत्तर की विविधतापूर्ण संस्कृति और विरासत का प्रदर्शन करना है।
  • पूर्वोत्तर भारत
  • पूर्वोत्तर भारत सांस्कृतिक दृष्टि से भारत के अन्य राज्यों से कुछ भिन्न है। भाषा की दृष्टि से यह क्षेत्र तिब्बती-बर्मी भाषाओं के अधिक प्रचलन के कारण अलग से पहचाना जाता है।
  • इस क्षेत्र में वह दृढ़ जातीय संस्कृति व्याप्त है, जो संस्कृतिकरण के प्रभाव से बची रह गई थी। इसमें विशिष्ट श्रेणी के मान्यता प्राप्त आठ राज्य (अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा) हैं।
  • पूर्वोत्तर क्षेत्र (एनईआर) के लिए 10 प्रतिशत जीबीएस
  • केंद्र सरकार के 52 मंत्रालयों का वार्षिक बजट का 10 प्रतिशत एनईआर में खर्च करने के लिए वर्ष 1998-99 से प्रतिवर्ष अलग रखा जाता है। यद्यपि एनईआर में भारत के कुल भू-भाग का 7.9 प्रतिशत (3287263 वर्ग किमी. में से 262179 वर्ग किमी.) और 2011 की जनगणना के अनुसार इसकी कुल आबादी का 3.76 प्रतिशत (121 करोड़ में से 4.55 करोड़) है।
  • बजट 2018-19 में केंद्र सरकार ने उत्तर-पूर्व के उड्डयन ढांचे (Aviation Infrastructure) हेतु 1,014.09 करोड़ रु. आवंटित किया था।
  • यह राशि वर्ष 2017-18 के संशोधित अनुमान 200.11 करोड़ रु. से लगभग पांच गुना अधिक है।
  • जबकि पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (DONER) हेतु 3,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, जो कि पिछले बजट (2017-18) में आवंटित राशि से 11.8 प्रतिशत अधिक है।