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एंटी पायरेसी (समुद्री डकैती) मेरीटाइम बिल

September 29th, 2018
Anti piracy (piracy) maritime bill
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 1 अगस्त, 2018 को वंफ्रेद्रीय मंत्रिमंडल ने समुद्री डकैती से संबंधित अपराध के संबंध में एंटी पायरेसी मेरीटाइम बिल को मंजूरी प्रदान की है।
  • उद्देश्य
  • इस बिल का उद्देश्य भारतीय समुद्री व्यापार व चालक दल के सदस्यों को सुरक्षा प्रदान करना है, साथ ही साथ समुद्री डकैती के संबंध में अभियोजन को एक मजबूत कानूनी ढांचा प्रदान करना जिससे अपराध को सिद्ध किया जा सके।
  • ध्यातव्य है कि भारतीय दंड संहिता में समुद्री डकैती को ‘दंड’ (Crime) के रूप में सम्मिलित नहीं किया गया है।
  • नोट
  • मंत्रिमंडल द्वारा इस बिल को मंजूरी देने का एक अन्य उद्देश्य समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (UNCLOS-1982) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को व्यक्त करना है क्योंकि इस समुद्री कानून को भारत सरकार द्वारा वर्ष 1995 में अनुमोदित किया गया था।
  • ध्यातव्य है कि 24 अप्रैल, 2012 को तत्कालीन विदेश मामलों के मंत्री श्री एस.एम. कृष्णा द्वारा एंटी पायरेसी बिल लोक सभा में प्रस्तुत किया गया लेकिन बिल के सभी पक्षों पर विचार करने के लिए इसे विदेश मामलों की स्थायी समिति को भेज दिया गया था।
  • बिल का मुख्य प्रावधान
  • इस बिल के तहत समुद्री डकैती में संलिप्त व्यक्ति पर दंडात्मक कार्रवाई करते हुए आजीवन कारावास या मृत्युदंड देने का प्रावधान किया गया है।
  • निष्कर्ष
  • वर्तमान में समुद्री डकैती संबंधी अपराधों में लगातार वृद्धि हो रही है, जिसे भारतीय नौसेना व तटरक्षक बल द्वारा नियंत्रित किया जा रहा है, लेकिन एक स्पष्ट व कठोर कानून के अभाव में अभियोजन पक्ष द्वारा अपराध सिद्ध कर दंड दिलाना कठिन हो रहा है।
  • सदियों से समुद्री व्यापार का अंतरराष्ट्रीय व्यापार में महत्वपूर्ण स्थान रहा है और वर्तमान में हिंद महासागर की महत्ता बढ़ती जा रही है। चूंकि भारत इस क्षेत्र का महत्वपूर्ण देश है, इसलिए इस प्रकार के स्पष्ट बिल की एक विशेष आवश्यकता है।
  • भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक सकारात्मक शांतिप्रिय छवि बनाने के लिए प्रयासरत है। अतः समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के संबंध में कानून बनाना आवश्यक है।

लेखक-सचिन वर्मा

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