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उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति, 2017

January 31st, 2018
Uttar Pradesh Solar Power Policy, 2017
  • पृष्ठभूमि
  • भारत एक उष्णकटिबंधीय (Tropical) देश है, जिसमें लगभग 300 दिन सौर विकिरण प्राप्त होता है।
  • अप्रैल, 2017 तक देश में कुल स्थापित 329 गीगावॉट विद्युत क्षमता में से ग्रिड संयोजित सोलर फोटोवोल्टाइक संयंत्रों से विद्युत उत्पादन क्षमता मात्र 12.5 गीगावॉट है।
  • भारत सरकार ने वर्ष 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से 40 प्रतिशत विद्युत उत्पादन की प्रतिबद्धता व्यक्त की है, जिसके तहत वर्ष 2022 तक 100 गीगावॉट सौर ऊर्जा उत्पादन लक्षित है, जिसमें से 40 गीगावॉट सोलर रूफटॉप परियोजनाओं से प्राप्त किया जाना है।
  • उत्तर प्रदेश में सौर ऊर्जा की संभावित क्षमता 22.3 गीगावॉट है, जिसके दोहन से राज्य सरकार राज्य की ऊर्जा आवश्यकता की पूर्ति करना चाहती है।
  • इसके अतिरिक्त राज्य सरकार केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा वर्ष 2022 तक राज्य के लिए सौर ऊर्जा उत्पादन हेतु निर्धारित 10.7 गीगावॉट (इसमें 4300 मेगावॉट सोलर रूफटॉप परियोजनाओं हेतु निर्धारित) लक्ष्य को प्राप्त करना चाहती है।
  • सौर ऊर्जा नीति, 2017
  • 5 दिसंबर, 2017 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में संपन्न उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में ‘उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति, 2017’ को स्वीकृति प्रदान की गई।
  • उद्देश्य
  • राज्य में सौर ऊर्जा से विद्युत उत्पादन परियोजनाओं की स्थापना हेतु निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना और निवेश के अवसर प्रदान करना।
  • सभी को पर्यावरण के अनुकूल एवं सस्ती बिजली उपलब्ध कराने हेतु सहायता प्रदान करना।
  • राज्य में शोध एवं विकास, नवोन्मेष तथा कौशल विकास को बढ़ावा देना।
  • वर्ष 2022 तक 8 प्रतिशत के सौर नवीकरणीय खरीद बाध्यता (SRPO : Solar Renewable Purchase Obligation) लक्ष्य को प्राप्त करना।
  • संचालन अवधि
  • उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति, 2017 जारी होने की तिथि से प्रभावी होगी और पांच वर्ष की अवधि अथवा राज्य सरकार द्वारा नई नीति अधिसूचित करने की अवधि, जो भी पहले हो, तक लागू रहेगी।
  • नीति की प्रयोज्यता
  • सौर ऊर्जा नीति उत्तर प्रदेश में स्थापित निम्नलिखित सौर परियोजनाओं के लिए लागू होगी-
  1. यूटिलिटी स्केल (Utility Scale) सौर ऊर्जा परियोजनाएं
  2. सोलर रूफटॉप परियोजना
  3. ऑफ ग्रिड संयंत्र
  • नीति लक्ष्य
  • राज्य सरकार द्वारा कुल विद्युत खपत का 8 प्रतिशत सौर ऊर्जा से प्राप्त करने का प्रयास किया जाएगा।
  • उपर्युक्त की प्राप्ति हेतु वर्ष 2022 तक सौर ऊर्जा की 10700 मेगावॉट क्षमता की स्थापना लक्षित है, जिसमें 4300 मेगावॉट क्षमता रूफटॉप सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना से प्राप्त की जाएगी।
  • कार्यान्वयन योजना
  • राज्य सरकार द्वारा राज्य में बंजर भूमि का उपयोग विद्युत उत्पादन हेतु करने के उद्देश्य से एकीकृत सोलर पार्क की स्थापना को बढ़ावा दिया जाएगा।
  • सोलर पार्क न्यूनतम 100 मेगावॉट क्षमता के स्थापित किए जाएंगे।
  • सौर पार्क में स्थापित सौर परियोजनाओं से सुगमतापूर्वक विद्युत निकासी हेतु भारत सरकार की वित्तीय सहायता से ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण कराया जाएगा।
  • प्रदेश में नहरों पर वृहद सौर ऊर्जा परियोजनाओं के स्थापना की संभावना के दृष्टिगत सिंचाई विभाग द्वारा चिह्नित की गई नहरों के ऊपर सौर ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना की जाएगी।
  • सभी सार्वजनिक संस्थानों/सरकारी अथवा सहायता प्राप्त अस्पतालों, शोध संस्थानों, शैक्षिक संस्थानों आदि द्वारा ग्रिड संयोजित रूफटॉप सोलर फोटोवोल्टाइक ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।
  • निजी आवासीय क्षेत्रों में नेट मीटरिंग व्यवस्था के तहत बड़े पैमाने पर ग्रिड संयोजित रूफटॉप सोलर फोटोवोल्टिक ऊर्जा संयंत्र की स्थापना को बढ़ावा देने हेतु भारत सरकार से देय केंद्रीय वित्तीय सहायता के अतिरिक्त राज्य सरकार द्वारा 15000 रु. प्रति किलोवॉट तथा अधिकतम 30,000 रुपये प्रति उपभोक्ता अनुदान उपलब्ध होगा।
  • राज्य में सिंचाई हेतु अनुदान पर सौर स्ट्रीट लाइट, सोलर वाटर पंप जैसे ऑफ ग्रिड संयंत्रों की स्थापना को बढ़ावा दिया जाएगा।
  • नीति के अनुश्रवण एवं कार्यान्वयन में आने वाली समस्याओं और समय-समय पर उत्पन्न अंतर्विभागीय प्रकरणों के निस्तारण हेतु मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जाएगा।
  • उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण’ (UPNEDA) नीति के कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी होगी।
  • राज्य नोडल एजेंसी समस्त सौर ऊर्जा परियोजनाओं हेतु ऑनलाइन एकल विंडो क्लियरेंस प्रणाली लागू करेगी।
  • निष्कर्ष
  • उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति, 2017 के कार्यान्वयन से प्रदेश में अनवरत बढ़ती ऊर्जा की मांग की पूर्ति तो होगी ही, साथ ही स्वच्छ एवं पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा उपलब्ध होगी।

लेखक-नीरज ओझा

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