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उत्तर प्रदेश रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाई और रोजगार प्रोत्साहन नीति, 2018

September 7th, 2018
Uttar Pradesh Defense and Aerospace Units and Employment Promotion Policy, 2018
  • पृष्ठभूमि
  • फरवरी, 2018 में लखनऊ में आयोजित ‘उत्तर प्रदेश निवेशक शिखर सम्मेलन’ का शुभारंभ करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुंदेलखंड क्षेत्र में 20 हजार करोड़ रुपये के निवेश से ‘उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर’ स्थापित किए जाने की घोषणा की थी।
  • प्रस्तावित कॉरिडोर अलीगढ़, आगरा, झांसी, चित्रकूट, कानपुर एवं लखनऊ से होकर गुजरेगा।
  • कॉरिडोर के लिए, विशेष रूप से बुंदेलखंड क्षेत्र में ‘उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण’ (UPEIDA) द्वारा लगभग 3000 हेक्टेयर भूमि को चिह्नित कर क्रय किया जाना प्रस्तावित है।
  • रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर में 50 हजार करोड़ रुपये का निवेश और रोजगार के 2.5 लाख नवीन अवसरों का सृजन संभावित है।
  • इसी परिप्रेक्ष्य में 3 जुलाई, 2018 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल द्वारा ‘उ.प्र. रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाई और रोजगार प्रोत्साहन नीति, 2018’ को स्वीकृति प्रदान की गई।
  • यह नीति 16 जुलाई, 2018 को प्रख्यापित की गई, जो 5 वर्ष तक प्रभावी रहेगी।
  • नीति के उद्देश्य
  • उत्तर प्रदेश को रक्षा तथा एयरोस्पेस विनिर्माण क्षेत्र हेतु सर्वोत्तम गंतव्य के रूप में स्थापित करना।
  • रक्षा तथा एयरोस्पेस विनिर्माण क्षेत्रों के लिए निजी औद्योगिक पार्कों को प्रोत्साहन।
  • रक्षा कॉरिडोर के समानांतर रक्षा तथा एयरोस्पेस विनिर्माण संकुलों की स्थापना को प्रोत्साहन।
  • रक्षा क्षेत्र में निर्यातोन्मुख विनिर्माण आधार का विकास।
  • रक्षा तथा एयरोस्पेस विनिर्माण क्षेत्र में अनुषांगिक/सहायक उद्योग को प्रोत्साहन तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों का विकास आदि।
  • लक्ष्य
  • इस नीति का लक्ष्य आगामी 5 वर्षों की अवधि में 50 हजार करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करना है।
  • साथ ही रक्षा तथा एयरोस्पेस विनिर्माण क्षेत्र में 2.5 लाख रोजगारों का सृजन करना है।
  • परिभाषाएं
  • नीति के अनुसार मेगा, एंकर रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाइयां ऐसी विदेशी अथवा भारतीय मौलिक उपकरण निर्माता कंपनियां हैं, जो रक्षा एवं एयरोस्पेस विनिर्माण प्लेटफॉर्म को डिजाइन तथा निर्माण करती हों और उनके द्वारा 1000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया।
  • कंपनी द्वारा रक्षा मंत्रालय अथवा गृह मंत्रालय (भारत सरकार) अथवा विदेशों में उनके समकक्ष अधिकृत संस्था अथवा सिविल एयरोस्पेस निर्माता/आपूर्तिकर्ता अथवा मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल (MRO) इकाई को अपने तैयार उत्पादों के मूल्य के न्यूनतम 25 प्रतिशत की आपूर्ति की जा रही हो अथवा कंपनी के पक्ष में न्यूनतम 50 करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादों की पूर्ति के आदेश हों।
  • एंकर रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाइयां ऐसी वैश्विक अथवा भारतीय मौलिक उपकरण निर्माता कंपनियां हैं, जो रक्षा तथा एयरोस्पेस विनिर्माण प्लेटफॉर्म को डिजाइन एवं निर्माण करती हों और उनके द्वारा निम्नलिखित श्रेणियों में निवेश किया गया हो-
   निवेश क्षेत्र पात्रता का मानदंड
1.   बुंदेलखंड एवं पूर्वांचल क्षेत्र 200 करोड़ रु. से अधिक निवेश अथवा न्यूनतम 1000 प्रत्यक्ष रोजगार               सृजन।
2.   मध्यांचल एवं पश्चिमांचल

(गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद को छोड़कर)

300 करोड़ रु. से अधिक निवेश अथवा 1500 प्रत्यक्ष रोजगार सृजन

 

3.   गौतमबुद्ध नगर एवं गाजियाबाद 400 करोड़ रु. से अधिक निवेश अथवा 2000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजन
  • कंपनी द्वारा रक्षा मंत्रालय अथवा गृह मंत्रालय (भारत सरकार) अथवा विदेशों में उनके समकक्ष अधिकृत संस्था अथवा सिविल एयरोस्पेस विनिर्माता/आपूर्तिकर्ता अथवा मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल (MRO) इकाई को अपने तैयार उत्पादों के मूल्य के न्यूनतम 25 प्रतिशत की आपूर्ति की जा रही हो अथवा कंपनी के पक्ष में न्यूनतम 30 करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादों की पूर्ति के आदेश हों।
  • एक आपूर्तिकर्ता एंकर रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाई के रूप में अर्हता प्राप्त करेगा, यदि विनिर्माण के फलस्वरूप प्राप्त कारोबार का न्यूनतम 50 प्रतिशत अंश रक्षा तथा एयरोस्पेस मूल्य शृंखला में मेगा एंकर रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाई अथवा अन्य एंकर रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाई के लिए आपूर्तिकर्ता के रूप में अर्जित किया गया हो।
  • वेंडर रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाइयां ऐसी इकाइयां हैं, जो उसी संकुल में स्थित हों जिसमें एंकर इकाई कार्यरत हो और अपने अंतिम उत्पाद का न्यूनतम 40 प्रतिशत एंकर इकाई को आपूर्ति करती हों।
  • भारत सरकार द्वारा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) अधिनियम, 2006 के अंतर्गत एमएसएमई हेतु निर्धारित परिभाषा का पालन राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा।
  • रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाइयों हेतु प्रोत्साहन
  • आयातित उपकरणों एवं प्लांट व मशीनरी को लॉजिस्टिक पार्क/ट्रांसपोर्ट हब तथा हार्बर/पोर्ट से प्रदेश में स्थित उत्पादन स्थल पर ले जाने हेतु एंकर रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाइयां परिवहन लागत के 50 प्रतिशत परिवहन उपादान की पात्र होंगी, जिसकी समेकित अधिकतम सीमा 2 करोड़ रुपये होगी।
  • यह उपादान रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाइयों द्वारा उपकरणों के परिवहन पर उन परियोजनाओं हेतु लागू होगा, जिनके अनुबंध का मूल्य 50 करोड़ रुपये अथवा उससे अधिक हो और यह उपादान प्रथम वर्ष के उत्पादन के प्रारंभ की तिथि तक ही प्रदान किया जाएगा।
  • तैयार उत्पाद को प्रदेश में स्थित इकाई से लॉजिस्टिक पार्क/ट्रांसपोर्ट हब तथा हार्बर/पोर्ट तक ले जाने हेतु एंकर रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाइयां वाणिज्यिक उत्पादन के प्रारंभ की तिथि से 5 वर्ष की अवधि तक परिवहन लागत के 30 प्रतिशत परिवहन उपादान की पात्र होंगी, जिसकी प्रतिवर्ष अधिकतम सीमा 1 करोड़ रु. होगी।
  • एंकर रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाइयों द्वारा स्थापित किए गए ‘उत्प्रवाह उपचार संयंत्र’ (ETP : Effluent Treatment Plant) की लागत की 20 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति 1 करोड़ रु. की अधिकतम सीमा तक की जाएगी।
  • एंकर इकाइयों को एक ही संकुल में स्थित प्रत्येक वेंडर इकाई हेतु अधिकतम 50 लाख रु. की सीमा तक प्रथम 5 विक्रेताओं को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण लागत की 75 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति और तत्पश्चात अगले 5 वेंडर्स को 50 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति की जाएगी।
  • अनुसंधान एवं विकास और परीक्षण सुविधा हेतु सहायता
  • रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाई द्वारा रक्षा कॉरिडोर के अधिसूचित क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास अथवा परीक्षण सुविधा की स्थापना हेतु लिए गए ऋण पर प्रतिवर्ष 50 प्रतिशत की दर से 5 वर्ष हेतु ब्याज की प्रतिपूर्ति की जाएगी, जिसकी प्रति इकाई अधिकतम सीमा 2 करोड़ रुपये होगी।
  • रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाइयों द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा इकाइयों में सार्वजनिक परीक्षण तथा अनुसंधान एवं विकास सुविधाओं का उपयोग करने हेतु भुगतान किए गए प्रभार/शुल्क के 50 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति प्रति इकाई अधिकतम 5 लाख रु. प्रतिवर्ष की जाएगी।
  • इस मद में समस्त इकाइयों को देय प्रतिपूर्ति की वार्षिक अधिकतम सीमा 2 करोड़ रुपये होगी।
  • उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा रक्षा तथा एयरोस्पेस विनिर्माण में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ‘उ.प्र. स्टार्ट-अप नीति, 2017’ के अंतर्गत बनाए गए स्टार्ट-अप फंड का उपयोग किया जाएगा।
  • बाजार का विकास
  • इस नीति के अंतर्गत पात्र सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) इकाइयां अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों/मेलों में प्रतिभागिता लागत के 50 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति हेतु पात्र होंगी, जिसकी अधिकतम सीमा 5 लाख रु. प्रति प्रदर्शनी/मेला होगी।
  • यह सुविधा अधिकतम 10 एमएसएमई इकाइयों को दी जाएगी।
  • एक इकाई को यह प्रोत्साहन वर्ष में एक ही बार प्रदान किया जाएगा।
  • क्षमता विकास
  • उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा समय-समय पर शासकीय आई.टी.आई. तथा पॉलीटेक्निक विद्यालयों से विचार-विमर्श के उपरांत रक्षा तथा एयरोस्पेस क्षेत्र हेतु विशिष्ट रूप से निर्मित पाठ्यक्रम प्रारंभ करवाएं जाएंगे।
  • उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा तथा अनुसंधान एवं विकास संस्कृति को बढ़ाने हेतु रक्षा तथा एयरोस्पेस प्रशिक्षण एवं अनुसंधान में उत्कृष्टता वाले विश्वविद्यालयों (भारत एवं विदेशों में) को राज्य के विश्वविद्यालयों से शैक्षिक समझौते करने हेतु प्रोत्साहित करेगी।
  •  पेटेंट लागत/गुणवत्ता प्रमाणन
  • प्रदेश में स्थापित रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाइयों को घरेलू पेटेंट पंजीकरण के लिए पेटेंट शुल्क के 100 प्रतिशत और अंतरराष्ट्रीय पेटेंट पंजीकरण के लिए पेटेंट शुल्क के 50 प्रतिशत तक प्रतिपूर्ति की जाएगी, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति इकाई 25 लाख रुपये तक होगी।
  • इस मद में समस्त इकाइयों को देय प्रतिपूर्ति की वार्षिक अधिकतम सीमा 1 करोड़ होगी।
  • उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गुणवत्ता प्रमाणन यथा ए.एस. 9100 सीरीज, एन.ए.डी.सी.पी. प्राप्त करने हेतु इस नीति में परिभाषित एमएसएमई इकाइयों को प्रत्येक प्रमाण-पत्र के लिए प्रमाणन शुल्क का 100 प्रतिशत, प्रति इकाई अधिकतम 1 लाख रु. प्रतिवर्ष प्रतिपूर्ति की जाएगी।
  • इस मद में समस्त इकाइयों को देय प्रतिपूर्ति की अधिकतम सीमा 20 लाख रुपये प्रतिवर्ष होगी।
  • समस्त पात्र रक्षा तथा एयरोस्पेस विनिर्माण इकाइयों को ट्रेडमार्क पंजीकरण आवेदन शुल्क की पूर्णरूप से प्रतिपूर्ति की जाएगी, जो कि प्रति इकाई अधिकतम 1 लाख रु. प्रतिवर्ष होगी।
  •  इस मद में समस्त इकाइयों को देय प्रतिपूर्ति की अधिकतम सीमा 10 लाख रु. प्रतिवर्ष होगी।
  •  अन्य प्रोत्साहन
  • राज्य सरकार द्वारा रक्षा तथा एयरोस्पेस विनिर्माण इकाइयों को सभी वांछित अनुमोदन एवं स्वीकृतियां मुख्यमंत्री कार्यालय की निगरानी में सिंगल विंडो प्रणाली के माध्यम से प्रदान किए जाएंगे।
  • उत्तर प्रदेश सरकार रक्षा तथा एयरोस्पेस उद्योग को संबंधित कानूनों के अधीन लचीली रोजगार शर्तें, काम के घंटे एवं संविदीय आधार पर श्रमिकों की भर्ती हेतु अनुमति प्रदान करेगी।
  • निष्कर्ष
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उत्तर प्रदेश में रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर की स्थापना की घोषणा के संबंध में इस नीति का ध्येय राज्य में रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में निजी निवेश को आकर्षित करना है। यह नीति राज्य की औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति, 2017 के विज़न तथा उद्देश्यों को क्षेत्र-केंद्रित रूप से आगे बढ़ाते हुए राज्य की नागरिक उड्डयन नीति, 2017 और उ.प्र. सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम नीति, 2017 का अनुपूरण करती है।

लेखक-नीरज ओझा

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