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ई-फॉर्मेसी द्वारा दवाओं की बिक्री पर नया मसौदा

September 29th, 2018
New draft on the sale of drugs by e-pharmacy
  • वर्तमान संदर्भ
  • 28 अगस्त, 2018 को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा ऑनलाइन दवाओं की बिक्री करने वाली ई-फॉर्मेसी के संबंध में एक नया मसौदा (Draft) राजपत्र में अधिसूचित किया गया।
  • उद्देश्य
  • इस नए ड्राफ्ट का मुख्य उद्देश्य- ई-फॉर्मेसी के द्वारा दवाओं के ऑनलाइन ब्रिक्री का नियमन करना, मरीजों को उचित एवं मानक दवाएं उपलब्ध कराना तथा ई-फॉर्मेसी से संबंधित प्रमाणित पोर्टल तक मरीजों की पहुंच को सुलभ बनाना है।
  • क्या है ड्राफ्ट में?
  • नए ड्रॉफ्ट में ई-फॉर्मेसी को परिभाषित करते हुए बताया गया है कि ‘वेब पोर्टल या किसी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम द्वारा दवाओं की बिक्री, स्टॉक, प्रदर्शनी (Exhibit) या दवाओं के बिक्री की पेशकश करने से संबंधित व्यापार करना ‘ई-फॉर्मेसी’ के अंतर्गत आता है।
  • इस ड्राफ्ट के अनुसार, जो भी व्यक्ति ऑनलाइन फॉर्मेसी चलाना चाहते हैं, उन्हें देश की शीर्षस्थ औषधि नियामक और केंद्रीय अनुज्ञप्ति (licencing) प्राधिकरण, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (Central Drug Standard Control Organization) में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
  • ई-फॉर्मेसी के पंजीकरण की वैधता पंजीकरण जारी करने की तिथि से तीन वर्ष तक होगी तथा इसके बाद पंजीकरण का पुनर्नवीकरण कराया जा सकता है।
  • इसके अंतर्गत पंजीकरण करने वाले आवेदक को 50 हजार रुपये लाइसेंस शुल्क जमा करना होगा एवं साथ ही सूचना तकनीक अधिनियम, 2000 के नियमों का अनुपालन भी करना पड़ेगा।
  • ई-फॉर्मेसी को केवल चिकित्सक के नुस्खे (Prescription) के आधार पर ही दवाओं के बिक्री की आज्ञा होगी तथा ई-फॉर्मेसी को अपने पोर्टल पर दवाओं के नुस्खे एवं मरीज के संबंध में जानकारी/विवरण को संग्रहित रखना आवश्यक होगा।
  • ई-फॉर्मेसी को निश्चित समय के भीतर मरीजों को दवा की आपूर्ति करनी होगी एवं ‘ई-पोर्टल’ को 24/7 घंटे के लिए कॉल सेंटर उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
  • प्रतिबंध एवं दंड
  • ई-फॉर्मेसी को ‘मादक औषधि और नशीली पदार्थ अधिनियम, 1985’ (Narcotic Drugs and Psychotropic Substences Act, 1985) के अंतर्गत वर्णित मादक और नशीली दवाओं तथा अनुसूची 10 में वर्णित प्रशांतक (Tranquilisers) और दवाओं की बिक्री को प्रतिबंधित किया गया है।
  • अगर क्रेता को दवाओं के मानक के संबंध में संदेह होता है, तो वह ‘राज्य औषध नियंत्रक’ के पास शिकायत दर्ज करा सकता है एवं उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत राहत प्राप्त कर सकता है।
  • ड्राफ्ट के अनुसार, किसी भी ई-फॉर्मेसी को दवाओं का रेडियो या टेलीविजन या इंटरनेट या प्रिंट या किसी अन्य मीडिया या किसी अन्य उद्देश्य से प्रचारित करने की मनाही है।
  • यदि ‘ई-फॉर्मेसी’ कंपनियों द्वारा नियमों की अवहेलना की जाती है, तो ‘ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट, 1940’ के तहत उनके लाइसेंस को निरस्त किया जा सकता है।

लेखक-ललिन्द्र कुमार

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