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आंतरिक बैंकिंग लोकपाल योजना, 2018

Internal Banking Ombudsman Scheme, 2018
  • बैंकिंग लोकपाल भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नियुक्त वह व्यक्ति है, जो बैंकिंग सेवाओं में कतिपय कमियों के संबंध में ग्राहकों की शिकायतों का समाधान करता है। यह अर्द्ध-न्यायिक प्राधिकारी है तथा यह बैंकिंग सेवाओं से संबंधित शिकायतों एवं इस योजना में यथा निर्दिष्ट अन्य मामलों के समाधान हेतु एक सांस्थिक और विधिक ढांचा उपलब्ध कराता है। बैंकिंग लोकपाल योजना पहली बार वर्ष 1995 में लागू की गई और इसे वर्ष 2002 एवं वर्ष 2006 में संशोधित किया गया। वर्ष 2006 की नई बैंकिंग लोकपाल योजना का विस्तार और क्षेत्र वर्ष 2002 की पूर्व योजना से व्यापक है। परंतु वर्तमान परिदृश्य में बैंकिंग लोकपाल योजना को और मजबूत करने हेतु भारतीय रिजर्व बैंक ने मई, 2015 में सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों तथा चुनिंदा निजी और विदेशी बैंकों को आंतरिक लोकपाल की नियुक्ति का निर्देश दिया था। इसी दिशा में भारतीय रिजर्व बैंक ने इस व्यवस्था की समीक्षा की तथा बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35 (क) के अंतर्गत ‘आंतरिक लोकपाल योजना, 2018’ के रूप में संशोधित निर्देश जारी किए।
  • वर्तमान संदर्भ
  • 3 सितंबर, 2018 को भारतीय रिजर्व बैंक ने अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के लिए आंतरिक लोकपाल योजना, 2018 आरंभ किया।
  • इस योजना के तहत बैंकों द्वारा आंशिक रूप से या पूरी तरह से अस्वीकार की गई शिकायतों की समीक्षा करने के लिए एक स्वतंत्र प्राधिकारी के रूप में आंतरिक लोकपाल की नियुक्ति की जाएगी।
  • उद्देश्य
  • आंतरिक लोकपाल तंत्र की स्थापना का मुख्य उद्देश्य बैंकों की आंतरिक शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करना है।
  • साथ ही इस तंत्र की स्थापना से यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहकों की शिकायतों को बैंक स्तर पर ही बैंक शिकायत निवारण तंत्र के उच्चतम स्तर पर स्थापित किए गए प्राधिकरण द्वारा निपटाया जा सके।
  • इससे न केवल शिकायत निवारण हेतु ग्राहकों के लिए अन्य मंचों तक पहुंचने की आवश्यकता कम हो सके तथा साथ ही अन्य शिकायत निवारण तंत्र के पास लंबित मामलों में कमी आ सके।
  • आंतरिक लोकपाल तंत्र के कार्य संचालन पर निगरानी प्रणाली को मजबूत करने के साथ-साथ आंतरिक लोकपाल की स्वतंत्रता भी बढ़ाना।
  • कार्य क्षेत्र
  • भारत में दस से अधिक बैंकिंग शाखा (आउटलेट) वाले सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों से अपेक्षित है कि वे अपने बैंकों में आंतरिक लोकपाल नियुक्त करेंगे।
  • क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को इस प्रकार की बाध्यता से मुक्त रखा गया है।
  • योजना
  • आंतरिक लोकपाल अन्य बातों के साथ-साथ ग्राहकों की उन शिकायतों की जांच करेगा, जो बैंक की ओर से सेवा में कमी के स्वरूप में हैं और जिन्हें बैंक द्वारा आंशिक रूप से या पूरी तरह से अस्वीकार कर दिया गया है।
  • इसमें बैंकिंग लोकपाल योजना, 2006 के खंड 8 में सूचीबद्ध शिकायतों के आधार पर की गई शिकायतें भी शामिल हैं।
  • योजना के अंतर्गत बैंक आंतरिक रूप से सभी शिकायतों को पूरी तरह से निवारण के लिए संबंधित आंतरिक लोकपाल को प्रेषित करेंगे तथा इसके बाद शिकायतकर्ता को अंतिम निर्णय की सूचना देंगे।
  • इससे उन शिकायतों के संबंध में बैंकों के ग्राहकों को सीधे आंतरिक लोकपाल के पास संपर्क करने की आवश्यकता नहीं होगी।
  • यह योजना अन्य बातों के साथ-साथ आंतरिक लोकपाल की नियुक्ति/कार्यकाल, भूमिका तथा उत्तरदायित्व, प्रक्रियात्मक दिशा-निर्देश तथा निगरानी तंत्र को आच्छादित (Cover) करती है।
  • इस योजना के तहत आंतरिक लोकपाल का कार्यकाल 5 वर्ष से अधिक नहीं होगा एवं किसी व्यक्ति को इस पद पर पुनःनियुक्त नहीं किया जा सकेगा।
  • निगरानी
  • आंतरिक लोकपाल योजना, 2018 के कार्यान्वयन की निगरानी भारतीय रिजर्व बैंक के विनियामकीय निगरानी (ओवरसाइट) के अलावा बैंक के आंतरिक लेखा परीक्षा तंत्र द्वारा भी की जाएगी।

लेखक-ललिन्द्र कुमार