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प्रोजेक्ट चमन की समीक्षा

November 30th, 2017
Mahalanobis National Crop Forecast Centre
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सितंबर, 2014 में प्याज, आलू और आम जैसी बागवानी फसलों के मूल्यांकन एवं प्रबंधन के लिए भू-स्थानिक अनुप्रयोगों (Geo-Spatial Applications) का उपयोग करने हेतु एक नई परियोजना ‘चमन’ (Chaman : Coordinated Programme on Horticulture Assessment and Management Using Geo Informatics) का शुभारंभ किया गया था। परियोजना चमन का कार्यान्वयन 13.38 करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2014-2017 के मध्य तीन वर्ष की अवधि के लिए किया जा रहा है। हाल ही में परियोजना ‘चमन’ की समीक्षा की गई।

  • 16 अक्टूबर, 2017 को केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने परियोजना चमन की समीक्षा की।
  • परियोजना चमन का कार्यान्वयन ‘महालनोबिस राष्ट्रीय फसल पूर्वानुमान केंद्र’ (MNCFC : Mahalanobis National Crop Forecast Centre) द्वारा किया जा रहा है।
  • परियोजना के मार्च, 2018 में पूर्ण होने का अनुमान है।
  • चमन एक पॉयनियर परियोजना है जिसमें किसान की आय बढ़ाने और बागवानी क्षेत्र के रणनीतिक विकास के लिए ‘सुदूर संवेदन तकनीक’ (Remote Sensing Technique) का प्रयोग किया जा रहा है।
  • यह बागवानी फसलों के विश्वसनीय अनुमान तैयार करने के लिए कार्यप्रणाली प्रदान करती है।
  • परियोजना चमन के तहत चिह्नित उच्च उपयुक्तता वाले झूम (Jhum) क्षेत्रों में खेती करने से किसानों की आय में वृद्धि होगी।
  • इसके अतिरिक्त, शीतगृह जैसे फसलोपरांत अवसंरचना विकास करने से किसानों के फसलोपरांत होने वाले नुकसान में कमी होगी और आय में वृद्धि होगी।
  • फसल की गहनता, बाग पुनरुद्धार और एक्वा-हॉर्टिकल्चर (Aqua-Horticulture) जैसे भू-स्थानिक अध्ययन से किसानों को अपनी बागवानी फसलों को लाभदायक तरीके से विकसित करने में मदद मिलेगी।
  • परियोजना चमन के पूर्ण हो जाने के पश्चात सात महत्वपूर्ण बागवानी फसलों के लिए विकसित पद्धति सभी राज्यों में लागू की जाएगी।
  • सुदूर संवेदन, जीआईएस (GIS) एवं जीपीएस (GPS) उपकरण का प्रयोग प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY), प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY), मृदा स्वास्थ्य कार्ड, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) आदि के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए भी किया जा रहा है।
  • उल्लेखनीय है कि भारत का फलों एवं सब्जियों के उत्पादन में विश्व में दूसरा स्थान है।
  • विश्व में केला, आम, नींबू, पपीता और भिंडी का सबसे बड़ा उत्पादक भारत है।

लेखक-नीरज ओझा


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