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स्मार्ट ग्राम का शुभारंभ

August 2nd, 2017
Smart Village Launch
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महात्मा गांधी का वक्तव्य था कि ‘‘असली भारत तो गांवों में बसता है और जब तक गांवों का सामाजिक एवं आर्थिक विकास नहीं होगा तब तक भारत का विकास संभव नहीं है।’’ गांधीजी ने अपने सपनों के भारत में जिस दृष्टि की कल्पना की थी उसमें व्यापकता थी। ग्रामीण विकास हेतु वे जिन बुनियादी कार्यों को आवश्यक समझते थे, उनमें ग्राम स्वराज, पंचायत राज, ग्रामोद्योग, महिलाओं की शिक्षा, गांवों की सफाई, गांवों का आरोग्य और समग्र विकास आदि प्रमुख हैं। इन्होंने ‘मेरे सपनों का भारत’ में लिखा है-‘‘भारत की हर चीज मुझे आकर्षित करती है। सर्वोच्च आकांक्षाएं रखने वाले किसी व्यक्ति अपने विकास हेतु जो कुछ आवश्यक है, वह सब उसे भारत में मिल सकता है।’’ परंतु इसे विडंबना ही कहेंगे कि सभी प्रयासों के बावजूद स्वतंत्रता के 70वर्ष पश्चात भी देश के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध सुविधाओं की दृष्टि से काफी बड़ा अंतर प्रतीत होता है। इस अंतर को कम करने तथा संतुलित सामाजिक-आर्थिक विकास प्राप्त करने के उद्देश्य से वर्ष 2003 में ‘पुरा’ (PURA : Provision of Urban Amenities in Rural Areas) नामक योजना की घोषणा की थी। इस योजना की संकल्पना भूतपूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय डॉ.एस.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वारा प्रस्तुत की गई थी। यह योजना प्रायोगिक रूप से वर्ष 2004 में 3 वर्ष तक की अवधि तक कार्यान्वित की गई। प्रयोगिक चरण की समाप्ति के पश्चात इससे प्राप्त अनुभवों, मंत्रालयों/विभागों तथा अन्य स्रोतों की समीक्षाओं के आधार पर केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने एक पुनर्संरचित पुरा योजना प्रतिपादित की। सरकार ने 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान 248 करोड़ रुपये के परिव्यय से इस योजना के कार्यान्वयन की स्वीकृति प्रदान की थी। परंतु राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव के कारण पुरा योजना अपनी पूर्ण क्षमता के साथ कभी भी कार्यान्वित नहीं हो सकी।
वर्ष 2014-15 के लिए प्रस्तुत केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पुरा योजना हेतु कोई राशि आवंटित नहीं किया तथा इसके स्थान पर एक नए ‘रर्बन मिशन’ (Rurban Mission) को प्रारंभ करने की घोषणा की थी। तत्पश्चात 2 जुलाई, 2016 को स्मार्ट ग्राम कार्यक्रम की शुरुआत की गई।
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने स्मार्ट ग्राम कार्यक्रम के तहत 2 जून, 2017 को गुरुग्राम (हरियाणा) स्थित धौला गांव में ‘चालक प्रशिक्षण केंद्र एवं माध्यमिक विद्यालय’ (Driver’s Training Institute and Secondary School) की आधारशिला रखी। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में अभिव्यक्त किया कि ‘‘गांवों में न सिर्फ विकसित होने की क्षमता है बल्कि विकास को लेकर काफी उत्सुक भी हैं।’’ उनका मानना है कि हमारे देश का विकास तभी होगा। जब हमारे गांवों का विकास होगा, क्योंकि अभी भी देश की 68 प्रतिशत आबादी (Population) गांवों में रहती है। अर्थव्यवस्था के ढांचे में सुधार करके ही, हम गांवों में समृद्धि ला सकते हैं।

  • धौला गांव के अलावा राष्ट्रपति ने महेंद्रगढ़, अंबाला और पलवल में तीन नए कौशल विकास केंद्रों का उद्घाटन किया।
  • स्मार्ट ग्राम कार्यक्रम के दृष्टिगत हरियाणा सरकार के सहयोग से राष्ट्रपति भवन में हरियाणा के पांच गांवों का चयन किया गया।
  • पांच गांवों में इस कार्यक्रम की सफलता के पश्चात वर्तमान में इसे 100 गांवों तक विस्तारित किया जा चुका है।
  • ध्यातव्य है कि स्मार्ट ग्राम कार्यक्रम की शुरुआत 2 जुलाई, 2016 को हुई थी।
  • इसी कार्यक्रम (2 जून, 2017 को) में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 1000 गांवों को स्मार्ट ग्राम बनाए जाने की घोषणा की।
  • राष्ट्रपति भवन और केवीआईसी, कोनार्क एनर्जी सॉल्यूशन एवं आईएफसीओ के बीच प्रतिबद्धता पत्रों (Commitment Letters) का भी आदान-प्रदान किया गया।
  • इसी कार्यक्रम में ग्राम पंचायत धौला और राष्ट्रीय कौशल विकास निगम एवं ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन लिमिटेड के बीच समझौता-ज्ञापनों का भी आदान-प्रदान किया गया।
  • राष्ट्रपति ने अपनी अभिव्यक्ति में यह भी कहा कि स्मार्ट ग्राम कार्यक्रम की सफलता तभी संभव है, जब सरकार, निजी क्षेत्र, अकादमिक संस्थान, गैर-सरकारी संगठन (NGOs) तथा गांवों में रहने वाले लोग एक साथ मिलकर गांवों के विकास हेतु कार्य करें।
  • ध्यातव्य है कि 22 मई, 2016 को गुजरात की तत्कालीन मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने सरकार की दूसरी वर्षगांठ के अवसर पर गांधीनगर के महात्मा मंदिर में ‘स्मार्ट विलेज’ कार्यक्रम की शुरुआत की थी।
  • ध्यातव्य है कि 16 सितंबर, 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल में ‘श्यामा प्रसाद मुखर्जी रर्बन मिशन (SPRM) को स्वीकृति प्रदान की थी।
  • इस मिशन के तहत स्मार्ट ग्रामों के एक समूह के निर्माण का लक्ष्य रखा गया था।
  • इस मिशन का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को आर्थिक, सामाजिक एवं भौतिक रूप से टिकाऊ स्थलों में रूपांतरित करना है।
  • श्यामा प्रसाद मुखर्जी रर्बन मिशन के विस्तृत अध्ययन के पश्चात ही 2 जुलाई, 2016 को स्मार्ट ग्राम कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया था।
  • गांवों को स्मार्ट बनाने वाले इस मिशन हेतु पंचायत स्तर की योजनाओं के धन के उपयोग का प्रावधान रखा गया था।
  • इस योजना हेतु केंद्र सरकार प्रति-ग्राम समूह, परियोजना लागत की अधिकतम 30 प्रतिशत राशि अतिरिक्त वित्तीय सहायता के रूप में उपलब्ध कराएगी।
  • इस योजना में मैदानी क्षेत्रों के ग्राम समूहों में लगभग 25 हजार से 50 हजार तक की आबादी और पहाड़ी एवं समुद्र तटीय क्षेत्रों में 5 हजार से 15 हजार तक की आबादी को सम्मिलित करने का लक्ष्य रखा गया था।

लेखक-सुरेश कुमार पटेल


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