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संकल्प और स्ट्राइव योजनाओं को मंजूरी

November 30th, 2017
sankalp and Strives Approval Plans
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  • पृष्ठभूमि
  • 15 जुलाई, 2015 को पहले ‘विश्व युवा कौशल दिवस’ (World Youth Skills Day) के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की चार प्रमुख पहलों का शुभारंभ किया था।
  • ये पहल हैं-राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन, राष्ट्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता नीति, 2015 और कौशल ऋण योजना।
  • राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन को गति प्रदान करने के लिए बजट 2017-18 में ‘संकल्प’ (Sankalp) और ‘स्ट्राइव’ योजनाओं की घोषणा की गई थी।
  • ‘संकल्प’ और ‘स्ट्राइव’ योजनाएं
  • 11 अक्टूबर, 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने विश्व बैंक समर्थित ‘संकल्प’ (Sankalp) और ‘स्ट्राइव’ (Strive) योजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई।
  • संकल्प योजना का पूर्णरूप ‘आजीविका प्रोत्साहन हेतु कौशल अभिग्रहण और ज्ञान जागरुकता’ (SANKALP : Skills Acquisition Knowledge Awareness for Livelihood) है।
  • स्ट्राइव योजना का पूर्णरूप है ‘औद्योगिक मूल्य संवर्धन हेतु कौशल सशक्तीकरण’ (STRIVE : Skill Strengthening for Industrial Value Enhancement)।
  • संकल्प योजना के तहत 3.5 करोड़ युवाओं को बाजार प्रासंगिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
  • संकल्प योजना 4455 करोड़ रुपये की केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसमें विश्व बैंक द्वारा 3300 करोड़ रुपये की ऋण सहायता प्रदान की गई है।
  • स्ट्राइव योजना के तहत औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITIs) द्वारा प्रदत्त व्यावसायिक प्रशिक्षण की प्रासंगिकता एवं गुणवत्ता में सुधार और उद्योग समूह उपागम के माध्यम से प्रशिक्षुता कार्यक्रम के सशक्तीकरण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
  • स्ट्राइव योजना 2200 करोड़ रुपये की केंद्रीय क्षेत्र योजना है जिसमें योजना परिव्यय का आधा विश्व बैंक द्वारा ऋण सहायता के रूप में प्रदान किया गया है।
  • संकल्प और स्ट्राइव परिणाम आधारित योजनाएं हैं, जो व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण में सरकार की कार्यान्वयन रणनीति में परिवर्तन को दर्शाती है।
  • उद्देश्य
  • संकल्प एवं स्ट्राइव योजनाओं का उद्देश्य संस्थानात्मक सुधार और अल्पावधि तथा दीर्घावधि व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण में कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रमों की गुणवत्ता एवं बाजार प्रासंगिकता में सुधार करना है।
  • उक्त योजनाओं का उद्देश्य राज्य कौशल विकास मिशन (SSDM), राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC), क्षेत्रीय कौशल परिषद (SSC), औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) और राष्ट्रीय कौशल विकास एजेंसी (NSDA) आदि जैसे संस्थानों का सशक्तीकरण करके गुणवत्तापूर्ण कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान करने हेतु एक मजबूत तंत्र विकसित करना है।
  • योजनाओं का उद्देश्य घरेलू एवं समुद्रपारीय आवश्यकताओं के अनुरूप वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी कार्यबल विकसित करना है।
  • लाभ
  • संकल्प एवं स्ट्राइव योजनाओं द्वारा केंद्र एवं राज्य सरकारों की कौशल विकास योजनाओं में ‘राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन फ्रेमवर्क’ (NQAF) समेत राष्ट्रीय कौशल अर्हता फ्रेमवर्क (NCQF) के सार्वभौमीकरण का समर्थन किया जाएगा जिससे कौशल वितरण, विषय-वस्तु और प्रशिक्षण परिणाम में मानकीकरण सुनिश्चित किया जा सके।
  • उक्त योजनाओं द्वारा राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन, 2015 और इसके विभिन्न उपमिशनों को आवश्यक प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा।
  • अद्यतन स्थिति
  • विगत अनेक सरकारी योजनाएं, जैसे-व्यावसायिक प्रशिक्षण सुधार योजना (VTIP), औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITIs) के सशक्तीकरण पर केंद्रित थीं और इन योजनाओं के तहत 1600 से अधिक औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों का आधुनिकीकरण किया जा चुका है।
  • स्ट्राइव योजना द्वारा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों, व्यापारिक संघ और उद्योग समूहों को शामिल करके प्रशिक्षुता समेत समग्र प्रदर्शन सुधार हेतु औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को प्रेरित किया जाएगा।
  • राष्ट्रीय प्रत्यायन और प्रमाणन निकाय
  • काफी लंबे समय से प्रभावी प्रशासन सुनिश्चित करने, कौशल प्रशिक्षण के विनियमन और व्यावसायिक प्रशिक्षण के क्षेत्र में उद्योग के प्रयास को उत्प्रेरित करने के लिए एक राष्ट्रीय निकाय की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
  • उपर्युक्त आवश्यकता के अनुरूप संकल्प एवं स्ट्राइव योजनाओं द्वारा ‘राष्ट्रीय प्रत्यायन और प्रमाणन निकाय’ (National Bodies for Accreditation and Certification) की स्थापना की जाएगी।
  • यह निकाय अल्पावधि एवं दीर्घावधि व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण में प्रत्यायन तथा प्रमाणीकरण को विनियमित करेगा।
  • भारत में व्यावसायिक शिक्षा के इतिहास में पहली बार यह निकाय विभिन्न केंद्रीय, राज्य और निजी क्षेत्र के संस्थानों के प्रयासों को एकजुट करने में मदद करेगा जिससे गतिविधियों की पुनरावृत्ति से बचने एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण में समानता लाने से बेहतर प्रभाव उत्पन्न होगा।
  • लाखों उम्मीदवारों को रोजगार उन्मुख कौशल प्रदान करने के लिए 700 से अधिक उद्योग आधारित संस्थानों की स्थापना की जा रही है।
  • चयनित क्षेत्रों एवं भौगोलिक स्थानों में उद्योग आधारित संस्थानों की स्थापना के प्रस्ताव के चयन एवं समर्थन करने के लिए एक ‘अभिनव चुनौती निधि मॉडल’ (Innovative Challange Fund Model) को नियोजित किया गया है।
  • समुद्रपारीय नियोजन हेतु वैश्विक मानकों के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित करने के लिए 66 से अधिक ‘भारत अंतरराष्ट्रीय स्टॉलिंग (Stalling) संस्थानों’ को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
  • 30 हजार से अधिक उम्मीदवारों को आईआईएससी (IISC) में प्रशिक्षित किया जाएगा और ये उम्मीदवार ‘इंटरनेशनल अवार्डिंग बॉडीज’ (IABs : International Awarding Bodies) से प्रमाण-पत्र प्राप्त करेंगे।
  • ऑनलाइन परीक्षा, केंद्रीकृत प्रवेश, प्रणाली में दक्षता एवं पारदर्शिता में सुधार और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITIs) की उद्योग संबद्धता में सुधार करके देश भर के 500 आईटीआई को ‘मॉडल आईटीआई’ के रूप में उन्नयन की परिकल्पना की गई है।
  • राष्ट्रीय कौशल विकास और उद्यमिता नीति, 2015 में गुणवत्ता आश्वासन उपायों, जैसे-गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षकों एवं निर्धारकों के एक पूल (Pool) का निर्माण, की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है।
  • संकल्प योजना के तहत स्व-पोषणीय (Self-Sustainable) मॉडलों के साथ प्रशिक्षक एवं निर्धारक अकादमी स्थापित करने की परिकल्पना ली गई है।
  • प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में 50 से अधिक ऐसी अकादमियों की स्थापना की जानी है।
  • सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्र में कई ‘प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण हेतु संस्थान (ITOT) की स्थापना की गई है।
  • निर्धारित क्षेत्रीय एवं भौगोलिक अंतराल के आधार अतिरिक्त प्रशिक्षक अकादमियों की स्थापना की जाएगी।
  • राज्य स्तर पर संस्थानात्मक सशक्तीकरण के माध्यम से अत्यधिक विकेंद्रीकरण पर बल दिया जाएगा, जिसमें शामिल हैं राज्य कौशल विकास मिशन की स्थापना, जिला एवं राज्य स्तरीय कौशल विकास प्लान और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम का निर्माण।
  • संकल्प योजना का उद्देश्य समाज के वंचित एवं उपेक्षित वर्गों, जैसे-महिलाएं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं दिव्यांगजनों को कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर उनका समावेशन बढ़ाना है।
  • निष्कर्ष
    संकल्प एवं स्ट्राइव योजनाएं उद्योग को निरंतर कुशल कार्यबल की आपूर्ति के माध्यम से एक कौशल पारितंत्र का विकास करेंगी जिससे ‘व्यापार सुगमीकरण सूचकांक’ में भारत के स्थान में वृद्धि होगी। ये योजनाएं बेहतर बाजार संबद्धता एवं गुणवत्ता आश्वासन के माध्यम से कौशल की विक्रेयता को बढ़ाकर कौशल विकास कार्यक्रमों के मूल्यवर्धन की दिशा में भी कार्य करेंगी।

लेखक-नीरज ओझा


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