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शोधन-अक्षमता और दिवाला संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2017

November 30th, 2017
Refinement and Bankruptcy Code (Amendment) and Ordinance, 201
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उद्यमिता, ऋण उपलब्धता और सभी हितधारकों के हितों के संतुलन को प्रोत्साहित करने के लक्ष्य की पूर्ति हेतु ‘शोधन-अक्षमता और दिवाला संहिता, 2016’ विधेयक लोक सभा द्वारा 5 मई, 2016 को और राज्य सभा द्वारा 11 मई, 2016 को पारित किया गया। भारत के राष्ट्रपति द्वारा 28 मई, 2016 को उक्त विधेयक को अपनी स्वीकृति प्रदान की गई। 1 दिसंबर, 2016 को ‘शोधन-अक्षमता और दिवाला संहिता, 2016’ के प्रावधानों को भारत सरकार द्वारा अधिसूचित किया गया। उपर्युक्त संहिता में कुछ अपरिहार्य एवं आवश्यक प्रावधान करने के लिए हाल ही में ‘शोधन- अक्षमता और दिवाला संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2017’ प्रख्यापित किया गया।

  • 23 नवंबर, 2017 को भारत सरकार द्वारा ‘शोधन-अक्षमता और दिवाला संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2017’ [The Insolvency and Bankruptcy Code (Amendment) and Ordinance, 2017 ]प्रख्यापित किया गया।
  • अध्यादेश को भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा 23 नवंबर, 2017 को ही अपनी स्वीकृति प्रदान की गई।
  • अध्यादेश द्वारा ‘शोधन-अक्षमता और दिवाला संहिता, 2016’ में संशोधन किया जाएगा।
  • अध्यादेश का उद्देश्य अनैतिक (Unscrupulous), अवांछनीय (Undesirable) व्यक्तियों को संहिता के प्रावधानों का दुरुपयोग या निष्प्रभावी (Vitiating) बनाने से रोकने के लिए सुरक्षात्मक उपाय करना है।
  • अध्यादेश द्वारा ‘शोधन-अक्षमता और दिवाला संहिता, 2016’ की धारा 2, 5, 25, 30, 35 और 240 में संशोधन किया जाएगा और संहिता में नई धाराएं 29A एवं 235A सम्मिलित की जाएंगी।
  • उल्लेखनीय है कि शोधन-अक्षमता (Insolvency) एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति या कंपनियां अपने बकाया ऋण चुकाने में असमर्थ होते हैं।
  • अध्यादेश में प्रस्ताव आवेदक को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में परिभाषित किया गया है, जो शोधन-अक्षमता पेशेवर द्वारा प्रस्ताव योजना प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किए जाने के बाद प्रस्ताव योजना प्रस्तुत करता है।
  • शोधन-अक्षमता पेशेवर द्वारा केवल उन्हीं प्रस्ताव आवेदकों को योजना प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया जाएगा जो शोधन-अक्षमता पेशेवर या भारतीय शोधन अक्षमता एवं दिवालिया बोर्ड (IBBI) द्वारा निर्धारित (ऋणदाताओं की समिति द्वारा अनुमोदित) निश्चित मानदंडों को पूरा करते हैं।
  • अध्यादेश द्वारा शोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता, 2016 में किए गए एक प्रावधान के तहत कुछ व्यक्तियों को प्रस्ताव आवेदक होने और प्रस्ताव योजना प्रस्तुत करने से प्रतिबंधित किया गया है।
  • एक व्यक्ति योजना प्रस्तुत करने के लिए अयोग्य होगा, यदि-
    I. वह अपना कर्ज चुकाने में अक्षम व्यक्ति (अनुन्मोचित शोधाक्षम-Undischarged Insolvent) है,
    II. वह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा चिह्नित जान-बूझकर चूक करने वाला (Wilful Defaulter) है,
    III. उसके खाते को एक वर्ष से अधिक के लिए गैर-निष्पादक परिसंपत्ति के रूप में चिह्नित किया गया है,
    IV. वह ऐसे अपराध हेतु अभियुक्त है जिसमें दो या दो से अधिक वर्ष के कारावास का प्रावधान है,
    V. वह कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत निदेशक के रूप में अयोग्य घोषित किया गया हो,
    VI. वह प्रतिभूतियों में व्यापार करने से प्रतिबंधित किया गया हो,
    VII.वह अवमूल्यित या कपटपूर्ण लेन-देन में लिप्त हो, आदि।
  • अध्यादेश में प्रावधान किया गया है कि भारतीय शोधन-अक्षमता एवं दिवालिया बोर्ड द्वारा निर्दिष्ट किन्हीं अन्य शर्तों के अधीन ऋणदाताओं की समिति द्वारा 75 प्रतिशत बहुमत से प्रस्ताव योजना को मंजूरी प्रदान की जाएगी।
  • अध्यादेश के तहत ऋणदाताओं की समिति को अध्यादेश के प्रख्यापित होने के पहले प्रस्तुत प्रस्ताव योजना को स्वीकार किए जाने से प्रतिबंधित किया गया है।
  • अध्यादेश शोधन-अक्षमता पेशेवर को ऋणी की चल या अचल संपत्ति को प्रस्ताव आवेदक होने के अयोग्य व्यक्ति को बेचने से प्रतिबंधित करता है।
  • अध्यादेश में शामिल एक प्रावधान के अनुसार, संहिता के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को एक लाख रुपये से दो करोड़ रुपये तक का जुर्माना देना होगा।

लेखक-नीरज ओझा


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