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राष्ट्रीय मुनाफाखोरी रोधी प्राधिकरण

November 30th, 2017
National Anti-Profit Authority
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  • वस्तु एवं सेवा कर
  • 1 जुलाई, 2017 से देश में वस्तु एवं सेवा कर (GST) को लागू किया गया।
  • जीएसटी एक अप्रत्यक्ष कर है,जिसने अपने पूर्ववर्ती अधिकांश अप्रत्यक्ष करों को आच्छादित कर लिया है।
  • यह विनिर्माता से लेकर उपभोक्ता तक वस्तुओं एवं सेवाओं की आपूर्ति पर एकल कर है।
  • इसके तहत प्रत्येक चरण में केवल मूल्यवर्धन पर ही ‘कर’ लगाया जाता है।
  • दोहरे कराधान से बचाव के लिए जीएसटी के अंतर्गत इनपुट क्रेडिट (पूर्व में चुकाए जा चुके कर का क्रेडिट) का भी प्रावधान किया गया है।
  • अति आवश्यक वस्तुओं जैसे-दूध, अंडा, दही, खुले खाद्यान्न और स्वास्थ्य एवं शिक्षा सेवाएं आदि को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है।
  • शेष वस्तुओं के समूहों को उनकी उपयोगिता के अनुसार, 5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत तथा 28 प्रतिशत के कर स्लैब में रखा गया है।
  • अभी तक 81 प्रतिशत मदें 18 प्रतिशत या उससे कम कर स्लैब में थीं, जबकि 19 प्रतिशत मदें 28 प्रतिशत के कर स्लैब में थीं।
  • जीएसटी दरों में संशोधन
  • जीएसटी परिषद द्वारा की गईं सिफारिशों के अनुरूप 15 नवंबर, 2017 से 28 प्रतिशत कर स्लैब में शामिल 178 वस्तुओं पर प्रभावी जीएसटी दर घटाकर 18 प्रतिशत कर दी गई है।
  • इस प्रकार, अब केवल ऐसी 50 वस्तुएं ही शेष रह गई हैं, जिन पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगेगा।
  • कई अन्य वस्तुएं जिन पर अभी तक 18 प्रतिशत जीएसटी लगता था, उन्हें 12 प्रतिशत के कर स्लैब में स्थानांतरित कर दिया गया है।
  • मुनाफाखोरी रोधी प्राधिकरण की आवश्यकता
  • जीएसटी की दरों में होने वाली किसी कटौती या इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उत्पादों के मूल्य में कटौती के माध्यम से उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाना अपेक्षित है।
  • हालांकि कई ऐसे देश, जहां जीएसटी प्रणाली अस्तित्व में है, वहां जीएसटी लागू होने के बाद मुद्रास्फीति एवं वस्तुओं के मूल्यों में वृद्धि देखने को मिली।
  • उत्पादन चरण से अंतिम उपभोग चरण तक इनपुट टैक्स क्रेडिट की उपलब्धता के बावजूद उत्पादों के मूल्यों में कटौती के बजाय वृद्धि हुई।
  • स्पष्ट है कि इन देशों में आपूर्तिकर्ताओं द्वारा इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचाया जा रहा था और वे अवैध मुनाफाखोरी में लिप्त थे।
  • अतः जीएसटी के नाम पर उत्पादों के मूल्य में की जाने वाली मनमानी बढ़ोत्तरी से उपभोक्ताओं को संरक्षण प्रदान करने हेतु एक मुनाफाखोरी रोधी प्राधिकरण के गठन की आवश्यकता महसूस की गई।
  • वैधानिक प्रावधान
  • उल्लेखनीय है कि उपभोक्ताओं को जीएसटी दरों में कटौती तथा इनपुट टैक्स क्रेडिट के पूर्ण लाभ की प्राप्ति सुनिश्चित करने हेतु जीएसटी कानून में उल्लिखित मुनाफाखोरी रोधी उपायों द्वारा एक सांस्थानिक ढांचे (Institutional Mechanism) की व्यवस्था की गई है।
  • इस सांस्थानिक ढांचे में NAA, एक स्थायी समिति, प्रत्येक राज्य में अनुवीक्षण समितियां (Screening Committees) तथा केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBEC) के अंतर्गत ‘रक्षोपाय महानिदेशालय’ (Directorate General of Safeguards) शामिल है।
  • NAA की स्थापना को मंजूरी
  • 16 नवंबर, 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जीएसटी के अंतर्गत ‘राष्ट्रीय मुनाफाखोरी रोधी प्राधिकरण’ (NAA: National Anti-profiteering Authority) के अध्यक्ष एवं तकनीकी सदस्यों के पदों के सृजन को मंजूरी प्रदान की।
  • इस प्रकार अब इस शीर्ष निकाय की तत्काल स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
  • प्राधिकरण का स्वरूप
  • पांच सदस्यीय राष्ट्रीय मुनाफाखोरी प्राधिकरण में एक चेयरमैन तथा चार तकनीकी सदस्य शामिल होंगे।
  • इस प्राधिकरण का चेयरमैन भारत सरकार के सचिव के स्तर का अधिकारी या इसके समकक्ष किसी पद पर रह चुका वरिष्ठ अधिकारी होगा।
  • राज्य या केंद्रीय कर आयुक्त अथवा इनके समकक्ष पदों पर रह चुके अधिकारी इस प्राधिकरण के तकनीकी सदस्य के रूप में चुने जाने के योग्य होंगे।
  • चेयरमैन के कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से अगले दो वर्षों तक यह प्राधिकरण कार्यरत रहेगा तत्पश्चात इसे भंग कर दिया जाएगा।
  • जुर्माने की व्यवस्था
  • मुनाफाखोरी रोधी उपायों को लागू करने की आवश्यकता महसूस होने पर ‘राष्ट्रीय मुनाफाखोरी रोधी प्राधिकरण’ आपूर्तिकर्ता/संबंधित व्यवसाय को अपने उत्पादों/सेवाओं के मूल्य में कटौती करने या उसके द्वारा प्राप्त किए गए अनुचित लाभ को ब्याज के साथ उपभोक्ता को लौटाने का आदेश दे सकता है।
  • अगर आपूर्तिकर्ता/व्यवसाय द्वारा प्राप्त किए गए अनुचित लाभ को उपभोक्ता को लौटाया नहीं जा सकता, तो इसे उपभोक्ता कल्याण निधि में जमा कराए जाने का आदेश दिया जा सकता है।
  • गंभीर मामलों में ‘राष्ट्रीय मुनाफाखोरी रोधी प्राधिकरण’ ‘चूककर्ता व्यावसायिक प्रतिष्ठान’ (Defaulting Business Entity) पर जुर्माना लगा सकता है या जीएसटी के अंतर्गत उसका पंजीकरण भी रद्द कर सकता है।
  • निष्कर्ष
  • राष्ट्रीय मुनाफाखोरी रोधी प्राधिकरण की स्थापना उपभोक्ताओं के हितों के संरक्षण की दिशा में भारत सरकार का एक और प्रयास है।
  • इसके माध्यम से सरकार उपभोक्ताओं को आश्वस्त करना चाहती है कि वह जीएसटी के कार्यान्वयन के लाभ को उन तक पहुंचाने के लिए सभी संभव कदम उठाने हेतु पूर्णतः प्रतिबद्ध है।
  • NAA की स्थापना से जीएसटी की दरों में हाल ही में हुई कटौती का लाभ उपभोक्ताओं को प्राप्त होगा, जिसके फलस्वरूप इस व्यवस्था के प्रति उनके विश्वास में बढ़ोत्तरी होगी।

लेखक -सौरभ मेहरोत्रा


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