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राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम का पुनर्गठन

December 5th, 2017
National Rural Drinking Water Program Reorganized
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  • पृष्ठभूमि
  • राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (NRDWP : National Rural Drinking Water Programme) वर्ष 2009 में प्रारंभ किया गया था।
  • कार्यक्रम के तहत जल उपलब्धता की संवहनीयता (स्रोत) को सुनिश्चित करने पर बल दिया गया था।
  • यह कार्यक्रम केंद्रीय प्रायोजित योजना है जिसमें केंद्र एवं राज्य के मध्य 50 : 50 के अनुपात में निधि (Fund) का वहन किया जाता है।
  • कार्यक्रम का पुनर्गठन
  • 10 नवंबर, 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) द्वारा ‘राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम’ (NRDWP) के पुनर्गठन और कार्यक्रम को जारी रखने के लिए स्वीकृति प्रदान की गई।
  • इससे ग्रामीण जनसंख्या के लिए गुणवत्तापूर्ण सेवा वितरण सुनिश्चित करने हेतु योजनाओं की स्थिरता (कार्यक्षमता) पर अधिक ध्यान देने के साथ कार्यक्रम को परिणाम- आधारित, प्रतिस्पर्धी और बेहतर निगरानी की जा सकेगी।
  • कार्यक्रम के लिए वर्ष 2017-18 से वर्ष 2019-20 की अवधि हेतु 23050 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
  • कार्यक्रम के तहत पूरे देश की ग्रामीण जनसंख्या का आच्छादन किया जाएगा।
  • पुनर्गठन के पश्चात यह कार्यक्रम लोचशील, परिणाम-उन्मुख एवं प्रतिस्पर्धी होगा।
  • साथ ही इससे टिकाऊ पाइप जल आपूर्ति के आच्छादन में वृद्धि के लक्ष्य की प्राप्ति में पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय सक्षम होगा।
  • राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम 14वें वित्त आयोग के चक्र के साथ मार्च, 2020 तक जारी रहेगा।
  • कार्यक्रम के पुनर्गठन के फलस्वरूप जापानी एंसेफलाइटिस (JE : Japanese Encephalitis)/एक्यूट एंसेफलाइटिस (AES : Acute Encephalitis Syndrome) प्रभावित क्षेत्रों के लिए 2 प्रतिशत धनराशि अलग से रखी जाएगी।
  • राष्ट्रीय जल गुणवत्ता उप-मिशन
  • राष्ट्रीय जल गुणवत्ता उप-मिशन (NWQSM : National Water Quality Sub-Mission) के तहत आर्सेनिक एवं फ्लोराइड प्रभावित 28000 बस्तियों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की तत्काल आवश्यकता को पूरा किया जाएगा।
  • उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय जल गुणवत्ता (NWQSM), राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (NRDWP) का एक उप-कार्यक्रम है।
  • फरवरी, 2017 में पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय द्वारा ‘राष्ट्रीय जल गुणवत्ता उप-मिशन’ (NWQSM) का शुभारंभ किया गया था।
  • अनुमान है कि मार्च, 2021 तक उप-मिशन हेतु केंद्रीय अंश के रूप में 12500 करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी।
  • राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के तहत आवंटन से उप-मिशन का वित्तपोषण किया जा रहा है।
  • राष्ट्रीय जल गुणवत्ता उप-मिशन का उद्देश्य मार्च, 2021 तक आर्सेनिक/फ्लोराइड प्रभावित समस्त ग्रामीण जनसंख्या को स्वच्छ पेयजल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
  • अद्यतन स्थिति
  • पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय की एकीकृत प्रबंधन सूचना प्रणाली के अनुसार, भारत में लगभग 77 प्रतिशत ग्रामीण बस्तियों ने पूर्ण आच्छादन (40 लीटर जल प्रति व्यक्ति प्रतिदिन) स्तर को प्राप्त कर लिया है।
  • 56 प्रतिशत ग्रामीण जनसंख्या की पहुंच सार्वजनिक स्थान पर लगे नल (TAP) के जल तक है।
  • उपर्युक्त में से 16.7 प्रतिशत के पास घरेलू कनेक्शन है।
  • निष्कर्ष
    राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के पुनर्गठन से न केवल इस कार्यक्रम को परिणाम- उन्मुख एवं प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिलेगी बल्कि ग्रामीण जनसंख्या को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के प्रयासों को भी बल मिलेगा। साथ ही इससे पाइप के जरिए जल की आपूर्ति, जलापूर्ति सेवा के स्तर में सुधार और जल की गुणवत्ता से प्रभावित आबादी को स्वच्छ जल सुविधा के अंतर्गत लाने में मदद मिलेगी।

लेखक-नीरज ओझा


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