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मासिक पत्रिका मई,2017 पी.डी.एफ. डाउनलोड

magazine may 2017

पवित्र कुरान में एक ही बार में तीन तलाक का कोई उल्लेख नहीं है। तलाक के लिए एक बार ही तलाक कहना पर्याप्त है लेकिन जरूरी यह है कि इद्दत की अवधि पूर्ण हो। इस अवधि के अंदर पति- पत्नी से रुजु (सुलह) कर सकता है। इस प्रकार के प्रथम एवं द्वितीय तलाक के बाद सुलह की गुंजाइश है, अतः इन्हें ‘तलाक-ए-रजई’ कहा जाता है। तीसरे तलाक के बाद शौहर को रुजु का हक नहीं रहता है, अतः इसे तलाक-ए-बाइन (अलग करने वाली) कहते हैं।
कहते हैं दूसरे खलीफा हजरत उमर से कुछ महिलाओं ने यह शिकायत की कि उनके पति तलाक के इस तरीके का फायदा उठाकर बार-बार सुलह करते हैं, तब उन्होंने यह व्यवस्था दी कि एक ही बार में तीन तलाक मान लिया जाएगा। महिलाओं के सुभीते के लिए अनुमन्य प्रथा कालांतर में पुरुषों की सुविधा में तब्दील हो गई। प्रथा, कुप्रथा में इस कदर बदली की दुनिया के अनेक देशों ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया। अब भारत में भी इस पर चर्चा जोर-शोर से है।
वस्तुतः सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के पश्चात ही भारत में तीन तलाक के अंजाम का फैसला हो सकेगा। इस अंक में तीन तलाक पर आवरण आलेख प्रस्तुत किया जा रहा है जिसमें विषय से संबंधित सभी जानकारी प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में देश की दो पवित्र नदियों गंगा एवं यमुना और उनकी सहायक नदियों को जीवित एवं कानूनी व्यक्ति का दर्जा प्रदान किया है। इस फैसले से एक बार पुनः पर्यावरण के प्रति बढ़ते खतरे एवं संवेदनशीलता की ओर ध्यान आकर्षित हुआ है। इस निर्णय पर एक सामयिक आलेख इस अंक में प्रस्तुत किया गया है।
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा विकास की वास्तविकता पर लोगों के ध्यानाकर्षण हेतु प्रति वर्ष प्रकाशित मानव विकास रिपोर्ट के वर्ष 2016 के संस्करण की मुख्य बातें सामयिक आलेख ‘मानव विकास रिपोर्ट, 2016’ में प्रस्तुत हैं। स्थायी स्तंभ संदर्भ के तहत वर्षांत समीक्षा, 2016 का तीसरा भाग इस अंक में प्रस्तुत किया गया है।
इस अंक के साथ छत्तीसगढ़ पी.सी.एस. (प्रा.) परीक्षा सामान्य अध्ययन का व्याख्यात्मक हल प्रश्न-पत्र निःशुल्क प्रदान किया जा रहा है। पाठक इस अंक पर अपनी प्रतिक्रिया अवश्य भेजें।

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