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भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 2016

November 30th, 2017
Bureau of Indian Standards Act, 2016
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  • पृष्ठभूमि
  • 3 सितंबर, 1946 को लाए गए एक ज्ञापन के माध्यम से उद्योग एवं आपूर्ति विभाग द्वारा औपचारिक रूप से ‘भारतीय मानक संस्थान’ (ISI) की स्थापना की घोषणा की गई।
  • 6 जनवरी, 1947 को ‘भारतीय मानक संस्थान’ अस्तित्व में आया।
  • सामान्य उपभोक्ताओं को मानकीकरण का लाभ प्रदान करने हेतु संस्थान द्वारा ‘भारतीय मानक संस्थान (प्रमाणीकरण चिह्न) अधिनियम, 1952’ के तहत प्रमाणीकरण चिह्न योजना का परिचालन शुरू किया गया।
  • 26 नवंबर, 1986 के संसद के एक अधिनियम के माध्यम से ‘भारतीय मानक संस्थान’ के स्थान पर ‘भारतीय मानक ब्यूरो’ (BIS) 1 अप्रैल, 1987 को अस्तित्व में आया।
  • हाल ही में भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 2016 प्रभावी हुआ।
  • भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 2016
  • 12 अक्टूबर, 2017 को ‘भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 2016’ प्रभावी हुआ।
  • यह अधिनियम 22 मार्च, 2016 को अधिसूचित किया गया।
  • 7 अगस्त, 2015 को उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री रामविलास पासवान ने ‘भारतीय मानक ब्यूरो विधेयक, 2015’ को लोक सभा में प्रस्तुत किया।
  • यह विधेयक 3 दिसंबर, 2015 को लोक सभा द्वारा और 8 मार्च, 2016 को राज्य सभा द्वारा पारित किया गया।
  • 21 मार्च, 2016 को राष्ट्रपति की अनुमति पाकर यह विधेयक ‘भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 2016’ बना।
  • उद्देश्य
    भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 2016 के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं-
    1. भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) को भारत की राष्ट्रीय मानक संस्था के रूप में स्थापित करना।
    2. सामग्री एवं प्रक्रियाओं के अलावा वस्तुओं, सेवाओं और प्रणालियों को मानक तंत्र के दायरे में लाना।
    3. सरकार को स्वास्थ्य, रक्षा, पर्यावरण, भ्रामक पद्धतियों से बचाव, सुरक्षा आदि के दृष्टिकोण से आवश्यक समझी जाने वाली सामग्री, प्रक्रियाओं और सेवाओं को अनिवार्य प्रमाणन व्यवस्था के दायरे में लाने में सक्षम बनाना।
    4. किसी भी मानक के लिए अनुकूलता की स्व घोषणा (SDOC) सहित सरल अनुकूलता आकलन योजनाओं के विविध प्रकारों की अनुमति देना।
    5. सरकार को कीमती धातु सामग्री के अनिवार्य प्रमाणन को लागू करने में सक्षम बनाना।
    6. बेहतर एवं प्रभावी अनुपालन और उल्लंघन के अपराधों को दंडनीय बनाने के लिए दंड प्रावधानों को सशक्त बनाना।
    7. मानक चिह्न वाले, लेकिन भारतीय मानकों के प्रति अनुरूपता नहीं रखने वाले उत्पादों के उत्पाद उत्तरदायित्व सहित, उन्हें वापस बुलाने का प्रावधान।
    8. भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 1986 को निरसित करना।
  • प्रावधान
  • अधिनियम के माध्यम से सामान, सेवाएं एवं प्रणाली को BIS मानकीकरण में सम्मिलित किया गया है।
  • भारतीय मानक ब्यूरो को भारत के राष्ट्रीय मानक निकाय के रूप में स्थापित किया जाएगा जो सामान, सेवाओं, वस्तुओं, प्रक्रियाओं और प्रणालियों के लिए निश्चित मानकों को तैयार, लागू तथा प्रमाणित करने का कार्य करेगा।
  • मानकों को तैयार करने के लिए ब्यूरो द्वारा तकनीकी विशेषज्ञों की एक समिति का गठन किया जाएगा।
  • अधिनियम में ब्यूरो के अंतर्गत एक गवर्निंग काउंसिल के गठन का भी प्रावधान किया गया है जो सामान्य अधीक्षण, निर्देशन और प्रबंधन के लिए उत्तरदायी होगी।
  • ब्यूरो गुणवत्ता मानकों के लिए एक लाइसेंसिंग प्राधिकरण का कार्य करेगा।
  • ब्यूरो द्वारा गुणवत्ता आश्वासन बनाए रखने के लिए परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना का प्रावधान भी अधिनियम में किया गया है।
  • कीमती धातुओं जैसे-सोना, चांदी, प्लेटिनम, पैलेडियम या उनकी मिश्र धातुओं के प्रमाणन के लिए एक हॉलमार्क का प्रयोग किया जाएगा, जो कीमती धातु में भारतीय मानकानुसार अनुपात सामग्री इंगित करेगा।
  • ऐसी वस्तुएं प्रमाणित दुकानों में बेची जाएंगी।
  • यह अधिनियम केंद्र सरकार को कुछ निश्चित वस्तुओं को अधिसूचित करने में सक्षम बनाएगा जिन्हें आवश्यक रूप से मानक चिह्न (Mark) के अंतर्गत लाना है।
  • ऐसी वस्तुएं जो-
    (i) सार्वजनिक हित या मानव, पशु तथा पौधे, स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए हों,
    (ii) पर्यावरण सुरक्षा के लिए हों,
    (iii) अनुचित व्यापार व्यवहार की रोकथाम के लिए हों, और
    (iv) राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सरकारी दृष्टिकोण से आवश्यक हों, उन्हें सरकार द्वारा अनिवार्य प्रमाणीकरण व्यवस्था के अंतर्गत लाया जा सकता है।
  • ब्यूरो को विक्रय की गई या आपूरित वस्तुओं या सामान को वापस भी मंगाने का अधिकार होगा।
  • यह कार्यवाही तभी होगी जब ब्यूरो समझता है कि वस्तु या सामान मानक के अनुरूप नहीं हैं।
  • भारतीय मानक चिह्न का दुरुपयोग करने पर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
  • जब एक कंपनी अधिनियम के प्रावधान के तहत कोई आपराधिक कृत्य करती है, तो कंपनी के उत्तरदायी व्यक्तियों या प्रभारी को अपराधी माना जाएगा, चाहे उसे अपराध के संदर्भ में ज्ञान, सहमति या मिलीभगत न हो।
  • लाभ
  • भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 2016 भारत में व्यापार करने में सरलता प्रदान करेगा।
  • यह अधिनियम ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को प्रोत्साहित करेगा।
  • यह अधिनियम ग्राहकों के लिए गुणवत्तापूर्ण उत्पाद एवं सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा।
  • निष्कर्ष
    ‘भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 2016’ माल वस्तु, प्रसंस्करण, पद्धति और सेवाओं के मानकीकरण, अनुरूपता, निर्धारण और गुणवत्ता आश्वासन के क्रिया-कलापों के सामंजस्यपूर्ण विकास हेतु एक राष्ट्रीय मानक निकाय की स्थापना और उससे संबद्ध या उसके आनुषंगिक विषयों का उपबंध करने के लिए अधिनियम है। अधिनियम का विस्तार संपूर्ण भारत पर होगा।

लेखक-नीरज ओझा


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