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नीति आयोग : पिछड़े जनपदों में बदलाव के लिए बैठक

Policy Commission: Meeting for Change in Backward Districts

महात्मा गांधी ने कहा था, ‘‘सतत् विकास ही जीवन की विधि है’’। इसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु योजना आयोग की स्थापना 15 मार्च, 1950 को मंत्रिमंडल के संकल्प से की गई थी। लगभग 65 वर्ष पश्चात् देश एक अविकसित अर्थव्यवस्थाओं से निकलकर अर्थव्यवस्थाओं वाले एक उद्गामी राष्ट्र के रूप में परिवर्तित हो रहा है। परिवर्तनशील भारत की गतिशीलता को परिभाषित और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से योजना आयोग के स्थान पर नीति आयोग (1जनवरी, 2015) का गठन हुआ। नीति आयोग एक परामर्शदाती संस्था है इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है।

  • प्रधानमंत्री के नवभारत निर्माण वर्ष 2022 की सफलता के लिए कैबिनेट सचिव पी.के. सिन्हा की अध्यक्षता में पहली बैठक 24 नवंबर, 2017 को कैबिनेट सचिव स्तर के अधिकारियों एवं नामित प्रभारी अधिकारियों के साथ संपन्न हुई।
  • नीति आयोग के कैबिनेट सचिव स्तर की बैठक में 115 पिछड़े जनपदों का चयन किया गया है, जिसमें लाखों लोगों के जीवन में बदलाव की जरूरत महसूस की गई। इन जनपदों में नक्सल प्रभावित 35 जनपद तथा जम्मू-कश्मीर सहित पूर्वोत्तर राज्यों में 15 जनपद आतंकवाद से प्रभावित हैं।
  • कैबिनेट सचिव स्तर के अधिकारियों एवं प्रभारी अधिकारियों को सरकार की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु सरकारी प्रयास के स्तर को और तेज करने का भी निर्देश दिया गया।
  • इन योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु पर्याप्त धन अग्रिम तौर पर उपलब्ध कराया गया है, साथ ही फ्लेक्सी-फंड का भी इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।
  • कैबिनेट सचिव ने प्रभारी अधिकारियों को सलाह दी है कि वे वर्ष 2022 को ध्यान में रखते हुए जनपद प्रशासन को सूचित करें जिससे केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों का दायरा बढ़ाने में मदद मिले।
  • इन जनपदों में प्रमुख परिणामों के साथ सुधारों की निगरानी के लिए एक मजबूत तंत्र (प्रणाली) स्थापित की जाए।
  • नीति आयोग राज्य में वास्तविक समय में निगरानी प्रणाली स्थापित करने हेतु आंध्र प्रदेश सरकार के साथ एक समझौता-ज्ञापन किया है।

लेखक-रमेश चंद्र