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नासा : मंगल पर झील के प्रमाण

September 27th, 2017
NASA: Evidence of Lake on Mars
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  • जीवन सहायक परिस्थितियां
    पृथ्वी पर जीवन का अध्ययन करके वैज्ञानिकों को जीवन के अनुकूल परिस्थितियों के विशिष्ट तथ्य की व्यापक जानकारी प्राप्त हो चुकी है। जिसमें कार्बन को अतिआवश्यक तत्व माना गया है क्योंकि इसके परमाणुओं में लंबे-लंबे अणु बनाने की क्षमता होती है। यद्यपि वैज्ञानिक अन्य तत्वों को भी जीवन का आधार बनाने की कल्पना करते हैं फिर भी कार्बन यह भूमिका सहजता से निर्वहन करता है। जीवन के लिए जल की उपस्थिति अतिआवश्यक मानी जाती है क्योंकि इसमें विभन्न प्रकार के रसायन मिश्रित हो सकते हैं अर्थात जीवन के लिए ग्रह न तो इतना गर्म होना चाहिए की पानी केवल भाप के रूप में हो तथा न ही इतना ठंडा हो कि केवल बर्फ के रूप में ही मिले। इन्हीं तथ्यों के दृष्टिगत वैज्ञानिक सूर्य जैसे तारों को ही जीवन योग्य ग्रहों का रक्षक मानते थे, परंतु हाल ही में लाल बौने तारों के इर्द-गिर्द भी पृथ्वी जैसे ग्रहों की प्रायिकता प्रतीत होने लगी है क्योंकि ऐसे तारे बहुत दीर्घ काल तक अपने इर्द-गिर्द के ग्रहीय मंडलों में स्थायी परिसि`ितियां रख सकते हैं।
  • 28 दिसंबर, 2015 को नासा ने बताया कि मंगल टोही परिक्रमा यान (Mars Reconnaissance Orbiter) से प्राप्त साक्ष्यों से यह निष्कर्ष प्राप्त हुआ कि मंगल ग्रह पर पानी उपस्थित है।
  • मंगल टोही परिक्रमा यान द्वारा इमेजिंग स्पेक्ट्रोमीटर का प्रयोग करके शोधकर्ताओं ने मंगल ग्रह पर जल मिश्रित खनिजों की धाराएं देखी हैं।
  • खनिज युक्त इन लवणीय जल धाराओं का प्रवाह मंगल ग्रह पर जल के बहाव की पुष्टि करता है जो कि जीवन के लिए अति आवश्यक है।
  • हाल ही में नासा की ‘जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी’ (JPL) में कार्यरत अनुसंधानकर्ताओं ने ‘अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन’ में 40 महीनों तक स्थापित रहे एक फिल्टर में एक नए जीवाणु ‘सोलीबैकिलस कलामी’ की खोज की है।
  • इस नव-अन्वेषित जीवाणु का नामकरण भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति एवं प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के सम्मान में किया गया है।
  • वैज्ञानिकों का मानना है कि प्रक्षेपण के दौरान किसी उपकरण के साथ यह जीवाणु अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंच गया और वहां के प्रतिकूल परिस्थितियों में भी जीवित रहा।
  • अतः अब यह तथ्य महत्वहीन हो गया कि खुले अंतरिक्ष के व्योम में उच्च विकिरण में जीव नहीं रह सकते, क्योंकि इनमें उनकी कोशिकाएं फट जाती हैं और उनका डी.एन.ए. नष्ट हो जाता है।
  • यदि अन्य ग्रहों पर जीवन कार्बन और पानी पर आधारित है, तो यह नहीं कहा जा सकता है कि उनके शरीर में कोशिकाएं (Cells) भी होगी तथा निर्मित करने के नियम पृथ्वी के जीवों की तरह डी.एन.ए. पर आधारित होंगे। यह संभव है कि उन जीवों में कोई और व्यवस्था आधार हो।
  • जीवन की तलाश
    हमारे शास्त्रों में लिखा है कि ‘‘अजीर्णे भैषजं वारि जीर्णे वारि बलप्रदम’ अर्थात अजीर्ण में पानी दवा का कार्य करता है तथा भोजन पचाने के पश्चात् शरीर में बल होता है। मनुष्य के लिए जल प्रकृति का उपहार है, केवल मानव के लिए ही नहीं अपितु सृष्टि के संपूर्ण प्राणियों के साथ ही साथ वनस्पतियों के लिए भी जल वरदान है। हमारे अंतरिक्ष वैज्ञानिक जब अन्य ग्रहों पर यान भेजते हैं या स्वयं जाते हैं, तो सबसे पहले ग्रहों पर जीवन की तलाश करते हैं यदि वहां जल है तो जीवन होने की संभावना मानते हैं।
  • मंगल ग्रह पर जीवन की खोज की शुरुआत सबसे पहले सोवियत रूस ने की थी।
  • रूस ने 1 नवंबर, 1962 को अंतर्ग्रही अंतरिक्ष यान मार्स-1 को मंगल पर प्रक्षेपित किया था।
  • क्यूरियोसिटी मंगल पर भेजे गए पूर्व के रोवर से पांच गुना भारी है।
  • क्यूरियोसिटी का मुख्य कार्य यह है कि क्या मंगल पर कभी जीवन मौजूद था।
  • 14 मार्च, 2016 को मंगल पर जीवन के लक्षण ढूंढ़ने के लिए यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ईएसए) और रसियन फेडरल स्पेस एजेंसी (रास्कास्मास) में एक रोबोटिक प्रोब का प्रक्षेपण बायकोनूर, कजाख्स्तान से किया गया।
  • ईएसए-रास्कास्मास के इस मिशन का नाम ‘एक्सोमार्स, 2016’ रखा गया है।
  • दो चरणीय मंगल खोज अभियान के पहले चरण ‘एक्सोमार्स, 2016’ को रूस के प्रोटॉन रॉकेट से अंतरराष्ट्रीय समयानुसार 9 बजकर 31 मिनट पर प्रक्षेपित किया गया।
  • दूसरे चरण में वर्ष 2018 में मार्स रोवर को प्रक्षेपित किया जाना है।
  • यह मिशन मंगल पर जीवन की छानबीन के अलावा अगले ‘एक्सोमार्स’ मिशन के लिए आंकड़े प्रदान करने का भी काम करेगा।
  • मंगल पर झील के प्रमाण
  • नासा के मंगल विज्ञान प्रयोगशाला के वैज्ञानिकों ने एक नए अध्ययन से इस तथ्य की पुष्टि की है कि मंगल पर अरबों वर्ष पूर्व में लंबी अवधि तक झीलों में पर्याप्त पानी संचित रहा है।
  • रोवर के प्रेक्षणों से यह स्पष्ट होता है कि लंबे समय तक बहने वाली धाराएं तथा झीलों की शृंखलाएं लगभग 3.8 से 3.3 अरब वर्ष पूर्व तलछट के धीरे-धीरे जमाव से तीक्ष्ण धाराओं के अवशेष अब भी प्रतीत होते हैं।
  • इन्हीं निष्कर्षों के आधार पर वैज्ञानिक दावा कर रहें है कि मंगल पर प्राचीन झीलें थी जो भविष्य में मंगल पर जीवन की संभावना को आशान्वित करती हैं।
  • एक नए विश्लेषण के अनुसार, 500 मिलियन वर्ष पूर्व प्राचीन नदियों एवं झीलों के आधार परत मुख्य रूप से नष्ट हो गई हैं।
  • मंगल पर प्राप्त पंकारम (Mudstone) पानी की उपस्थिति को प्रदर्शित करते हैं जो कि झील में लंबे समय तक ठहरे पानी के अवशेष हैं।
  • इन झीलों के तलछट के जमाव से पहाड़ के निचले भाग का गठन हुआ।
  • अनुसंधानकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि मंगल के गेल क्रेटर में स्थित अवशेष झील विभिन्न स्तरों में विभाजित है इसका तात्पर्य यह है कि झील के विभिन्न भागों में पानी तीक्ष्ण रासायनिक या भौतिक अंतर को प्रदर्शित करता था।
  • वैज्ञानिकों का स्पष्ट विचार है कि मंगल पर प्राचीन धाराएं एवं नदियां अस्थायी थी जो कभी सूख जाती थी और कभी बहने लगती थी।
  • रोवर के आंकड़ों से वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि दरियानुमा झील में पानी से दर्रे बने थे, जिनका मुंह घाटी की तरफ खुलता था जिससे तलछट जमा होने से डेल्टा बना।
  • ध्यातव्य है कि मंगल पर अपार्च्यूनिटी रोवर, 2011 से यहां के इंडीवर क्रेटर के पश्चिमी छोर का अध्ययन कर रहा है जो कि 22 किलोमीटर तक विस्तृत है।
  • 15 से 17 डिग्री की ढाल पर घाटी की क्रेस्ट के रूप में फैली हुई है।
  • अन्य तथ्य
  • मंगल सौरमंडल में सूर्य से चौथा ग्रह है।
  • मंगल को ‘लाल ग्रह’ भी कहते हैं।
  • सौरमंडल का सबसे ऊंचा पर्वत ‘भोलम्पस मोन्स’मंगल पर स्थित है।
  • मंगल के दो चंद्रमा ‘फोबोस तथा डिमोज़’ हैं, जो छोटे एवं अनियमित आकार के हैं।
  • रात्रि में मंगल को नंगी आंखों द्वारा देखा जा सकता है।
  • मंगल ग्रह को युद्ध का देवता भी कहा जाता है।
  • मंगल, पृथ्वी के व्यास का लगभग आधा है।
  • मंगल ग्रह सूर्य से लगभग 22.80 करोड़ किलोमीटर की दूरी पर है।
  • मंगल ग्रह सूर्य की परिक्रमा 607 दिन में पूर्ण करता है।
  • सारांश
    जब से मानव ने चांद पर कदम रखा विज्ञान की खोज निरंतर बढ़ रही है। पृथ्वी के अलावा अन्य ग्रहों पर भी जीवन की संभावनाएं वैज्ञानिकों द्वारा तलाशी जा रही हैं। कुछ नया खोजते रहना मनुष्य का स्वभाव है। आज हम विज्ञान एवं विज्ञान से संबंधित अनेक वस्तुओं का प्रयोग कर रहे हैं। यह सब मनुष्य की खोजी प्रवृत्ति का ही परिणाम है। खासतौर से ब्रह्मांड के रहस्य मानव को सदा लुभाते रहे हैं। हालांकि ब्रह्मांड में उपस्थित अनेक ग्रहों को तो वैज्ञानिकों ने खोज निकाला है परंतु उन ग्रहों पर जीवन या जीवन की संभावना है या नहीं इस तथ्य की खोज जारी है। मंगल पर झील के प्रमाण से जीवन की तलाश को प्रमाणित करती है कि अब वह दिन दूर नहीं जब मंगल पर भी जीवन संभव होगा।

लेखक-सुरेश कुमार पटेल


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