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नई हाइड्रोकार्बन नीति

July 27th, 2017
New hydrocarbon policy
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  • पृष्ठभूमि
    वर्तमान में भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है और वर्ष 2015-16 में इसकी सकल घरेलू उत्पाद दर 7.6 प्रतिशत हो गई है। तीव्र गति से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था में ऊर्जा की मांग बढ़ी है जिससे कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की मांग में भी भारी वृद्धि हुई है। प्रधानमंत्री की वर्ष 2022 तक भारत के पेट्रोलियम आयात बिल में 10 प्रतिशत तक कमी लाने संबंधी घोषणा के दृष्टिगत पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नए तेल और गैस ब्लॉक लाइसेंसिंग नीति का शुभारंभ किया।
  • प्रमुख बिंदु
  • केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि नई नीति भारत में व्यापार निवेशक अनुकूल गंतव्य बनाने की रणनीति है तथा देश के तेल उत्पादन को वर्तमान में 8 करोड़ टन से बढ़ाकर 15.5 करोड़ टन करना इसका लक्ष्य है।
  • पेट्रोलियम मंत्री ने सरकार के ‘ओपन एक्रीऐज लाइसेंसिंग नीति’ (Open Acreage Licensing Policy : OALP) और राष्ट्रीय डाटा भंडार के उद्घाटन के अवसर पर कहा कि OLAP, सरकार के हाइड्रोकार्बन अन्वेषण लाइसेंस नीति (Help) का एक हिस्सा है।
  • भारत सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, यह नीति भारत में हाइड्रोकार्बन के अन्वेषण और उत्पादन गतिविधियों के लिए 2.8 मिलियन वर्ग किलोमीटर का तलछटी बेसिन खोल सकता है।
  • भारत में भूकंपीय तलछटी बेसिन के डाटा की कमी तेल और गैस की खोज और उत्पादन में बाधा डाल रही है। डाटा की अनुपलब्धता के कारण भारत के तलछटी बेसिन के 52 प्रतिशत हिस्से का मूल्यांकन नहीं किया गया है।
  • नई नीति के अनुसार, अन्वेषण कंपनियां स्वयं के लिए ब्लॉकों का चयन कर सकती हैं।
  • नई नीति हाइड्रोकार्बन खोज एवं उत्पादन के लिए 2.8 मिलियन वर्ग किलोमीटर का बेसिन उपलब्ध कराएगी। आरंभ में ब्लॉकों के लिए आवेदन संबंधित बोलियां एक वर्ष में दो बार-जनवरी और जुलाई में होंगी।
  • OALP भारत के अन्वेषण एवं उत्पादन में एक मूलभूत बदलाव है। यह नीति भारत सरकार की प्रशासनिक और नियामक बोझ को कम करने की प्रतिबद्धता को दोहराती है, जिससे व्यापार करने में आसानी होती है।
  • गैस पर गैस प्रतियोगिता (Gass-On-Gass) एक प्रकार का एलएनजी (L.N.G.) मूल्य निर्धारण तंत्र है। इसकी कीमत मांग एवं आपूर्ति के अंतर द्वारा निर्धारित की जाती है और यह कारोबार विभिन्न समयों पर (दैनिक, मासिक अथवा वार्षिक) पर किया जाता है।
  • हाइड्रोकार्बन अन्वेषित लघु क्षेत्र नीति
  • घरेलू उत्पादन में वृद्धि करने और वर्षों से इस्तेमाल न किए जा रहे हाइड्रोकार्बन संसाधनों के मौद्रिकरण के लिए सरकार ने अन्वेषित लघु क्षेत्र नीति, 2015 तैयार की है।
  • इस नीति के अंतर्गत अनुमानतः हाइड्रोकार्बन संबद्ध स्थान में 625 मिलियन बैरल तेल और तेल समकक्ष गैस धारित तल पर उथले पानी में 1500 वर्ग किलोमीटर तक फैले 46 अनुबंध क्षेत्रों में 67 तेल और गैस क्षेत्र आवंटित किए जाएंगे।
  • हाइड्रोकार्बन अन्वेषण लाइसेंस नीति का महत्व
  • हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन (Exploratation) पॉलिसी (Policy) का लक्ष्य देश में तेल उत्पादन को मौजूदा 8 करोड़ टन से वर्ष 2022 तक दोगुना करना।
  • हाइड्रोकार्बन खोज लाइसेंस नीति परंपरागत एवं गैर-परंपरागत तेल एवं गैस स्रोतों के खोज का एकल लाइसेंस प्रदान करती है।
  • नई हाइड्रोकार्बन नीति का उद्देश्य ऊर्जा एवं पेट्रोलियम क्षेत्र में निवेश को बढ़ाना और निवेशकों को परिचालन संबंधी लचीलापन उपलब्ध कराना है।
  • नई नीति के अनुसार, सरकार उत्पादकों के साथ सूक्ष्म प्रबंधन एवं निगरानी नहीं करेगी अपितु आय को साझा करेगी। यह पूर्णतः खुली एवं नियमित व्यवस्था होगी।
भारत में घरेलू गैस उत्पादन

भारत में घरेलू गैस उत्पादन को बढ़ाने में अपरंपरागत हाइड्रोकार्बन संसाधनों की मुख्य भूमिका रही है। वर्ष 2015-16 में कोल बेड मीथेन उत्पादन 1MMSCMD (Million Metric Standard Cubic Meter Per Day) तक पहुंच गया है। भारत में शेल गैस का भंडार लगभग 300 TCF (Trillion Cubic Feet) से 2100 TCF के मध्य हो सकता है। वर्तमान में शेल गैस अन्वेषण का कार्य ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (O.N.G.C.) और ऑयल इंडिया लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है।

  • इस नीति के माध्यम से सरकार इस क्षेत्र में विकास हेतु वैश्विक स्तर पर प्रचलित गतिविधियों और आधुनिक प्रौद्योगिकी को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी।
  • निष्कर्ष
    नई हाइड्रोकार्बन अन्वेषण लाइसेंस नीति का मुख्य उद्देश्य नियमों में पारदर्शिता लाना, सुचारु व्यवस्था करना और निवेशक हितैषी बनाना। नई नीति पारदर्शी और प्रेरक क्रियाशील ढांचा तैयार करके इन नीतिगत सुधारों को कार्यान्वित करने का प्रयास कर रहा है। हालांकि इन सुधारों का उद्देश्य संबद्ध स्थान पर समुचित राजस्व को प्रोत्साहित करते हुए एक स्थिर विनियामक परिवेश तैयार करके भारत में निवेश का वातावरण बनाना है तथापि विगत कुछ वर्षों में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के सुस्त पड़े उत्पादन में बढ़ोत्तरी के लिए एक बहुमुखी दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।

लेखक-प्रभात सिंह


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