Contact Us: 0532-2465524, 25, M.-9335140296    
E-mail : ssgcpl@gmail.com

डिजिटल एमएसएमई योजना

July 25th, 2017
Digital messaging scheme
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

  • पृष्ठभूमि
    सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार है और रोजगार सृजन के मुख्य घटकों में से एक है। विगत कुछ वर्षों में लगातार सफलता अर्जित करने के बावजूद भारतीय एमएसएमई क्षेत्र कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। परंपरागत समस्याओं के अतिरिक्त भारतीय एमएसएमई क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए भारतीय एमएसएमई क्षेत्र में अपनी प्रतिस्पर्धा में सुधार लाने हेतु विविध उपाय किए जाने अपेक्षित हैं। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) का उपयोग उन महत्वपूर्ण उपायों में से एक है, जो एमएसएमई को व्यापार के लगभग हर पहलू में मदद कर सकता है। 11वीं पंचवर्षीय योजना से ‘एमएसएमई क्षेत्र में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने की योजना’ (ICT Scheme) चल रही है। ‘क्लाउड कंप्यूटिंग’ (Cloud Computing) संकल्पना के उद्भव के मद्देनजर यह योजना संशोधित की गई है और योजना को ‘डिजिटल एमएसएमई योजना’ नाम दिया गया है।
  • डिजिटल एमएसएमई योजना
  • 21 जून, 2017 को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय द्वारा ‘डिजिटल एमएसएमई योजना’ (Digital MSME Scheme) का शुभारंभ किया गया।
  • यह योजना ‘राष्ट्रीय विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता कार्यक्रम’ (National Manufacturing Competitiveness Programme) का घटक है।
  • योजना क्लाउड कंप्यूटिंग (Cloud Computing) पर केंद्रित है।
  • क्लाउड कंप्यूटिंग एमएसएमई द्वारा अपने यहां स्थापित सूचना प्रौद्योगिकी (IT) बुनियादी ढांचे की तुलना में लागत प्रभावी और व्यवहार्य विकल्प के रूप में उभर कर सामने आई है।
  • क्लाउड कंप्यूटिंग के तहत एमएसएमई अपनी कारोबारी प्रक्रियाओं के समुचित प्रबंधन हेतु साझा (Common) एवं स्वयं के लिए स्थापित सॉफ्टवेयर समेत आईटी बुनियादी ढांचे तक अपनी पहुंच सुनिश्चित करने हेतु इंटरनेट का उपयोग करते हैं।
  • क्लाउड कंप्यूटिंग के लाभ
  • क्लाउड कंप्यूटिंग के अंतर्गत हार्डवेयर/सॉफ्टवेयर और बुनियादी ढांचागत सुविधाओं पर निवेश की आवश्यकता नहीं होती है।
  • यह ‘जैसा आप उपयोग करते हैं, उसी रूप में भुगतान करें’ मॉडल का अनुसरण करता है और उपयोगकर्ता को अग्रिम निवेश नहीं करना पड़ता है।
  • विशिष्ट सेवाओं का उपयोग करने की प्रारंभिक लागत काफी कम हो जाती है।
  • क्लाउड कंप्यूटिंग ऑपरेशन आसानी से मापनीय हैं।
  • उपयोगकर्ता अपनी आवश्यकताओं के आधार पर विभिन्न सेवाओं का उपयोग कर सकता है।
  • क्लाउड कंप्यूटिंग का उपयोग डिवाइस एवं स्थान को स्वतंत्र पहुंच की सुविधा प्रदान करता है।
  • सॉफ्टवेयर का रख-रखाव/अद्यतन करना उपयोगकर्ताओं की जिम्मेदारी नहीं होती है।
  • योजना का उद्देश्य
  • एमएसएमई को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार और उनके उत्पादन एवं व्यवसाय प्रक्रियाओं में सूचना एवं दूरसंचार प्रौद्योगिकी (ICT) को अपनाने के लिए क्लाउड कंप्यूटिंग के प्रति संवेदनशील बनाना और प्रोत्साहित करना।
  • उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए सर्वोत्तम पद्धतियों को अपनाना।
  • क्लाउड प्लेटफार्म का उपयोग करते हुए हार्डवेयर/सॉफ्टवेयर पर निवेश के भार को कम करना।
  • अवसंरचना संबंधी कार्य-कलापों पर क्लाउड कंप्यूटिंग के माध्यम से बड़ी संख्या में एमएसएमई को अपने व्यावसायिक प्रक्रिया के मानकीकरण, डिलीवरी टाइम में सुधार, इन्वेंटरी (Inventory) लागत में कमी, उत्पादन की गुणवत्ता और उत्पादकता में सुधार करना।
  • योजना के परिणाम
  • क्लाउड कंप्यूटिंग के माध्यम से एमएसएमई के लिए लागत प्रभावी और सर्वसमावेशी सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी अनुप्रयोगों के पारितंत्र को बढ़ावा देना।
  • एमएसएमई विकास आयुक्त कार्यालय के प्रौद्योगिकी केंद्रों और संस्थानों के मध्य ‘इंटर एंड इंट्रा नेटवर्क’ (Inter and Intra Network) स्थापित करना।
  • एमएसएमई को मूल्य शृंखला (कच्चे माल, विशेषज्ञ) की खोज ऑनलाइन करने में सक्षम बनाना।
  • संचार के माध्यम के रूप में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) बाजारों तक पहुंच को मजबूत करती है और बाजारों तक मजबूत पहुंच प्रत्यक्ष, तीव्र एवं बेहतर लेन-देन को सशक्त बनाती है।
  • भारतीय एमएसएमई क्षेत्र : अद्यतन स्थिति
  • 18 अक्टूबर, 2016 को लुधियाना (पंजाब) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो योजनाओं नामतः ‘राष्ट्रीय अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति हब’ और ‘जीरो डिफेक्ट, जीरो इफेक्ट’ (ZED) का शुभारंभ किया।
  • जीरो डिफेक्ट, जीरो इफेक्ट के तहत गुणवत्ता सुधार हेतु ‘जेड (ZED) परिपक्वता मूल्यांकन मॉडल’ के तहत 22222 एमएसएमई के उन्नययन का प्रस्ताव है।
  • राष्ट्रीय अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति हब का शुभारंभ अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति उद्यमों से 4 प्रतिशत सार्वजनिक खरीद के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए किया गया है।
  • सरकार द्वारा ‘क्रेडिट गारंटी स्कीम’ के तहत ऋण आच्छादन को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
  • साथ ही ‘क्रेडिट गारंटी फंड’ के कोष को भी 2500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 7500 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
  • एमएसएमई क्षेत्र के बजटीय आवंटन को वर्ष 2016-17 में 3000 करोड़ रुपये से 216 प्रतिशत बढ़ाकर वर्ष 2017-18 में 6482 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
  • प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत ऋण देने के लक्ष्य को वर्ष 2016-17 में 122000 करोड़ रुपये से दोगुना करके वर्ष 2017-18 में 244000 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
  • ‘प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम’ (PMEGP) के तहत अप्रैल, 2014 से मार्च, 2017 के दौरान 145420 इकाइयां स्थापित की गईं।
  • क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी स्कीम (CLCSS) के अंतर्गत वर्ष 2014-17 के दौरान 16304 एमएसई (MSE) के लिए सब्सिडी के रूप में 1027.82 करोड़ रुपये जारी किए गए।
  • मंत्रालय द्वारा विश्व बैंक की सहायता से 2200 करोड़ रुपये की लागत से 15 नए प्रौद्योगिकी केंद्रों की स्थापना और 18 मौजूदा प्रौद्योगिकी केंद्रों का उन्नयन किया जा रहा है।
  • भारत में कृषि क्षेत्र के बाद सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र सबसे बड़ा नियोक्ता है।
  • विगत कुछ वर्षों में एमएसएमई क्षेत्र की वृद्धि दर 10 प्रतिशत से अधिक रही।
  • छः हजार से अधिक उत्पादों का उत्पादन करने वाले एमएसएमई क्षेत्र के 50 मिलियन उद्यमों में 110 मिलियन से अधिक लोगों को रोजगार प्राप्त है।
  • सारांश
    विगत कुछ दशकों में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) ने व्यावसायिक गतिविधियों को आसान बना दिया है। यह प्रतिस्पर्धात्मकता, बेहतर उत्पाद एवं सेवा वितरण, प्रक्रिया लागत कम करने और प्रबंधन सूचना प्रणालियों (MIS) का समर्थन करने का एक प्रमुख साधन बन गया है। भारतीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए ‘डिजिटल एमएसएमई योजना’ प्रारंभ की गई है। योजना के माध्यम से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय एमएसएमई क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि ोगी। साथ ही उत्पाद एवं सेवाओं के बेहतर वितरण एवं प्रक्रिया लागत में भी कमी आएगी।

लेखक-नीरज ओझा


  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •